सांसद अग्रवाल, विधायक पितलिया और बैरवा को झटका, निर्दलीय कोठारी पड़े भारी

भीलवाड़ा। नगर निकाय चुनाव में भीलवाड़ा नगर निगम सहित जिले की 10 नगर पालिकाओं की मतगणना के बाद स्थिति एकदम साफ हो गई है और अब निगम और इन पालिकाओं में अपना अपना बोर्ड बनाने एवं महापौर और अध्यक्ष बनाने की कवायद भाजपा और कांग्रेस द्वारा शुरू कर दी गई है।
सत्ता पक्ष जहां एक और जिले की 10 नगर पालिकाओं में से पांच नगर पालिकाओं में विपक्षी दल कांग्रेस के साथ एकदम कांटे की टक्कर में है और यहां वह अपना बोर्ड बनाने के लिए ऑपरेशन लोटस चला सकती है लेकिन वहीं दूसरी ओर विपक्षी दल कांग्रेस भी इन पालिकाओं में निर्दलीयों के साथ गठजोड़कर के अपना बोर्ड बनाने के लिए अथक प्रयासों में जुट चुका है।
भीलवाड़ा नगर निगम मैं कौन बनेगा महापौर
भीलवाड़ा नगर निगम भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिलने के साथ ही महापौर बनाने की कवायद शुरू हो गई है। यहां भाजपा को स्पष्ट बहुमत से भी 10 सीटें अधिक मिली है इसलिए निर्दलीयों पर आश्रित की संभावनाएं हालांकि कम है।
निगम में इस बार महापौर का पद सामान्य वर्ग की महिला का होने से इस दौड़ में अब चुनाव परिणाम के बाद सुमन ओझा,पद्मिनी वैष्णव और पैराशूट प्रत्याशी के रूप में मोना शर्मा अग्रणी है।
राजनीतिक समीकरणों के अनुसार इस दौड़ में भाजपा कोर कार्यकर्ता की बात करें तो सुमन ओझा नंबर एक पर आगे हैं उनकी पृष्ठभूमि देखी जाए तो पुराने कर्मठ भाजपा समर्थक परिवार है। जबकि दूसरे नंबर पर पद्मिनी वैष्णव का नाम आता है यह निर्दलीय विधायक अशोक कोठारी के खेमे से आती हैं। कोठारी के समर्थक शंभू वैष्णव की पत्नी है। शंभू वैष्णव पहले भाजपा में ही कर्मठ कार्यकर्ता रहा है लेकिन विधानसभा चुनाव में उसने भाजपा का दामन छोड़कर निर्दलीय प्रत्याशी अशोक कोठारी का साथ दिया था और इसीलिए वह कोठारी के खास हैं। निर्दलीय विधायक कोठारी जिनके 24 प्रत्याशियों में से 23 प्रत्याशियों ने विजय हासिल की है । उनका भाजपा के शीर्ष नेताओं पर यह दबाव की राजनीति का खेल चल रहा है कि वह पद्मिनी वैष्णव को महापौर बनाएं क्योंकि उनके 24 में से 23 प्रत्याशियों ने विजय हासिल किया जबकि दूसरी ओर सांसद अग्रवाल समर्थक पांच प्रत्याशियों में से चार प्रत्याशी हारे हैं और टिकट वितरण के समय भी उनकी समर्थक आरती कोगटा जो की महापौर की दावेदार भी मानी जा रही थी उसका एनवक्त पर टिकट कटना भी इसी से जोड़ा जा रहा है। हालांकि इसमें कितनी सच्चाई है यह नहीं कहा जा सकता क्योंकि राजनीति में हर पल स्थितियां बदलती है। और अगर कोई पेच फंसता है तो राजनीति शतरंज की चाल के तहत 2019 के संशोधन के अनुसार भाजपा तीसरे विकल्प के रूप में लोकसभा चुनाव में कांग्रेस छोड़कर आए कांग्रेस के कद्दावर नेता और भीलवाड़ा की राजनीति के चाणक्य रामपाल शर्मा की पत्नी मोना शर्मा को महापौर का प्रत्याशी बन सकती है। यह आकलन राजनीतिज्ञ गणितज्ञों और वर्तमान समीकरणों के आधार पर है। लेकिन राजनीति में हर पल स्थितियां और परिस्थितियों बदलती है। अभी महापौर के चुनाव में 7 दिन का समय है।ऐसी स्थिति में क्या परिस्थितियों होती है यह कहना थोड़ा मुश्किल है। लेकिन रामपाल शर्मा की इस पूरे चुनाव में जो पर्दे के पीछे जिस तरह की भूमिका रही है और भाजपा के शीर्ष नेताओं के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उच्च पदाधिकारी से नजदीकियां बड़ी है उसे इस बात के संकेत मिलते हैं।
नगर पालिकाओं में किसका बन सकता है बोर्ड और कौन बन सकता है अध्यक्ष
बीगोद नगर पालिका
