RSS की आड़ में भीलवाड़ा में विचार परिवार का खेल ?

भीलवाड़ा। राजस्थान में वस्त्र नगरी के नाम से प्रसिद्ध भीलवाड़ा जिसे दूसरा मिनी नागपुर भी कहा जाता है यहां पर एक विचार परिवार संगठन राजनीतिक क्षेत्र में खुलकर मैदान में उतरा हुआ है चाहे वह विधानसभा के चुनाव को या हाल ही में संपन्न हुए निकाय चुनाव।
कैसे जन्म हुआ विचार परिवार का
सन 2023 के विधानसभा चुनाव में भीलवाड़ा शहर की विधानसभा क्षेत्र से भाजपा अपने निवर्तमान विधायक विट्ठल शंकर अवस्थी को फिर चौथी बार प्रत्याशी बना रही थी तब भाजपा के कुछ स्थानीय नेताओं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रबुद्ध पदाधिकारियों ने भाजपा के प्रदेश संगठन तक संदेश पहुंचाया कि वह इस बार चुनाव में विट्ठल शंकर अवस्थी को मैदान में नहीं उतरे क्योंकि उनसे संघ और भाजपा के कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों की नाराजगी है उनके बजाए पार्टी किसी और को मैदान में उतरे तो संघ उन्हें सहयोग करेगा और चेतावनी दी कि अगर पार्टी ने उनकी मांग नहीं मानी तो वह तीसरा मोर्चा बनाकर भाजपा के सामने प्रत्याशी मैदान में उतारेंगे। भाजपा के प्रदेश नेतृत्व ने इस मांग को खारिज करते हुए अवस्थी को चुनाव मैदान में उतारा दिया। इससे नाराज भाजपा के कुछ स्थानीय नेताओं ने खुलकर और कुछ ने पर्दे के पीछे रहकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ मिलकर विचार परिवार का नाम देते हुए एक मोर्चा अर्थात वैकल्पिक संगठन बनाते हुए भाजपा प्रत्याशी अवस्थी के सामने वस्त्र व्यापारी एवं जमीनों के कारोबारी अशोक कोठारी को निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतारा और अपनी रणनीति के तहत कार्य करते हुए भाजपा के खिलाफ मतदान कराकर विजय दिलाई।
विचार परिवार के बारे में क्या कहते हैं संघ के पदाधिकारी
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कुछ शीर्ष पदाधिकारियों ने औपचारिक बातचीत में नाम नहीं छापने की शर्त पर यह स्वीकार किया कि देशभर में संघ की ओर से ऐसा कोई भी संगठन या अलग शाखा अर्थात विचार परिवार नाम से कहीं पर भी कार्य नहीं कर रहा है केवल भीलवाड़ा को छोड़कर। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भीलवाड़ा में भी विचार परिवार का जो स्वरूप तैयार किया गया था वह केवल वैकल्पिक था और विधानसभा चुनाव तक के लिए ही सीमित था। उन्होंने यह भी माना की संघ की आड़ में इस वैकल्पिक व्यवस्थार्थ बनाए गए विचार परिवार को राजनीति के क्षेत्र में सीढ़ी बनाकर अपनी महत्वाकांक्षा पूर्ति के लिए उपयोग किया जा रहा है जो संघ की रीति नीति के खिलाफ है।
अब सवाल यह उठता है कि क्या संघ ….
वर्तमान परिपेक्ष में आज शहर में बुद्धिजीवी वर्ग के साथ-साथ सामान्य वर्ग में भी निकाय चुनाव को लेकर घटित घटनाओं के बाद यह संदेश जा रहा है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हठधर्मिता और दबाव की रणनीति अपनाते हुए खेल खेल रहा है। यह संदेश इसीलिए जा रहा है क्योंकि विचार परिवार जिसे विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने वैकल्पिक तौर पर विधानसभा चुनाव तक ही बनाया था और समर्थन दिया था। लेकिन विधानसभा चुनाव समाप्ति के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से इस बनाए गए वैकल्पिक विचार परिवार नामक संगठन को समाप्त करने की किसी तरह से कोई सार्वजनिक सूचना जनहित में जारी नहीं की गई है और यही कारण है कि यह संदेश राजनीतिक गलियारे से लेकर शहर में आमजन में चर्चा का विषय बना हुआ है। इससे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की छवि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है ? ऐसी स्थिति में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेतृत्व को आगे आकर भीलवाड़ा जिसे मिनी नागपुर का जाता है यहां की जनता और यहां के अपने स्वयंसेवकों के बीच यह संदेश देना होगा की विचार परिवार का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से अब कोई लेना-देना या किसी तरह का संबंध नहीं है। अगर संघ नेतृत्व ऐसा करता है तो इस मिनी नागपुर में जो मिथक बना हुआ है या जिसे मिथक बना दिया है वह टूटेगा और इसके दूरगामी परिणाम बहुत अच्छे आएंगे । अन्यथा आने वाले समय में परिस्थितियां और खराब हो सकती है ?
इस आलेख के माध्यम से हमारी भावना और उद्देश्य किसी भी संगठन,व्यक्ति विशेष और पार्टी की छवि को खराब करने का नहीं है। इस आलेख के माध्यम से केवल वास्तविकता को सामने लाने का उद्देश्य है।
