पुलिस हो तो भीलवाड़ा जैसी, वाह ,गोवंश से कुकृत्य के आरोपी को बांग्लादेश बॉर्डर से किया गिरफ्तार

भीलवाड़ा / अमन ठठेरा । पूरे प्रदेश में भीलवाड़ा जैसी पुलिस और धर्मेंद्र सिंह यादव जैसा पुलिस अधिकारी हो तो प्रदेश में जहां अपराधियों पर नकेल तो लगेगी ही साथ ही अपराधी पुलिस से बच नहीं सकते। जी हां भीलवाड़ा पुलिस ने एसपी धर्मेंद्र सिंह यादव के नेतृत्व में 13 दिन पूर्व शहर में गोवंश के साथ क कृत्य कर फरार हुए आरोपी को 2000 किलोमीटर तक पीछा कर बांग्लादेश की बॉर्डर से गिरफ्तार कर लिया है।
शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा था जिसमें एक युवक गोवंश के साथ कुकृत्य करता हुआ दिखाई दिया था। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के 2 दिन बाद 29 मार्च 2026 को कोतवाली थाने में प्राथमिक की दर्ज कराई गई थी। बताया जाता है कि 27 मार्च को घटित हुई इस घटना को लेकर हिंदू संगठनों ने आक्रोश व्यक्त किया था और प्राथमिक की दर्ज कराई थी।
पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह यादव ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पारस जैन और वृत्ताधिकारी सज्जन सिंह राठौड़ के नेतृत्व में तीन विशेष टीमें गठित की गईं और आरोपी पर ₹20000 का इनाम भी घोषित किया। गठित टीम ने घटनास्थल और शहर भर के करीब 1500 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाले, जिसमें आरोपी की गतिविधियां सामने आईं।
जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि आरोपी ट्रेन के जरिए भीलवाड़ा आता, वारदात को अंजाम देता और तुरंत फरार हो जाता था। इसके बाद पुलिस टीमों ने भीलवाड़ा से लेकर अजमेर, जयपुर, आगरा, कानपुर, प्रयागराज, मिर्जापुर और आसनसोल तक रेलवे स्टेशनों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले।
पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह यादव ने जानकारी देते हुए बताया कि लगातार ट्रैकिंग और राज्यों के बीच समन्वय के चलते आरोपी की लोकेशन बिहार के किशनगंज क्षेत्र में मिली, जहां आरपीएफ की मदद से उसे पकड़ कर गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान संजय कुमार साहु (56) निवासी जमशेदपुर, झारखंड के रूप में हुई है। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि वह पूर्व में भी भीमगंज थाना क्षेत्र में इसी तरह की वारदात कर चुका है। आरोपी के खिलाफ राजस्थान गोवंशीय पशु अधिनियम 1995 की धारा 9 और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा 11 के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच जारी है।
इस पूरी कार्रवाई में कोतवाली थाना, साइबर सेल, आरपीएफ और अन्य इकाइयों की संयुक्त टीम की अहम भूमिका रही। पुलिस की सतत निगरानी, तकनीकी विश्लेषण और समन्वित प्रयासों से आखिरकार आरोपी तक पहुंचना संभव हो सका, जिससे शहर में फैले आक्रोश को भी राहत मिली।
