शिक्षा निदेशक का नया फरमान,अब स्कूलों में यह होगा जरूरी

जयपुर / डॉ. चेतन ठठेरा स्वतंत्र पत्रकार । राजस्थान में शिक्षा विभाग पिछले कुछ सालों से विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए तथा शिक्षा प्रणाली को बेहतर करने के लिए लगातार नवाचार कर रहा है और इसी कड़ी में विभाग ने इस नए शैक्षणिक सत्र से एक और नवाचार शुरू किया है इसके तहत अब दसवीं बोर्ड की परीक्षा पास करने के बाद विषय चुनने के लिए विद्यार्थियों को परेशान नहीं होना पड़ेगा।
10वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद अब आगे क्या पढ़ें, कौन सा विषय ले,इस सवाल को लेकर विद्यार्थी और अभिभावक अवसर परेशान रहते हैं। विद्यार्थी और अभिभावकों की इस परेशानी को समाप्त करने के लिए शिक्षा विभाग में नवाचार किया है।
अब राजस्थान के सरकारी स्कूलों में अब 10वीं पास विद्यार्थियों को सही संकाय कला, विज्ञान, वाणिज्य या वोकेशनल चुनने के लिए स्कूल स्तर पर ही अनिवार्य रूप से कॅरियर काउंसलिंग दी जाएगी।
शमाध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने इस संबंध में सभी संभागीय संयुक्त निदेशकों को आदेश जारी कर इस कार्यक्रम को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं।
अब जबरदस्ती नहीं, रुचि और क्षमता बनेगी आधार
अक्सर विद्यार्थी दोस्तों की देखा देखी या पारिवारिक दबाव में आकर गलत विषय चुन लेते हैं। नए निर्देशों के तहत अब ऐसा नहीं होगा। स्कूलों के शिक्षक विद्यार्थियों की रुचि, योग्यता और शैक्षणिक क्षमता का आकलन कर उन्हें सही मार्गदर्शन देंगे।
इसके लिए स्कूलों में संकाय परिचय सत्र और अभिभावक-परामर्श बैठकें आयोजित की जाएंगी शिक्षकों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे किसी विशेष संकाय के लिए छात्रों पर दबाव न डालें बल्कि सभी स्ट्रीम्स के रोजगार अवसरों को समान रूप से बताएं ।
यदि कोई विद्यार्थी अपनी योग्यता के अनुसार ऐसा विषय पढ़ना चाहता है जो उसके वर्तमान विद्यालय में उपलब्ध नहीं है, तो शिक्षक उसे शाला दर्पण पोर्टल के माध्यम से नजदीकी स्कूल की जानकारी देंगे। स्कूल विद्यार्थी के घर से 5 किमी दूरी पर है, तो उसे ट्रांसपोर्ट वाउचर का लाभ मिलेगा ।
