भीलवाड़ा में महापौर क्या पर्ची से बनेगा

महापौर को लेकर बदले समीकरण फंसा पेंचप्रदेश भाजपा नेतृत्व और सरकार की भीलवाड़ा पर नजर दे सकती है एन वक्त पर दखलडॉ. चेतन ठठेरा स्वतंत्र पत्रकार
भीलवाड़ा में महापौर क्या पर्ची से बनेगा

भीलवाड़ा।‌ राजनीति में हर वक्त समीकरण और परिस्थितियां बदलती है इसलिए तो राजनीति में कहते हैं कि कब दोस्त दुश्मन बन जाए और दुश्मन दोस्त बन जाए कहना मुश्किल है इसी तरह की परिस्थितियां भीलवाड़ा नगर निगम में सामान्य महिला के लिए आरक्षित महापौर पद को लेकर चुनाव परिणाम के बाद बनी हुई है। हालांकि चुनाव परिणाम में भाजपा ने स्पष्ट बहुमत से 9 सीटें अधिक जीत ली है लेकिन फिर भी महापौर बनाने को लेकर भाजपा की स्थिति बिगड़ी हुई है इसे यूं कहें तो अतिशयोक्ति नहीं होगी कि पार्टी संकट में है।

आंतरिक गुट बाजी में फंसी भाजपा महापौर को लेकर एकमत नहीं हो पा रही है और सभी गुट अपने-अपने खेमे से महापौर बनाने के लिए हर तरीके से हर संभव जुगाड़ और प्रयास में लगे हुए हैं। वर्तमान स्थिति एवं हालत और राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए महापौर का चयन प्रदेश नेतृत्व से पर्ची के आधार पर हो जाए तो इसमें कोई चौंकाने वाली बात भी नहीं होगी।

भीलवाड़ा भाजपा में आंतरिक गुटबाजी जबरदस्त तरीके से हावी है। यहां तीन गुट मुख्य रूप से काम कर रहे हैं। एक गुट सांसद दामोदर अग्रवाल का है दूसरा गुट पूर्व सांसद सुभाष बहेड़िया एवं पूर्व विधायक विट्ठल शंकर अवस्थी का है और तीसरा गुट निर्दलीय विधायक अशोक कोठारी का है जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबद्ध विचार परिवार की आड़ में हावी है। भाजपा के नेता सार्वजनिक रूप से जरूर कहते हैं कि भीलवाड़ा में कोई गुटबाजी नहीं है और इसी का नतीजा है कि हमने अर्थात भाजपा ने 70 वार्डों में से 45 वार्डो पर शानदार जीत हासिल की है लेकिन वास्तविकता धरातल पर कुछ और है जो सब जग जाहिर है।‌

महापौर को लेकर‌ यह चल‌ गुटबाजी और यह दावेदार रही

महापौर को लेकर सांसद दामोदर अग्रवाल गुट ने सुमन ओझा का नाम आगे कर रखा है और इसके लिए प्रदेश स्तर तक प्रयास जारी हैं। सांसद अग्रवाल खेमे से सुमन ओझा सहित मात्र तीन पार्षद जीते हैं जिसमें दो पुरुष हैं और ओझा मात्र एक महिला है।

पूर्व विधायक विट्ठल शंकर अवस्थी एवं पूर्व सांसद सुभाष बहेड़िया खेमे से पूर्णिमा जैन पत्नी विजय पोखरणा और आभा लढा पत्नी विजय लढा का नाम चर्चाओं में आगे चल रहा है। तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबद्ध विचार परिवार के नाम पर अपनी राजनीति चमकाने वाले निर्दलीय विधायक अशोक कोठारी खेमे से खुशबू वैष्णव पत्नी शंभू वैष्णव और ममता बाहेती पत्नी सुबोध बाहेती का नाम चर्चाओं में है और यह तीनों खेमों के नेता अपने-अपने समर्थकों को महापौर बनाने के लिए हर स्तर पर हर तरीके से प्रयास कर रहे हैं।

पेंच यहां फंस रहा है

राजनीतिक गलियारे और शहर के बुद्धिजीवी वर्ग में इस तरह की चर्चाओं का दौर चल रहा है की सुमन ओझा को महापौर बनने मैं पूर्व महापौर राकेश पाठक के कार्यकाल और निर्दलीय विधायक कोठारी से अदावत आड़े आ रही है। सुमन ओझा और राकेश पाठक रिश्तेदारी में संबंधी है। इसका नुकसान ओझा को हो सकता है ? क्योंकि कोठारी खेमा पाठक से अदावत के चलते सुमन को महापौर नहीं बनना चाहता ? इसके लिए वह आंतरिक स्तर पर प्रयास कर रहे हैं ? निर्दलीय विधायक कोठारी खेमे से जो दावेदारी के लिए नाम चल रहे हैं उनमें खुशबू वैष्णव और ममता बाहेती है। लेकिन इन नामों पर दोनों ही अन्य खेमा सहमत नहीं है। तीसरा खेमा पूर्व विधायक विट्ठल शंकर अवस्थी एवं पूर्व सांसद बहेड़िया ने जिनके 30 से अधिक समर्थक पार्षद चुने गए हैं इस खेमे की ओर से पूर्णिमा जैन और आभा लढा इनमें से किसी एक को महापौर बनाने में अड़े हुए हैं।‌ चूंकि इस खेमे से पार्षदों की संख्या अधिक है तो यह खेमा हावी है और प्रदेश स्तर तक भी इस खेमे ने अपनी बात रख दी है।‌ लेकिन अग्रवाल और कोठारी खेमा इस खेमे से महापौर नहीं बने इसके लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं ऐसी चर्चाओं का बाजार शहर में गर्म है और राजनीतिक गलियारे में सुगबुगाहट है।‌

 

प्रदेश भाजपा ले सकती है पर्ची का सहारा

 

प्रदेश भाजपा संगठन और सरकार की नजर भीलवाड़ा पर टिकी हुई है। राजनीतिक रणनीतिकारों का मानना है कि अगर भीलवाड़ा में इन तीनों खेमे में सहमति नहीं बनती है तो भाजपा संगठन द्वारा विकल्प के तौर पर दो नाम और भीलवाड़ा से ही रिजर्व रखे गए हैं जिनमें एक नाम जिला भाजपा के महामंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता पूर्व पार्षद प्रहलाद त्रिपाठी की पत्नी चंदा त्रिपाठी और भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष एवं जिला अध्यक्ष प्रशांत मेवाड़ा के खेमे से कुलदीप शर्मा की पत्नी रीता जोशी पर विचार किया जा सकता है? लेकिन भीलवाड़ा के स्थानीय तीनों खेमे के नेताओं द्वारा और अन्य तरीके से इन नाम पर भी सहमति नहीं बनती है तो प्रदेश भाजपा संगठन पर्ची का खेल खेलेगा। इस पर्ची के खेल में भी प्रदेश भाजपा संगठन अपने ऊपर किसी तरह की उंगली ना उठे उसको ध्यान में रखते हुए केंद्रीय नेतृत्व के आधार पर पर्ची भेजेगा और इस पर्ची में जो नाम होगा वह चौंकाने वाला होगा। ‌

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