टोंक जिला कलेक्टर कल्पना अग्रवाल ने मधुमक्खी पालन व्यवसाय से जिले के लोगों को जोडऩे की संभावनाओं को तलाशा

प्रगतिशील युवा किसान भरत राम चौधरी द्वारा सरसों के खेत के पास स्थापित मधुमक्खी पालन यूनिट का लगभग एक घंटे तक अवलोकन किया। प्रगतिशील किसान चौधरी ने बताया कि उन्होंने 2021 में स्वरोजगार के रूप में मधुमक्खी पालन की शुरुआत की थी।
टोंक जिला कलेक्टर कल्पना अग्रवाल ने मधुमक्खी पालन व्यवसाय से जिले के लोगों को जोडऩे की संभावनाओं को तलाशा
कलेक्टर कल्पना अग्रवाल ने मधुमक्खी पालन व्यवसाय से जिले के लोगों को जोडऩे की संभावनाओं को लेकर चूली के पास स्थापित मधुमक्खी पालन यूनिट का अवलोकन किया

टोंक। जिला कलेक्टर कल्पना अग्रवाल ने मधुमक्खी पालन व्यवसाय से जिले के लोगों को जोडऩे की संभावनाओं को लेकर शुक्रवार शाम ग्राम पंचायत चूली के पास स्थापित मधुमक्खी पालन यूनिट का अवलोकन किया। इस दौरान कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक वीरेंद्र सिंह सोलंकी एवं आत्मा परियोजना के उपनिदेशक दिनेश बैरवा भी मौजूद रहे।

जिला कलेक्टर ने टोंक जिले के नया गांव निवासी प्रगतिशील युवा किसान भरत राम चौधरी द्वारा सरसों के खेत के पास स्थापित मधुमक्खी पालन यूनिट का लगभग एक घंटे तक अवलोकन किया। प्रगतिशील किसान चौधरी ने बताया कि उन्होंने 2021 में स्वरोजगार के रूप में मधुमक्खी पालन की शुरुआत की थी।

उन्होंने किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के माध्यम से अरावली समृद्धि किसान प्रोड्यूसर्स ऑर्गेनाइजेशन स्थापित किया है, इसके माध्यम से वह जिले के ज्यादा से ज्यादा किसानों को मधुमक्खी पालन व्यवसाय से जोडऩा चाहते है, ताकि वे इस व्यवसाय की असीम संभावनाओं का लाभ उठा सके।

मधुमक्खी पालन

उन्होंने बताया कि इस व्यवसाय से वर्ष भर आय का स्रोत बना रहता है, वह स्वयं वर्तमान में 5 प्रकार के फ्लेवर शहद के का निर्माण कार्य से जुड़े हुए हैं और इच्छुक युवाओं को ट्रेनिंग भी दे रहे हैं। कृषि विभाग के आत्मा परियोजना के उपनिदेशक दिनेश बैरवा बताया कि टोंक जिले में 3 लाख हैक्टयर क्षेत्र में सरसों की खेती होती है जो मधुमक्खी पालन व्यवसाय के अनुकूल है। उन्होंने बताया कि हर वर्ष पंजाब व हरियाणा राज्य से किसान यहां आकर मधुमक्खी पालन व्यवसाय से जुड़े हुए है। साथ ही शहद निकालने के बाद बचे हुए रॉ मटेरियल से भी मॉम व रॉयल जैली निर्माण किया जाता है,जो अतिरिक्त आय को बढ़ाता है।

क्या होता है एफपीओ

किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) छोटे किसानों का एक समूह होता है जो सामूहिक रूप से अपनी उपज बेचने, लागत कम करने और बेहतर बाजार पहुंच पाने के लिए मिलकर काम करते हैं जिससे उनकी आय में वृद्धि होती है और आत्मनिर्भरता बढ़ती है।

कृषि व उद्यान की विभाग देता है अनुदान

कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने बताया है कि केंद्र व राज्य सरकार राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन और शहद मिशन तथा अन्य योजनाओं के माध्यम से 40 से 75 प्रतिशत अनुदान देकर प्रगतिशील किसानों को इस कार्य से जोडऩे के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इसके साथ ही जिले के देवडावास में मधुमक्खी पालन उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए जाने का कार्य भी प्रगति पर है।

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