अप्रैल में नहीं होंगे पंचायत चुनाव ? सरकार और आयोग आमने-सामने

प्रदेश की 11000 से अधिक पंचायत का फंड अटका, विकास अवरुद्ध ,निकाय और पंचायत चुनाव में पेज फंसा , सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट की अवमानना होने पर अधिकारी होंगे उत्तरदायी
अप्रैल में नहीं होंगे पंचायत चुनाव ? सरकार और आयोग आमने-सामने

जयपुर /डॉ. चेतन ठठेरा स्वतंत्र पत्रकार । राजस्थान में पंचायत चुनाव को लेकर राजस्थान सरकार और चुनाव आयोग आमने-सामने हो गए हैं। हाई कोर्ट द्वारा चुनाव आयोग को 15 अप्रैल तक प्रदेश में पंचायत के चुनाव कराने के आदेश की पालना होती नजर नहीं आ रही है।

चुनाव के अभाव में पंचायत का केंद्र सरकार की उससे मिलने वाला फंड भी अटक जाने से गांव में विकास थे अवरुद्ध हो गया है तथा स्थानीय निकायों के चुनाव भी खटाई में पड़ गए हैं। हालांकि राज्य निर्वाचन आयोग ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट एक फैसले का हवाला दिया है कि बिना आयोग एवं आरक्षण के भी चुनाव कराए जा सकते हैं जैसे मध्य प्रदेश में हाई कोर्ट के आदेश से हुए थे लेकिन राजस्थान में इसकी भी संभावना है क्षीण नजर आ रही है।

क्या है स्थिति

राजस्थान में 11310 ग्राम पंचायत का कार्यकाल समाप्त हो चुका है और इनमें से अधिकांश पंचायत में सरकार ने मौजूदा सरपंचों को प्रशासक के रूप में कार्यरत रखने के आदेश जारी की है राज्य में 1,09,228 पंच और 11320 सरपंच जनता से जुड़े हुए प्रतिनिधि हैं। ‌ प्रदेश में लगभग 7000 सरपंचों का कार्यकाल जनवरी फरवरी और मार्च में समाप्त हो गया था और ग्राम पंचायत का कार्यकाल सितंबर अक्टूबर में ही समाप्त हो गया था कार्यकाल पूरा होने से पहले चुनाव हो जाने चाहिए थे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ‌ चुनाव को लेकर सरकार के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका लगाई गई थी इस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 15 अप्रैल तक राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को 15 अप्रैल तक चुनाव कराने के निर्देश दिए थे हाई कोर्ट के इस फैसले के विरुद्ध सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की शरण लेते हुए पीएलआई लगाई थी जिस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की पीएलआई को खारिज कर हाई कोर्ट के आदेश कोई यथावत रखा था और सरकार को हाई कोर्ट जाने के निर्देश दिए थे।

सरकार और आयोग का क्या है तर्क

सरकार ने तर्क दिया है कि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट अभी तक प्राप्त नहीं हुई है इससे आरक्षण निश्चित नहीं होने से चुनाव करना संभव नहीं है कुछ समय और दिया जाए। उधर ओबीसी आयोग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कहा है कि ओबीसी आरक्षण निर्धारण के लिए सरकार द्वारा दिए गए आंकड़े गलत है सही जानकारी नहीं दी है ऐसी स्थिति में जनसंख्या निर्धारण के लिए आंकड़े फिर से दिए जाएं आयोग के पत्र से स्पष्ट हो गया है कि आरक्षण निर्धारण के लिए अभी समय लगेगा और जब आरक्षण ही निर्धारित नहीं हुआ हो तो आयोग रिपोर्ट कैसे देगा ?

चुनाव नहीं होने से केंद्र सरकार की ओर से पंचायत को मिलने वाला फंड रुक गया है। केंद्रीय वित्त आयोग ने राजस्थान को मिलने वाला लगभग 3000 करोड रुपए जो कि पिछले डेढ़ साल का फंड है रोक रखा था और इसमें से लगभग 1100 करोड रुपए जारी कर दिए गए हैं यह फंड केवल 3800 से अधिक पंचायत के लिए जारी हुआ है जिनका कार्यकाल सितंबर अक्टूबर में पूरा हो चुका था और शेष 1900 करोड रुपए का फंड अब अटक गया है और चुनाव नहीं होते हैं तो यह फंड मिलना मुश्किल है और यह फंड नहीं मिला तो ग्रामीण क्षेत्र के विकास कार्य अवरुद्ध हो जाएंगे ।

