सर्दी और कोहरे के मद्देनजर निजी प्राथमिक विद्यालयों में प्रात: कालीन समय को लेकर दिखाई गंभीरता

स्थायी लोक अदालत ने मुख्य सचिव और माध्यमिक शिक्षा निदेशक बीकानेर को जारी किया पत्र
सर्दी और कोहरे के मद्देनजर निजी प्राथमिक विद्यालयों में प्रात: कालीन समय को लेकर दिखाई गंभीरता
कोहरे

टोंक। अत्यधिक सर्दी, घने कोहरे, अल्प दृश्यता तथा नौनिहाल विद्यार्थियों की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य से जुड़े गंभीर विषय पर प्रस्तुत परिवाद पर स्थायी लोक अदालत, टोंक द्वारा पारित महत्वपूर्ण आदेश की प्रति जिला विधिक सेवा प्राधिकरण टोंक सचिव दिनेश कुमार जलुथरिया ने मुख्य सचिव एवं निदेशक माध्यमिक शिक्षा, बीकानेर को शनिवार को प्रेषित की है। जिला सेशन न्यायाधीश एवं स्थायी लोक अदालत अध्यक्ष अय्यूब खान द्वारा 24 दिसम्बर 2025 को पारित आदेश में शीतकालीन सत्र में प्रात:काल तापमान अत्यंत कम होने,, प्रात: समय ओस एवं घना कोहरा छाए होने से दृश्यता बहुत कम होने से छोटे बच्चों को अत्यधिक ठंड एवं अंधेरे में विद्यालय जाने के लिए विवश होना पड़ता है।

स्थायी लोक अदालत बैंच के समक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण टोंक सचिव दिनेश कुमार जलुथरिया ने यह तथ्य ध्यान में लाया कि टोंक जिले में अनेक सरकारी एवं निजी प्राथमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों को प्रात: 8.00 बजे तक विद्यालय पहुंचाने के लिए परिवहन साधनों द्वारा लगभग 6.30 बजे से घरों से ले जाया जाता है। इस स्थिति में सडक़ दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है तथा नौनिहाल विद्यार्थियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

स्थायी लोक अदालत अध्यक्ष अय्यूब खान ने बच्चों के सर्वोत्तम हित, उनकी सुरक्षा एवं स्वास्थ्य को सर्वोपरि मानते हुए यह आदेश परित किया कि शीतकालीन अवधि के दौरान टोंक जिले के समस्त सरकारी एवं निजी प्राथमिक विद्यालयों का समय प्रात: 10.00 बजे से संचालित किया जाना आवश्यक, उचित एवं न्यायसंगत है। स्थायी लोक अदालत ने यह भी माना कि अत्यंत प्रात: समय विद्यालय वाहनों, बसों, ऑटो अथवा अन्य परिवहन साधनों द्वारा विद्यार्थियों का आवागमन जोखिमपूर्ण है।

विदित हो कि अपर जिला न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव दिनेश कुमार जलुथरिया ने विद्यालयों के शीतकालीन सत्र में निजी विद्यालयों द्वारा विद्यालय समय एवं बच्चों की परिवहन व्यवस्था के संबंध में स्वप्रेरित संज्ञान लिया गया था एवं स्थाई लोक अदालत टोंक के समक्ष लीगल एड डिफेंस काउन्सिल, टोंक द्वारा परिवाद दायर करवाया था। यह प्रकरण जनोपयोगी सेवाओं, विशेष रूप से शिक्षा एवं परिवहन सेवाओं से संबंधित होने के कारण सार्वजनिक महत्व का विषय है। स्थायी लोक अदालत द्वारा संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि वे बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आवश्यक एवं प्रभावी कार्रवाई करें।

इसके अतिरिक्त जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव दिनेश कुमार जलुथरिया ने राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के विशेष कैम्पेन ‘न्याय आपके द्वार’ के सम्बन्ध में जानकारी दी, जिसमें आमजन अपने जनोपयोगी सेवाओं सम्बन्धित परिवादों को स्थाई लोक अदालत में रखवा सकते हैं, जिसमें अधिवक्ता जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से उपलब्ध करवाया जाएगा।

जनोपयोगी सेवाओं में सडक़/ रेल द्वारा यात्रियों या माल के परिवहन के लिए परिवहन सेवा, डाक या टेलीफोन सेवा, बिजली या पानी की आपूर्ति, लोक स्वच्छता या स्वास्थ्य रक्षा की प्रणाली संबंधी, अस्पताल या डिसपेंसरी में स्वास्थ्य संबंधी सेवाएं, बीमा सेवा, बैंक तथा वित्तीय संस्था सेवाएं, एलपीजी सेवा, शैक्षिक अथवा शैक्षणिक संस्थानों तथा आवासीय एवं भू-सम्पदा सेवाएं सम्मिलित हैं।

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