राजस्थान में निजी अस्पतालों में क्या RGHS सेवाएं होगी बंद ?

बकाया भुगतान को लेकर निजी अस्पताल संचालकों मेडिकल स्टोर्स और सरकार के बीच टकराव ,IMA सहित संगठनों ने दी चेतावनी
राजस्थान में निजी अस्पतालों में क्या RGHS सेवाएं होगी बंद ?
जयपुर /डॉ. चेतन ठठेरा स्वतंत्र पत्रकार । राजस्थान में सरकार द्वारा सरकारी कर्मचारियों के लिए शुरू की गई राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम अर्थात आरजीएचएस (RGHS) के बकाया भुगतान को लेकर निजी अस्पतालों और सरकार के बीच टकराव के हालात पैदा हो गए हैं।। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन(IMA आईएमए ) सहित निजी मेडिकल और निजी अस्पताल संचालकों ने पूर्ण भुगतान नहीं होने पर 15 में से आरजीएच एस सेवाएं बंद करने की चेतावनी दी है।।
राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम अर्थात आरजीएचएस योजना में बकाया भुगतान को लेकर निजी अस्पताल संचालक को और मेडिकल स्टोर्स संचालकों में आक्रोश बढ़ गया है। निजी अस्पताल संचालकों ने 30 अप्रैल तक 50% भुगतान नहीं होने पर ओपीडी सेवाएं बंद करने और 15 मई से योजना का पूर्ण बहिष्कार करने की चेतावनी दी गई है।
राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) के तहत बकाया भुगतान को लेकर राज्य के निजी अस्पतालों और सरकार के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) सहित विभिन्न अस्पताल संगठनों ने चरणबद्ध आंदोलन का एलान करते हुए साफ कर दिया है कि यदि 30 अप्रैल तक बकाया राशि का 50 प्रतिशत भुगतान नहीं किया गया, तो प्रदेशभर में ओपीडी फार्मेसी सेवाएं बंद कर दी जाएंगी। इसके बाद भी समाधान नहीं होने पर 15 मई 2026 से RGHS सेवाओं का पूर्ण बहिष्कार किया जाएगा।

कितना करोड़ है बकाया

IMA राजस्थान के जोनल सेक्रेटरी डॉ. अनुराग शर्मा के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में लगभग 1800 करोड़ रुपये का भुगतान पिछले जुलाई 2025 से लंबित है। सरकार ने 45 दिनों में भुगतान का आश्वासन दिया था, लेकिन सात महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद भुगतान नहीं हुआ है। इस देरी के चलते छोटे और मध्यम अस्पताल आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं और कर्मचारियों को वेतन देना भी मुश्किल हो गया है।

निजी अस्पताल संगठनों का आरोप

अस्पताल संगठनों ने आरोप लगाया है कि थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर (TPA) द्वारा मामूली और आधारहीन आपत्तियों के नाम पर भुगतान रोका जा रहा है। उनका कहना है कि केवल 1 प्रतिशत संभावित गड़बड़ियों के आधार पर 99 प्रतिशत ईमानदार सेवा प्रदाताओं को परेशान किया जा रहा है। साथ ही, मुख्यमंत्री स्तर तक योजना की वास्तविक स्थिति की बजाय भ्रामक जानकारी पहुंचने का भी आरोप लगाया गया है।

सप्लायर्स ने अस्पतालों को दवाइयां और उपकरण देना कर दिया बंद

भुगतान अटकने का असर अब चिकित्सा सेवाओं पर भी दिखने लगा है। सप्लायर्स ने अस्पतालों को दवाइयों और इम्प्लांट की आपूर्ति सीमित या बंद कर दी है। MSME अधिनियम के तहत देरी से भुगतान होने के कारण अस्पतालों को कानूनी नोटिस भी मिल रहे हैं, जिससे उनकी साख पर भी असर पड़ रहा है।

इनकी जुबानी

दूसरी ओर चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि RGHS को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया गया है। पिछले दो वर्षों में 7200 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है। उन्होंने बताया कि 2021-22 में 364 करोड़ रुपये के मुकाबले 2024-25 में भुगतान बढ़कर 3471 करोड़ रुपये हो गया है और 2025-26 में भी लगभग 3000 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।