यहां पालिका बनने के बाद पहली बार चुनाव हुआ है और यहां कुल 25 वार्ड में से भाजपा ने 12 वार्ड जीतकर स्पष्ट बहुमत तो हासिल कर लिया है लेकिन यहां कांग्रेस ने 6 सीट जीती और 7 निर्दलीय प्रत्याशी जीते हैं यह सभी 7 निर्दलीय प्रत्याशी कांग्रेस के बागी हैं और मुस्लिम समुदाय से आते हैं। सूत्रों की रिपोर्ट के अनुसार यह सभी 7 ही निर्दलीय प्रत्याशी कांग्रेस पार्टी को समर्थन देकर कांग्रेस का बोर्ड बना सकते हैं अगर कांग्रेस के नेता थोड़ा और प्रयास करें। अगर यहां कांग्रेस का बोर्ड बनता है इसकी संभावनाएं अधिक है। ऐसी स्थिति में अध्यक्ष पद फिरोज खान बन सकते हैं और कांग्रेस अगर यहां बोर्ड बनाने में असफल रहती है तो ऐसी स्थिति में भाजपा का बोर्ड बनता है तो सुनीता वैष्णव अध्यक्ष पद की दावेदार है।
बिजौलिया नगर पालिका
यहां भी नगर पालिका बनने के बाद पहली बार चुनाव हुए हैं और 25 वार्ड में से भाजपा ने 12 सीट जीत कर बहुमत को हासिल कर लिया लेकिन यहां कांग्रेस ने 11 वार्ड जीते हैं और दो प्रत्याशी निर्णय जीते हैं। सूत्रों के अनुसार निर्दलीय के रूप में जीतने वाले दोनों प्रत्याशी कांग्रेस के बागी हैं। कांग्रेस के शीर्ष नेता एवं देहात जिला अध्यक्ष रामलाल जाट अगर प्रयास करें जोड़-तोड़ बिठाएं तो यहां पर भी कांग्रेस अपना बोर्ड बन सकती है। यहां पर एक गणित और है जो भाजपा के 12 प्रत्याशी जीते हैं उनमें से दो प्रत्याशी जाट समुदाय से हैं ऐसी स्थिति में कांग्रेस के प्रयास से जोड़-तोड़ करके भाजपा खेमे से भी इन दो प्रत्याशियों को तोड़ लिया जाता है तो कांग्रेस पूरी तरह से यहां पर बाजी मार सकती है और बीजेपी जीती हुई बाजी हार सकती है। यहां अध्यक्ष पद के लिए दो दावेदार दौड़ में प्रमुख रूप से बताए जा रहे हैं श्वेता तिवारी और श्रीमती हरेंद्र कुंवर।
गंगापुर नगर पालिका
यहां कुल 25 वार्ड है इनमें से सत्ता पक्ष भाजपा केवल 9 वार्ड पर ही सिमट गई जबकि कांग्रेस ने यहां 14 वार्डों पर जीत दर्ज करके स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है और दो प्रत्याशी निर्दलीय जीते हैं। निर्दलीय प्रत्याशी कांग्रेस समर्थक ही बताए जाते हैं इस तरह यहां कांग्रेस स्पष्ट बहुमत के साथ अपना बोर्ड बना रही है और यहां अध्यक्ष पद के लिए दावेदारों में प्रमुख रूप से श्रीमती रेखा हिरण और प्रीति काकाणी है। यहां पहले इस नगर पालिका में पिछले चुनाव में भाजपा ने बोर्ड बनाया था लेकिन बाद में पालिका अध्यक्ष में पाला बदलते हुए कांग्रेस खेमे में जाकर कांग्रेस के समर्थन से कांग्रेस का बोर्ड बना लिया।
हमीरगढ़ नगर पालिका
यहां कुल 20 वार्ड है इनमें से भाजपा ने 8 वार्ड में जीत दर्ज की है और कांग्रेस ने 7 वार्ड में तथा 5 वार्डो में निर्दलीय प्रत्याशियों ने बाजी मारी है। यहां पर भाजपा और कांग्रेस में कांटे की टक्कर है और निर्दलीय के समर्थन से ही कोई भी राजनीतिक दल बोर्ड बना सकता है। हालांकि इस नगर पालिका में पहले भाजपा का बोर्ड था और यहां पालिका बनने के बाद प्रथम अध्यक्ष रेखा परिहार थी। यहां एन वक्त पर कुछ भी बड़ा उलट फिर हो सकता है। वैसे संभावना भाजपा का बोर्ड बनने की है और इस बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में प्रबल दावेदारों के रूप में प्रमुख रूप से रेखा परिहार और जगदीश वैष्णव हैं।
जाहजपुर नगर पालिका
यहां कुल 35 वार्ड है इनमें से भाजपा 15 बार जीत का स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है जबकि कांग्रेस 3 वार्ड में ही सिमट गई है यहां कांग्रेस की करारी हार हुई है जो सीधे-सीधे तौर पर कांग्रेस के राष्ट्रीय स्तर के नेता माने जाने वाले धीरज गुर्जर की हार है। यहां पर 7 निर्दलीय प्रत्याशी जीते हैं। निर्दलीयों का भी समर्थन भाजपा के विधायक गोपीचंद मीणा भाजपा के पक्ष में जुटा सकते हैं ऐसी संभावनाएं अधिक है। यहां पर अध्यक्ष की दौड़ में सबसे प्रमुख दावेदारों के रूप में श्रीमती अखिलेश वैष्णव और अंतिमा पंचोली।