प्रदेश की पंचायत को हर साल केंद्रीय वित्त आयोग से विभिन्न मदों में करोड़ों रुपए की सहायता मिलती है जिसमें स्वच्छ भारत मिशन जल जीवन मिशन मनरेगा और अन्य ग्रामीण विकास योजनाओं की राशि सम्मिलित है क्यों योजनाओं की शर्तों में पंचायत में निर्वाचित निकायों का होना प्रमुख है बिना चुनाव के जनप्रतिनिधि नहीं चुने जाते ऐसी स्थिति में यह राशि या तो अटक सकती है या फिर जारी होने में देरी हो सकती है।

ग्राम पंचायत को अपने क्षेत्र में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए दो प्रकार के फंड दिए जाते हैं

टाइट फंड

टाइट फंड का तात्पर्य है इसे बंधा हुआ अनुदान अर्थात स्थाई अनुदान कहा जाता है इस फंड का उपयोग केवल निर्धारित कार्यों जैसे पेयजल आपूर्ति और स्वच्छ भारत मिशन से जुड़े प्रोजेक्ट के लिए किया जाता है।

अनटाइट फंड

इसे मूल अनुदान कहते हैं इस फंड का इस्तेमाल बुनियादी ढांचे जिस सड़क निर्माण सभा मंच निर्माण नाली निर्माण और अन्य विकास कार्य के लिए किया जाता है। फंड नहीं मिलने से पंचायत क्षेत्र में सड़कों एवं सार्वजनिक स्थलों की नियमित सफाई व्यवस्था नहीं होगी नए बायोगैस व जैविक खाद्य प्लांट प्रबंधन कार्य धीमा हो जाएगा ठोस एवं तरल अपशिष्ट परिवर्तन कार्य बाधित होगा सफाई कर्मियों के नए उपकरण खरीदने पर रोक रहेगी पार्कों एवं खेल मैदान की चार दिवारी और फुटपाथ निर्माण पर रोक होगी।

पंचायती राज संस्थाओं के कार्यालय में इंटरनेट की सुविधा बाधित होगी तथा पंचायती राज के अधीन स्कूलों में कक्षा कक्षों का निर्माण प्रभावित होगा पेयजल टंकियां के निर्माण का कार्य धीमा होगा तेजल पाइपलाइन की स्थापना एवं रखरखाव पर भी असर पड़ेगा। ‌

चुनाव में देरी का कारण

आरक्षण विधान के लिए गठित ओबीसी आयोग की रिपोर्ट नहीं मिलना बिना रिपोर्ट के एससी-एसटी के लिए आरक्षण निर्धारण नहीं हो पा रहा है आरक्षण के आंकड़ों के बिना राज्य निर्वाचन आयोग अधिसूचना जारी नहीं कर सकता‌।

राजस्थान में पंचायत और मतदाताओं की स्थिति इस प्रकार है

कुल 14699 ग्राम पंचायत हैं

कल 4 करोड़ 22734 मतदाता है

पुरुष मतदाता 2 करोड़ 862380

महिला मतदाता एक करोड़ 93 लाख 58147

ट्रांसजेंडर मतदाता 207

आयोग ने क्या किया है , कोर्ट की आवाज़ना पर यह होंगे उत्तरदायी

राज्य निर्वाचन आयोग ने अपनी तैयारी पूरी कर ली है।ओबीसी आयोग ने पहले ही अपनी रिपोर्ट नहीं दी हो लेकिन राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी तैयारियां पूरी कर ली है आयोग ने 25 फरवरी को ही अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी थी और एवं तथा वैलिड बॉक्स की व्यवस्था करके उन्हें अपडेट किया जा चुका है प्रशिक्षण भी हो चुका है राज्य सरकार से वार्डों के आरक्षण की रिपोर्ट मिलते ही आयोग चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर सकता है लेकिन आयोग ने रिपोर्ट नहीं दी है।

अगर हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार 15 अप्रैल तक पंचायती राज चुनाव नहीं होते हैं तो सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने अब मानने के कार्यवाही की तो इसके लिए पंचायती राज विभाग के अधिकारी उत्तरदायी होंगे ।

विज्ञापन