शिव व शक्ति का हरियाली अमावस पर चतुर्थ ग्रही योग

नारी प्रकृति एवं नर पुरुष दोनो एक-दुसरे के पूरक है अर्धनारीश्वर शिव इसी पारस्परिकता के प्रतीक है
शिव व शक्ति का हरियाली अमावस पर चतुर्थ ग्रही योग

जयपुर / डॉ. चेतन ठठेरा। सृष्टि के आधार ओर रचियता स्त्री पुरुष शिव एवं शक्ति के ही स्वरुप है, इनके मिलन एवं सृजन से यह संसार जीव प्राणी संचालित तथा संतुलित हे, नारी प्रकृति एवं नर पुरुष दोनो एक-दुसरे के पूरक है अर्धनारीश्वर शिव इसी पारस्परिकता के प्रतीक है जिनका मधुर मिलन चन्द्र स्त्री सूर्य पुरुष का कर्क राशि मे श्रावण कृष्ण अमावस्या को होता है।

भगवान शिव की पुजा लिंग के रुप मे की जाती है। संस्कृत मे लिंग का अर्थ है चिन्ह, शिव यानी परमपुरुष का प्रकृति स्त्री के साथ सम्मानित चिन्ह, अत: शक्ति के अभाव में शिव, शिव न हो कर शव रह जाता है ।

अत: श्रावण मास कृष्ण पक्ष हरियाली अमावस्या को शिव व शक्ति की पुजा का उत्तम योग इस वर्ष 12 अगस्त बुधवार को पुजा आराधना का ग्रहों अनुसार उत्तम संयोग साथ ही चतुर्थ ग्रही योग बन रहा है ।

मनु ज्योतिष एवं वास्तु शोध संस्थान टोक के निदेशक बाबूलाल शास्त्री ने यह जानकारी देते हुए बताया कि 12 अगस्त बुधवार को सूर्योदय से अर्ध रात्रि 23.06 बजे तक अमावस्या है, जिसमें पितरों एवं देवताओं को भोग लगा कर, पूजन किया जायेगा, सूर्योदय से सुबह 07.59 बजे तक गुरु पुष्यामृत योग, गजकेसरी योग, सुर्याबुद्धायाति योग बन रहे हैं, जिसमें भक्ति आराधना साधना का विशेष सम्बंध होने से सुवृष्टि सुमित कल्याण दायक एव फल दायक है। चतुर्थ ग्रही सयोग मे शिव व शक्ति पितर देव, कुलदेवता, देवताओं की पुजा करने से मन वांछित फलो की प्राप्ति होती है एवं दैविक, दैहिक, भौतिक दुखों से छुटकारा एवं मुक्ति मिलती है,

बाबूलाल शास्त्री ने बताया कि काल गणना अनुसारचंद्र बुध गुरु पुष्य नक्षत्र में सूर्य अश्लेषा नक्षत्र, कर्क राशि मे विचरण कर रहे है, एवं चतुर्थ ग्रही योग बना रहे है, बुध देव अपनी मिथुन एवं कन्या राशि मे स्थित मंगल एवं शुक्र के एवं देवगुरु वृहस्पति अपनी मीन राशि मे स्थित शनि देव के तत्वों को लेकर ग्रहों से सम्बंध बनाकर आध्यात्मिक सम्बन्ध बना रहे है, जिससे शुभाशुभ बल मिल रहा हैं, ग्रहों के प्रभाव से सम्पूर्ण भारत मे मानसून सक्रिय योग बना कर वर्षा योग बना रहा है ।

बाबूलाल शास्त्री ने बताया कि शिव व शक्ति की आराधना हरियाली अमावस को देवी- देवता भी पृथ्वी पर,आकर करते है, अत: शिवलिंग पर जल चढाते हुये बिल्व पत्र केसरयुक्त चंदन पंच मेवा, आकडे,धतूरे के पुष्प, भाग, पंचामृत आदि से अभिषेक कर पुजा करना चाहिये एवं ओउम नम: शिवाय का जाप करना चाहिये।

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