निकाह, हलाला महिला से गैंगरेप और यौन शोषण- हाईकोर्ट

9 आरोपी को कोर्ट से झटका याचिका खारिज
निकाह, हलाला महिला से गैंगरेप और यौन शोषण- हाईकोर्ट

जयपुर / डॉ. चेतन ठठेरा। निकाह हलाला के नाम पर महिला का यौन शोषण और गैंगरेप की श्रेणी में आता है।‌ इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायाधीश जे जे मुनीर और न्यायाधीश तरुण सक्सेना की डिवीजन बेंच में अमरोहा के निकाह,हलाला और ट्रिपल तलाक से जुड़े एक मामले में सुनवाई करते हुए यह महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कड़ा रुख अपनाया और स्पष्ट कहा की देश का अपराधी कानून किसी भी व्यक्तिगत कानून या धार्मिक प्रथा के अधीन नहीं हो सकता यदि किसी मामले में गंभीर अपराधी के आरोप सामने आते हैं तो केवल पर्सनल लॉ का हवाला देखकर एफआईआर (FIR) को रद्द नहीं किया जा सकता है।

9 आरोपियों को कोर्ट ने नहीं दी राहत

कोर्ट ने कहा कि सभी परिस्थितियों को देखते हुए यह मामला हमारे समाज के एक ऐसे हिस्से की तस्वीर पेश करता है जो संवैधानिक मूल्यों और समानता, निजता, व्यक्तिगत गरिमा और संविधान के अनुच्छेद 21 और 14 के उद्देश्यों से बहुत दूर है। इसी के साथ कोर्ट ने इस मामले में शामिल सभी नौ आरोपियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया।

यह है पूरा मामला

यह मामला उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के थाना सैदनगली का है। पीड़िता (अभियोजिका) का निकाह 25 अप्रेल 2015 को अजहर नवाज के साथ जबरन कराया गया था, तब उसकी उम्र महज 15 वर्ष थी। जनवरी 2016 में पति ने उसे ‘तीन तलाक’ दे दिया। इसके बाद दोबारा शादी करने के बहाने नवम्बर 2016 में पीड़िता को मौलाना की सलाह का झांसा देकर जबरन ‘निकाह हलाला’ की प्रक्रिया से गुजरने पर मजबूर किया गया। मौलाना कय्यूम ने उसके साथ जबरन शारीरिक सम्बंध बनाए, जिसके बाद 2017 में उसका अजहर से दोबारा निकाह हुआ।‌ मगर विवाद यहीं नहीं थमा। साल 2021 में अजहर ने उसे दूसरी बार तीन तलाक दे दिया और दूसरी महिला से शादी कर ली‌ बाद में जब उसकी दूसरी पत्नी से कोई संतान नहीं हुई तो उसने बेटी का हवाला देकर पीड़िता को तीसरी बार साथ रहने का झांसा दिया

हलाला के नाम पर महिला से गैंगरेप

इस बार अज़हर के दो भाइयों ने पीड़िता को डराया कि चूंकि तलाक दो बार हुआ है, इसलिए ‘दोबारा हलाला’ करना होगा। 19 फरवरी 2025 को दोनों भाइयों ने हलाला के नाम पर पीड़िता के साथ सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) किया

इन धाराओं में हुआ मामला दर्ज

इस मामले में बीएनएस की धारा 85, 115(2), 64, 351(2), 61(2)(a), 70(2), मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 की धारा 3/4 और पॉक्सो एक्ट की धारा 5(l)/6 और 17/18 में सैदनगली थाने में एफआईआर दर्ज हुई।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नोट किया कि पहली हलाला प्रक्रिया के दौरान पीड़िता नाबालिग थी, जो प्रथम दृष्टया ‘वैधानिक बलात्कार’ (Statutory Rape) का मामला बनता है। इसके बाद 2021 में उसे फिर से तलाक दिया गया। जब दोबारा सुलह की बात आई तो आरोपियों ने काफी डराया-धमकाया और महिला से कहा कि उसे दो बार तलाक मिला है, इसलिए उसे दो बार हलाला करना होगा‌‌। आरोप है कि फरवरी 2025 में हलाला की आड़ में जान से मारने की धमकी देकर उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया और बाद में दोबारा साथ रहने के लिए एक फर्जी निकाह का नाटक रचा गया।

आरोपियों ने दी यह दलील

सुनवाई के दौरान आरोपियों ने दलील दी कि यह पूरा मामला मुस्लिम पर्सनल लॉ और उनकी धार्मिक प्रथाओं से जुड़ा है, इसलिए एफआईआर रद्द की जानी चाहिए। हाईकोर्ट ने इस दलील को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि इस मामले में सामने आए तथ्य विवेक को झकझोर देने वाले हैं। यह स्थिति हमारे समाज के उस हिस्से को दर्शाती है जो संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता) और अनुच्छेद 21 (व्यक्तिगत गरिमा व गोपनीयता) के मूल्यों से कोसों दूर है।

कोर्ट ने लगाई फटकार

कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि जब आपराधिक कानून की बात आती है तो जब तक कानून में खुद कोई अपवाद न हो तब तक विवाह आदि को नियंत्रित करने वाले व्यक्तिगत कानूनों की आड़ लेने की कोई जगह नहीं है। इसके साथ ही कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की के साथ यौन सम्बंध को पर्सनल लॉ का हवाला देकर संरक्षित नहीं किया जा सकता। ऐसे मामलों में पॉक्सो एक्ट पूरी तरह लागू होगा। कोर्ट ने साफ किया कि एफआईआर रद्द करने के चरण में अदालत सबूतों की गहराई से जांच नहीं करती‌। चूंकि शिकायत में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पॉक्सो एक्ट के तहत संज्ञेय अपराध के गम्भीर आरोप बनते हैं, इसलिए पुलिस जांच को शुरुआत में ही रोका नहीं जा सकता।

याचिकाएं खारिज, पूर्व में दिए गए अंतिम राहत आदेश वापस लिए

हाईकोर्ट ने सभी आरोपियों को कोई भी राहत देने से इनकार करते हुए तय्यब और अन्य की याचिकाएं खारिज कर दीं और पूर्व में दिए गए सभी अंतरिम आदेशों को भी तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया। हाईकोर्ट द्वारा याचिकाएं खारिज किए जाने और पूर्व में दिए गए अंतरिम आदेशों को हटाने के बाद अब पुलिस के लिए मामले की गहन जांच का रास्ता साफ हो गया है‌।

विज्ञापन