ईरान के हमले में राजस्थान के युवक की मौत

नागौर जिले के खीवताना गांव में रहने वाले कान सिंह के पुत्र दिलीप सिंह ने 22 जनवरी 2026 को ही मर्चेंट नेवी में ड्यूटी संभाल ली थी और वह तेल केमिकल टैंकर में क्रू मेंबर था। ‌ जानकारी के अनुसार 1 मार्च को सेवर ओमान के एक पोर्ट पर ईरान की मिसाइल उनके जहाज पर गिरी थी
ईरान के हमले में राजस्थान के युवक की मौत

जयपुर /डॉ. चेतन ठठेरा स्वतंत्र पत्रकार । पिछले 5 दिनों से अमेरिका और इजरायल द्वारा संयुक्त रूप से ईरान के साथ युद्ध के हालात को लेकर देश भर में चिंतन मंथन चल रहा है और इस युद्ध के दौरान ईरान द्वारा ओमान के एक पोर्ट पर मिसाइल से किए गए हमले में राजस्थान के एक युवक की मौत हो गई। इस युद्ध में यह किसी भारतीय की पहली मौत है हालांकि अभी राजस्थान के इस मृतक युवक की लाश नहीं मिली है जिसकी तलाश की जा रही है लेकिन मौत की पुष्टि हो गई है।

 

जानकारी के अनुसार नागौर जिले के खीवताना गांव में रहने वाले कान सिंह के पुत्र दिलीप सिंह ने 22 जनवरी 2026 को ही मर्चेंट नेवी में ड्यूटी संभाल ली थी और वह तेल केमिकल टैंकर में क्रू मेंबर था। ‌ जानकारी के अनुसार 1 मार्च को सेवर ओमान के एक पोर्ट पर ईरान की मिसाइल उनके जहाज पर गिरी थी इस घटना में उनका जहाज पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था। दिलीप सिंह जहाज के अगले हिस्से में पायलट आशीष कुमार के साथ थे।

पायलट आशीष कुमार बिहार के रहने वाले थे जिनका भी इस हादसे में निधन हो गया था और उनकी लाश मिल गई है। लेकिन दिलीप की बॉडी अभी नहीं मिली है। हमले के समय जहाज खासब पोर्ट पर खड़ा था। इस घटना की पुष्टि कंपनी द्वारा की गई है। कंपनी के अनुसार हमले के दौरान अधिकांश क्रू मेंबर्स को सुरक्षित निकाल लिया गया था ।

लेकिन कप्तान आशीष सहित दो अन्य लोग लापता हो गए थे। हमले के तीन दिन बाद बुधवार सवेरे कंपनी ने दो लोगों की मौत की पुष्टि की इनमें नागौर जिले के खीवताना के रहने वाले दिलीप सिंह भी शामिल है। यह जहाज स्काईलाइट कंपनी का था।

जहाज कंपनी और सुरक्षा एजेंसियां 3 दिन से लगातार उनकी लाश को ढूंढ रही है। दिलीप सिंह के भाई देवेंद्र सिंह के अनुसार 28 फरवरी को आखिरी बार दिलीप की परिवार के सदस्यों के साथ बातचीत हुई थी। दिलीप के साथ नागौर जिले के ही बामणा गांव के रहने वाले सुनील कुमार भी इसी जहाज पर काम करते थे और दिलीप सिंह सुनील की ड्यूटी खत्म होने के बाद ही उनकी जगह ही जहाज में ड्यूटी पर पहुंचे थे। बताया जाता है कि दिलीप सिंह अविवाहित हैं और चार भाई बहनों में वह सबसे बड़े थे तथा उनके पिता कान सिंह की 20 साल पहले बीमारी के कारण आंखों की रोशनी चली गई थी।

इस घटना की खबर गांव में मिलने के बाद पूरे गांव में शोक की लहर छा गई है और ग्रामीण उनके घर पहुंच रहे हैं।‌ हालांकि खबर लिखे जाने तक राजस्थान सरकार एवं स्थानीय जिला प्रशासन की ओर से उनके आवास पर ढांढस बनाने के लिए कोई नहीं पहुंचा था।

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