IPS पर जानलेवा हमला करने के 16 आरोपियों को उम्र कैद की सजा,15 साल बाद आया फैसला

जयपुर /डॉ. चेतन ठठेरा। मुरादाबाद के बहुचर्चित मैनाठेर कांड में 15 साल बाद फैसला आया। इसमें आईपीएस अशोक कुमार सिंह पर जानलेवा हमला करने के 16 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
एडीजे कोर्ट ने 4 दिन पहले आरोपियों को दोषी करार दिया था। अशोक सिंह वर्तमान में लखनऊ में अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) हैं। आरोपियों के समाजवादी पार्टी से जुड़ा होने ही बात सामने आई थी।
यह था मामला
यह घटना 5 जुलाई, 2011 की है। मैनाठेर थाने के एक गांव में छेड़छाड़ के आरोपी को पकड़ने के लिए पुलिस टीम ने दबिश दी थी। इस दौरान पुलिस ने आरोपी को पकड़ भी लिया था, लेकिन, आरोपियों और कुछ अराजक तत्वों ने यह कहकर शोर मचा दिया कि पुलिस टीम ने दबिश के दौरान कुरान का अपमान किया है।
इसके बाद भीड़ सड़क पर उतर आई । अगले दिन 6 जुलाई, 2011 को भीड़ ने पहले मैनाठेर थाने पर पथराव किया फिर उसमें आग लगा दी थी। पुलिस की गाड़ियों को भी फूंक दिया।
हथियार लूट लिए। बवाल की सूचना पर तत्कालीन एसएसपी अशोक कुमार सिंह फोर्स लेकर हेड ऑफिस से निकले थे। उनके साथ तत्कालीन डीएम राजशेखर भी थे। मौके पर पहुंच एसएसपी अशोक सिंह ने लाउड हेलर से भीड़ को समझाने की कोशिश करने लगे। इतने में भीड़ ने पथराव शुरू कर दिया।
भीड़ को उग्र होता देख डीएम राजशेखर अपनी कार में बैठकर निकल गए। इस बीच एसएसपी अशोक सिंह के साथ आई फोर्स को यह लगा कि एसएसपी भी डीएम की कार में बैठ कर चले गए हैं।
इसी गलतफहमी में वे भी अपनी गाड़ी को डीएम की गाड़ी के पीछे भगा ले गए। इसके चलते एसएसपी अशोक सिंह भीड़ में अकेले फंसे रह गए। यहां एसएसपी जान बचाने के लिए पेट्रोल पम्प में जा छिपे तो हमलावरों ने उसकी दीवार तोड़ डाली और हमला कर दिया।
विदित है कि अशोक सिंह को सूचना मिली थी कि बवाल मुरादाबाद-सम्भल रोड पर मैनाठेर में हो रहा है। उन्हें इससे कई किमी पहले डींगरपुर में भीड़ जुटने की सूचना नहीं थी। एसएसपी और डीएम एसईजेड बाईपास से होते हुए जैसे ही डींगरपुर चौराहे पर पहुंचे तो वहां भीड़ चौराहे पर आगजनी और उपद्रव करती दिखी।
इस पर एसएसपी ने भीड़ को समझाने के लिए लाउड हेलर से बोलना शुरू किया। इतने में भीड़ और भी उग्र हो गई और अधिकारियों पर ही पथराव शुरू कर दिया।
दो घंटे बाद पहुंची थी मदद, मामला काफी संवेदनशील रहा
हिंसक भीड़ में फंसने के करीब दो घंटे बाद एसएसपी अशोक कुमार सिंह तक मदद पहुंच सकी थी। तत्कालीन आईजी रेंज एमके बिशाल भारी फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे और एसएसपी अशोक सिंह को भीड़ से छुड़ाया। बलवाइयों ने तब तक उन्हें मौत के करीब पहुंचा दिया था। करीब एक महीने तक वो मुरादाबाद के साईं अस्पताल में एडमिट रहे। इसके बाद लम्बे समय तक AIIMS दिल्ली में उनका इलाज चला
इस घटना के बाद एसएसपी अशोक सिंह की सुरक्षा में तैनात 7 पुलिसकर्मियों को बर्खास्त कर दिया गया था। एसएसपी अशोक सिंह के पीआरओ ने मैनाठेर थाने में घटना की एफआईआर दर्ज कराई थी। घटना के करीब 15 दिन बाद तक मुरादाबाद का माहौल बेहद संवेदनशील रहा था।
तत्कालीन मायावती सरकार को मुरादाबाद में डैमेज कंट्रोल करने के लिए अफसरों की फौज भेजनी पड़ी थी। यूपी के तत्कालीन एडीजी लॉ एंड ऑर्डर बृजलाल ने कई दिन तक मुरादाबाद में केम्प किया था। यूपी के अलग-अलग हिस्सों से कई तेज-तर्रार पुलिस अधिकारी रातों-रात मुरादाबाद भेजे गए थे।
मामले में आईपीएस एसोसिएशन ने डीएम राजशेखर की शिकायत मुख्यमंत्री से की थी। घटना के दो दिन बाद मुरादाबाद के डीएम राजशेखर को यहां से हटा दिया गया था।