कौन सही कौन गलत

एक और निजी अस्पताल संचालक और निजी मेडिकल स्टोर्स इस योजना के तहत 1800 करोड रुपए का भुगतान बकाया होने का दावा कर रहे हैं और यह विटन पिछले 7 महीना से अटका होने का भी दावा किया जा रहा है तो दूसरी ओर प्रदेश के चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर पिछले दो सालों के दौरान 7200 करोड रुपए का भुगतान इस योजना के तहत होने का दावा कर रहे हैं। अब इन दोनों ही दावों में कौन सही है कौन गलत यह तो कहना मुश्किल है लेकिन सरकार और निजी अस्पताल संचालकों व मेडिकल स्टोर के साथ टकराव का खामियाजा आम जनता रोगी और पेंशनर्स भुगतेंगे।‌ ऐसी हालत में इनको होने वाली परेशानी और समस्या का जवाब कौन देगा ? क्या सरकार का यही कर्तव्य है या फिर …
जयपुर। राजस्थान में सरकार द्वारा सरकारी कर्मचारियों के लिए शुरू की गई राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम अर्थात आरजीएचएस (RGHS) के बकाया भुगतान को लेकर निजी अस्पतालों और सरकार के बीच टकराव के हालात पैदा हो गए हैं।। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन(IMA आईएमए ) सहित निजी मेडिकल और निजी अस्पताल संचालकों ने पूर्ण भुगतान नहीं होने पर 15 में से आरजीएच एस सेवाएं बंद करने की चेतावनी दी है।।
राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम अर्थात आरजीएचएस योजना में बकाया भुगतान को लेकर निजी अस्पताल संचालक को और मेडिकल स्टोर्स संचालकों में आक्रोश बढ़ गया है। निजी अस्पताल संचालकों ने 30 अप्रैल तक 50% भुगतान नहीं होने पर ओपीडी सेवाएं बंद करने और 15 मई से योजना का पूर्ण बहिष्कार करने की चेतावनी दी गई है।
राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) के तहत बकाया भुगतान को लेकर राज्य के निजी अस्पतालों और सरकार के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) सहित विभिन्न अस्पताल संगठनों ने चरणबद्ध आंदोलन का एलान करते हुए साफ कर दिया है कि यदि 30 अप्रैल तक बकाया राशि का 50 प्रतिशत भुगतान नहीं किया गया, तो प्रदेशभर में ओपीडी फार्मेसी सेवाएं बंद कर दी जाएंगी। इसके बाद भी समाधान नहीं होने पर 15 मई 2026 से RGHS सेवाओं का पूर्ण बहिष्कार किया जाएगा।

कितना करोड़ है बकाया

IMA राजस्थान के जोनल सेक्रेटरी डॉ. अनुराग शर्मा के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में लगभग 1800 करोड़ रुपये का भुगतान पिछले जुलाई 2025 से लंबित है। सरकार ने 45 दिनों में भुगतान का आश्वासन दिया था, लेकिन सात महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद भुगतान नहीं हुआ है। इस देरी के चलते छोटे और मध्यम अस्पताल आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं और कर्मचारियों को वेतन देना भी मुश्किल हो गया है।

निजी अस्पताल संगठनों का आरोप

अस्पताल संगठनों ने आरोप लगाया है कि थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर (TPA) द्वारा मामूली और आधारहीन आपत्तियों के नाम पर भुगतान रोका जा रहा है। उनका कहना है कि केवल 1 प्रतिशत संभावित गड़बड़ियों के आधार पर 99 प्रतिशत ईमानदार सेवा प्रदाताओं को परेशान किया जा रहा है। साथ ही, मुख्यमंत्री स्तर तक योजना की वास्तविक स्थिति की बजाय भ्रामक जानकारी पहुंचने का भी आरोप लगाया गया है।

सप्लायर्स ने अस्पतालों को दवाइयां और उपकरण देना कर दिया बंद

भुगतान अटकने का असर अब चिकित्सा सेवाओं पर भी दिखने लगा है। सप्लायर्स ने अस्पतालों को दवाइयों और इम्प्लांट की आपूर्ति सीमित या बंद कर दी है। MSME अधिनियम के तहत देरी से भुगतान होने के कारण अस्पतालों को कानूनी नोटिस भी मिल रहे हैं, जिससे उनकी साख पर भी असर पड़ रहा है।

इनकी जुबानी

दूसरी ओर चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि RGHS को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया गया है। पिछले दो वर्षों में 7200 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है। उन्होंने बताया कि 2021-22 में 364 करोड़ रुपये के मुकाबले 2024-25 में भुगतान बढ़कर 3471 करोड़ रुपये हो गया है और 2025-26 में भी लगभग 3000 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।

कौन सही कौन गलत

एक और निजी अस्पताल संचालक और निजी मेडिकल स्टोर्स इस योजना के तहत 1800 करोड रुपए का भुगतान बकाया होने का दावा कर रहे हैं और यह विटन पिछले 7 महीना से अटका होने का भी दावा किया जा रहा है तो दूसरी ओर प्रदेश के चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर पिछले दो सालों के दौरान 7200 करोड रुपए का भुगतान इस योजना के तहत होने का दावा कर रहे हैं। अब इन दोनों ही दावों में कौन सही है कौन गलत यह तो कहना मुश्किल है लेकिन सरकार और निजी अस्पताल संचालकों व मेडिकल स्टोर के साथ टकराव का खामियाजा आम जनता रोगी और पेंशनर्स भुगतेंगे।‌ ऐसी हालत में इनको होने वाली परेशानी और समस्या का जवाब कौन देगा ? क्या सरकार का यही कर्तव्य है या फिर …
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