टोंक। सरपंच संघ राजस्थान की मांगों का समाधान करने की मांग को लेकर सरपंच संघ जिलाध्यक्ष मुकेश मीणा के नेतृत्व में पन्द्रह सूत्रीय मांगों को लेकर मुख्यमंत्री एवं ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के नाम जिला कलेक्टर डॉ. सौम्या झा को ज्ञापन सौंपा। सरपंच भंवरलाल बैरवा, कमलेश कुमार, नेमीचंद मीना, शांतीलाल मीना, रूपनारायण कुम्हार एवं चौथमल मीना आदि ने दिये गये।
ज्ञापन में बताया कि राज्य वित्त आयोग 2022-23 का बकाया भुगतान करीबन 600 करोड़ रूण् एवं वित्तीय वर्ष 2023-24 का करीबन 4 हजार 142 करोड़ रू. बकाया एवं चालू वित्तिय वर्ष 2024-25 की बकाया किस्त लगभग 2 हजार करोड़ रूपये बकाया है, 6 हजार 742 करोड़ रूपये अनुदान राशि बकाया है, जिन्हें जल्द केन्द्रीय वित्त आयोग की 2023-24 की द्वितीय किकी राशि 72.86 करोड़ रु एवं चालू वित्तीय वर्ष 2014-15 की प्रथम किस्त दो हजार करोड़ रूपये जिसे जल्द जारी किया जाये,
जल जीवन मिशन योजना का सम्पूर्ण तथालन संधारण पीएचईडी विभाग को दिया जाये, पेयजल से सभी योजनाओं के विद्युत कनेक्शनो को व्यावसायिक से हटाकर कृषि श्रेणी में किया जाये, 15 वें वित्त आयोग एवं 6 वे राज्य वित्त आयोग के दिशा निर्देश जारी करते समय उनमें ग्राम पंचायत को प्रदत्त अनुदान के समायोजन के लिए पंचायत समितियों को अधिकृत कर दिया गया। यह प्रक्रिया कार्यकारी सस्थाओं ;ग्राम पंचायतोंद्ध के शोषण का माध्यम बनी हुई है। इस प्रक्रिया में ग्राम के कार्मिकों एवं जनप्रतिनिधियों को बहुत अधिक मानसिक प्रताडऩा दी जा रही है।
ग्राम पंचायतों को सनायोजन जटिलताओं से मुक्ति करायें, लम्बित प्रधानमंत्री आवास प्लस व मुख्यमंत्री आवास की प्रतिक्षा सूची की स्वीकृति शीघ निकाली जायें तथा इस पर मिलने वाली अनुदान राशि बाई जायें बंचित पात्र परिवारों को जोडऩे के लिये पोर्टल खोला जावें, खाद्य सुरक्षा योजना के अन्तर्गत जनसंख्या के 2011 के आकड़ों के आधार पर केन्द्र सरकार द्वारा खाद्य सुरक्षा आकडे निर्धारित किये जाते है, जो कि वर्तमान जनसंख्या के आधार पर रेशो वाकर तय किया जाना चाहिये ताकि शेष रहे पात्र परिवारों को योजना से जोडा जा सकें।
खाद्य सुरक्षा पोर्टल चालू किया जायें, पंचायती राज में रिक्त पड़े कनिष्ठ अभियंता के पदों पर शीघ्र से शीघ्र भर्ती कराने का श्रम करें, पूर्व में सरपंच के चुनाव दो चरणों में हुये ये प्रथम चरण में हुये चुनाों की ग्रामपंचायतों का कार्यकाल बढ़ाते हुए पचायतीराज के चुनाव एक साथ करायें जायें, बीएसआर दर का निर्धारण चाजार दर से निर्धारण किया जाये।
हाल ही में हो रही चीएसआर कई जिलो में पूर्व की अपेक्षा 30 प्रतिशत तक कम करके निर्धारण किया जा रहा है जो गलत है इसका पुन: निर्धारण किया जायें, सरपंचों का मानदेय बढ़ाकर 20 हजार किया जायें तथा सरपंच पद का कार्यकाल पूर्ण होने पर अंतिम मानदेय की 50 प्रतिशत राशि पेंशन के रूप में भुगतान करने का प्रावधान किया जाए ।
साथ ही ग्राम पंचायतों के वार्ड पंचों का बैठक भत्ता 500 रूपये प्रति बैठकक किया जायें, राष्ट्रीय राजमार्ग एवं राज्यमार्गो के हाईवेज पर सरपंचों को टोल-फ्री पास जारी करवायें जायें, राज्य में पंचायत राज कल्याण कोष या बोर्ड की स्थापना की जायें, सरपंचों के अधिकारों में कटौती के लिये पंचायत समिति सदस्यों एवं जिला परिषद सदस्यों द्वारा सरकार पर अनावश्यक दयाव चनाया जा रहा है, जो पंचायती राज एक्ट के विरुद्ध मांगे उठाई जा रही है।
अत: सरपंच संघ अपने अधिकारों पर अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं करेगा। सरकार से आग्रह है कि सरपंचों के अधिकारों में किसी भी प्रकार की कटौती नहीं की जायें, ग्राम पंचायतों में हो रहे अतिक्रमण एवं अन्य सरकारी कार्यों के लिए ग्राम पचायतों को पुलिस इंदाद के लिए उपखण्ड अधिकारी एवं तहसीलदार स्तर पर जाना पड़ता है जो लम्बी प्रकिया है, ग्राम पंचायतों को तुरन्त प्रभाव से कार्य करने एवं अतिक्रमण अन्य सरकारी कार्य हेतु पुलिस इंदाद तुरन्त उपलध कराई जावें। उन्होने मांग की है कि मांगों को सरकार समय रहते समाधान नहीं करती है तो सरंपच संघ राजस्थान को मजबूरन आन्दोलन कर 18 जुलाई को विधानसभा घेराव करेंगे।