निरंकारी मिशन हमें प्रेम, सौहार्द एवं मिलवर्तन कि भावना से जीना सिखाता है : नजीर अहमद

स विशाल सत्संग में टोंक, निवाई, मालपुरा, देवली के अनेकों श्रद्धालु उपस्थित हुए। सत्संग के दौरान अनेक वक्ताओं, कवियों एवं गीतकारों ने गुरु महिमा, भक्ति भाव एवं मानव कल्याण के संदेशों को अत्यंत भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया।
निरंकारी मिशन हमें प्रेम, सौहार्द एवं मिलवर्तन कि भावना से जीना सिखाता है : नजीर अहमद
बृज विहार कॉलोनी स्थित सन्त निरंकारी सत्संग भवन पर आध्यात्मिक सत्संग का आयोजन

टोंक। बृज विहार कॉलोनी स्थित सन्त निरंकारी सत्संग भवन पर आध्यात्मिक सत्संग का आयोजन भक्ति पर्व के रूप में किया गया। बूंदी से आये प्रचारक संत नजीर अहमद ने कहा कि निरंकारी मिशन हमें प्रेम, सौहार्द एवं मिलवर्तन कि भावना से जीना सिखाता है। उन्होंने कहा कि निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज की सिखलाई है कि भक्ति केवल शब्द नहीं जीवन जीने की सजग यात्रा है। आध्यात्मिक आनंद एवं आत्मिक शांति की अनुभूति तभी संभव है जब हम अपने मन, वचन, कर्म से मानव कल्याण के लिये समर्पित होते है। इस विशाल सत्संग में टोंक, निवाई, मालपुरा, देवली के अनेकों श्रद्धालु उपस्थित हुए।

सत्संग के दौरान अनेक वक्ताओं, कवियों एवं गीतकारों ने गुरु महिमा, भक्ति भाव एवं मानव कल्याण के संदेशों को अत्यंत भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया। संतों की प्रेरणादायक शिक्षाओं ने उपस्थित श्रद्धालुओं के हृदय को छूते हुए उनके जीवन को आध्यात्मिक दृष्टि से समृद्ध किया। निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज ने हरियाणा स्थित संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल, समालखा में आयोजित भक्ति पर्व समागम के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भक्ति कोई नाम या दिखावा नहींए बल्कि अपने भीतर की सजग यात्रा है।

सच्ची भक्ति तब है जब हम आत्म मंथन द्वारा दूसरों से पहले स्वयं को जाँचें, अपनी कमियों को सुधारें और हर पल जागरूक जीवन जिएँ। अज्ञान में हुई गलती सुधर सकती है, पर जानबूझकर चोट पहुँचाना, बहाने या चालाक शब्द भक्ति नहीं हैं, क्योंकि भक्त का स्वभाव मरहम का होता है। हर एक में निराकार देखकर सरल, निष्कपट व्यवहार करना एवं ब्रह्मज्ञान के बाद सेवा, सुमिरन व सत्संग से इस एहसास को बनाए रखना ही भक्ति है।

इसी समागम में निरंकारी राजपिता ने भक्ति पर्व के अवसर पर यह समझाया कि भक्ति कोई पद, पहचान या अपनी बनाई परिभाषा नहीं, बल्कि ब्रह्मज्ञान पाकर कर्ता.भाव के समाप्त होने से उपजा जीवन जीने का ढंग है। सत्य एवं भक्ति की परिभाषा एक ही है, यदि भक्ति को उपलब्धियों या अहंकार से जोड़ा जाए तो करता-भाव जीवित रहता है।

भक्ति कोई सौदा नहीं, प्रेम का चुनाव है, जहाँ प्रयास रहते हैं पर दावा नहीं इसलिए अरदास यही है कि अपनी सारी परिभाषाएँ छोड$कर ऐसा जीवन जिएँ जहाँ वचन, सेवा, सुमिरन एवं संगत स्वभाव बन जाएँ क्योंकि भक्ति अपनी परिभाषा से हो, तो भक्ति नहीं। सतगुरु माता ने माता सविंदर एवं राजमाता जी के जीवन को भक्ति, समर्पण व नि:स्वार्थ सेवा का सजीव प्रतीक बताते हुए कहा कि इन मातृशक्तियों का संपूर्ण जीवन निरंकारी मिशन के लिए एक श्रेष्ठ उदाहरण है, जो प्रत्येक श्रद्धालु को सेवा एवं समर्पण की प्रेरणा प्रदान करता है। निरंकारी मिशन का मूल सिद्धांत यही है कि भक्ति, परमात्मा के तत्व को जानकर ही अपने वास्तविक एवं सार्थक स्वरूप को प्राप्त करती है।

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