सरकारी स्कूल का संस्था प्रधान, मंत्री दिलावर व‌ निदेशक पर भारी

नियम व आदेश कोई मायने‌ नहीं, परीक्षा परिणाम में घोटाला
सरकारी स्कूल का संस्था प्रधान, मंत्री दिलावर व‌ निदेशक पर भारी

जयपुर / डॉ. चेतन ठठेरा स्वतंत्र पत्रकार । राजस्थान में शिक्षा विभाग के एक सरकारी स्कूल का संस्था प्रधान शिक्षा मंत्री दिलावर और शिक्षा निदेशक सीताराम जाट पर भी भारी है वह विभाग के आदेश और नियमों को नहीं मानते और हिटलर शाही अपनाते हैं। यही नहीं अपने हिटलर सही से उन्होंने विभाग द्वारा जारी गाइडलाइन के तहत परीक्षा परिणाम की पारदर्शिता पर ही सवाल खड़े कर दिए और परीक्षा परिणाम में घोटाला कर दिया।

जी हां ऐसा ही कुछ किया है टोंक जिले के निवाई क्षेत्र के हिंगोनिया बुजुर्ग गांव में स्थित राज्य के उच्च माध्यमिक विद्यालय के संस्था प्रधान कुंवर सिंह यादव ने। संस्था प्रधान यादव ने विद्यालय में नामांकन नहीं घटे तथा सरपंच पुत्र सहित विद्यालय के 11 विद्यार्थियों को कक्षा 9 में फेल होने के बाद भी विद्यालय स्टाफ और परीक्षा प्रभारी पर दबाव बनाकर विभाग के निर्देशों को दरकिनार कर परीक्षा परिणाम को अपलोड नहीं कर परीक्षा परिणाम ही बदल दिया और सभी 11 विद्यार्थियों को पास कर दिया।

संस्था प्रधान यह अपनाया हथकंडा

टोंक जिले के निवाई क्षेत्र के हिंगोनिया बुजुर्ग स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय मे कक्षा 9 के परीक्षा परिणाम को लेकर बड़ा घोटाला सामने आया है। आरोप है कि संस्था प्रधान कुंवर सिंह यादव ने, गांव के कुछ प्रभावशाली लोगों के साथ मिलकर, परीक्षा परिणाम में बदलाव करवा दिया। इस घोटाले की पोल तब खुली जब गांव के ही एक युवक ने सारा घपला मोबाइल में कैद कर लिया और उसने सोशल मीडिया पर इसको लेकर पोस्ट कर दिया हालांकि हम सोशल मीडिया पर वायरल इस पोस्ट की पुष्टि नहीं करते हैं।

संस्था प्रधान ने सरपंच व ग्रामीणों के सामने बैठकर यह किया

शिक्षा विभाग के निर्देशों के मुताबिक, 24 मार्च 2026 को परीक्षा परिणाम शाला दर्पण पोर्टल पर लॉक होना था।‌ लेकिन आरोप है कि संस्था प्रधान के निर्देश पर परिणाम को जानबूझकर लॉक नहीं किया गया। स्कूल के 11 छात्र फेल हो गए, जिन्हें पास करने के लिए पूरी पंचायत बिठाई गई।

बताया जा रहा है कि परीक्षा प्रभारी मुकेश कुमार मीणा ने इस तरह परिणाम बदलने को लेकर अपना विरोध भी दर्ज कराया और संस्था प्रधान यादव से कहा कि “परिणाम तो वही रहेगा, बाकी आप संस्था प्रधान हैं, जैसा आप चाहें.” हालांकि यादव ने कहा कि परिणाम तो आपको बदलना ही होगा, चाहे कैसे भी करो मैं अपनी स्कूल में नामांकन को घटने नहीं दे सकता।

विभाग की दिशा निर्देश पर 25 मार्च को मेगा पीटीएम बुलाई गई। इस मेगा पीटीएम में गांव के सरपंच पुत्र के साथ ही जो बच्चे फेल हुए हैं, केवल उनके माता-पिता ही मौजूद थे। मेगा पीटीएम के दौरान गांव वालों के साथ बैठकर ही परिणाम तैयार करने का आरोप है।

करीब 3 घंटे तक चली बहस और दबाव के बाद जो छात्र फेल थे, उन्हें पास करने की मांग उठी।‌ बताया जा रहा है कि मेगा पीटीएम में केवल सरपंच पुत्र के साथ ही गांव के अन्य लोग, जिनके बच्चे फेल हुए, वो स्कूल पहुंचे। उन्होंने शिक्षक पर अपने बेटों को पास करवाने का दबाव बनाया।‌ इस पंचायत में वरिष्ठ व्याख्याता और सह प्रभारी सुगन लता शर्मा ने कहा भी कि “परिणाम गोपनीय होता है… इस तरह गांव वालों के साथ बैठकर बनाना गलत है.” लेकिन संस्था प्रभारी कुंवर सिंह यादव ने अनसुना कर दिया। इधर स्टाफ का कहना है कि, स्कूल में जुटी पंचायत में केवल कुछ खास बच्चों को पास करवाने के लिए दबाव बनाया गया लेकिन जब विरोध हुआ, तो अंत में सभी फेल छात्रों को ही पास कर दिया गया।

आखिर ऐसा

सबसे बड़ा सवाल यह है कि परिणाम लॉक होने से पहले ही गांव में फेल छात्रों की जानकारी कैसे पहुंच गई? आरोप है कि परीक्षा परिणाम पहले ही लीक कर दिया गया और अब फेल छात्रों की ग्रीन शीट भी वायरल हो रही है। हालांकि हम इस वायरस सेट की पुष्टि नहीं करते हैं। स्कूल में फेल 11 छात्रों को पास किया गया। छात्रों की फेल की मार्कशीट भी वायरल हो रही है इसकी भी हम पुष्टि नहीं करते।शाला दर्पण में छात्रों को पास कर दिया गया।

इनकी जुबानी

मेरे संज्ञान में यह मामला आया है तो मैं इस संबंध में मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी निवाई को जांच के लिए भेज दिया है जांच रिपोर्ट में जो भी दोषी आएगा उसके खिलाफ युवक के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

डॉ. महावीर प्रसाद शर्मा संयुक्त निदेशक स्कूल शिक्षा संभाग अजमेर

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