मांडलगढ़ नगर पालिका
यहां 20 वार्ड है इनमें से भाजपा ने 11 बार जीत कर स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है जबकि यहां कांग्रेस मात्र दो सीटों पर ही सिमट कर रह गई है। कांग्रेस की यहां पर बुरी तरह से करारी हार हुई है। और 7 वार्ड में निर्दलीय प्रत्याशियों ने कब्जा किया है। यहां पर भाजपा विधायक गोपाल लाल खंडेलवाल अपनी राजनीतिक चातुर्यता से निर्दलीयों को भी अपने समर्थन में कर लेंगे ऐसी संभावनाएं हैं और यहां पर अध्यक्ष पद के रूप में श्वेता डांगी प्रमुख दावेदार मानी जा रही है।
शाहपुरा नगर पालिका
यहां पर 35 वार्ड है इनमें से कांग्रेस ने 22 वार्ड जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है जबकि यहां सत्ता पक्ष भाजपा की करारी हार हुई है और वह मात्र 8 वार्ड ही जीत पाई है और 5 वार्डो में निर्दलीय प्रत्याशियों ने बाजी मारी है। यह निर्दलीय प्रत्याशी भी कांग्रेस को अपना समर्थन दे सकते हैं ऐसी संभावनाएं हैं। यहां पर अध्यक्ष पद के रूप में प्रमुख रूप से रमेश सेन और बालमुकुंद तोषनीवाल दावेदार माने जा रहे हैं।
आसींद नगर पालिका
यहां 25 वार्ड में से भाजपा स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है जबकि कांग्रेस मात्र 8 वार्ड में ही सिमट कर रह गई है और 5 वार्डो में निर्दलीय प्रत्याशियों ने कब्जा किया है। कांग्रेस यहां पर जोड़ तोड़ की राजनीति करके 5 ही प्रत्याशियों का समर्थन हासिल करें तब वह अपना बोर्ड बना सकती है लेकिन ऐसी संभावनाएं नहीं के बराबर है जबकि क्षेत्रीय विधायक जब्बर सिंह सांखला निर्दलीय प्रत्याशियों को अपने पक्ष में कर सकते हैं इसकी संभावनाएं नजर आ रही है। यहां अध्यक्ष पद की दौड़ में देवीलाल साहू प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं।
बनेड़ा नगर पालिका
यहां पहली बार नगर पालिका बनने के बाद पहला चुनाव और यहां पर कुल 20 वार्ड में से भाजपा ने 10 वार्ड जीत कर स्पष्ट बहुमत जरूर हासिल कर लिया है लेकिन कांग्रेस ने भी 9 वार्डो पर कब्जा किया है और एक वार्ड पर निर्दलीय प्रत्याशी जीता है और बताया जाता है कि यह निर्दलीय प्रत्याशी भी कांग्रेस का बागी और कांग्रेस समर्थक है ऐसी स्थिति में अगर वह कांग्रेस को समर्थन दे देता है तो यहां पर दोनों ही दल बराबर बराबर की स्थिति में आ जाएंगे। अगर ऐसा होता है तो फिर यहां पर पर्ची के आधार पर अध्यक्ष का चुनाव होगा। लेकिन भाजपा और कांग्रेस अपना बोर्ड बनाने के लिए जोड़ तोड़ की जबरदस्त राजनीति का खेल खेलेगी। इस खेल में कौन किस पर बाजी मारेगी यह कहना बहुत मुश्किल और जल्दबाजी होगा। लेकिन यहां पर अध्यक्ष की दौड़ में बनेड़ा राजघराने के राजाधिराज गोपाल सिंह की पत्नी और उषा व्यास प्रमुख रूप से दावेदार माने जा रहे हैं।
गुलाबपुरा नगर पालिका
यहां 35 वार्ड में से भाजपा ने 14 वार्ड जीतकर राजनीतिक दृष्टिकोण से स्पष्ट बहुमत जरूर हासिल कर लिया है लेकिन कांग्रेस ने 10 वार्ड जीते हैं जबकि भाजपा के ही बागी धनराज गुर्जर प्रत्याशी ने अपने समर्थकों के साथ सभी 35 वार्डों में चुनाव लड़कर 10 वार्डों में जीत हासिल की है। अब यहां यह भाजपा का बागी भाजपा और कांग्रेस से मोलभाव करके अपना बोर्ड बनाएगी अगर कांग्रेस समर्थन देती है तो भी वह बोर्ड बनाएगा और अध्यक्ष बनेगा और भाजपा उसे समर्थन देना चाहे तो वह अध्यक्ष का पद अपने पास ही रखेगा कुल मिलाकर यहां पर धनराज गुर्जर अपनी शर्तों पर बोर्ड बनाएगा।
