भीलवाड़ा में क्या भाजपा SC-ST को फिर दरकिनार करेगी ?

भीलवाड़ा। नगर निगम में भाजपा का बोर्ड बहुमत के साथ कायम होने और महापौर पद पर जसवंत कंवर के निर्विरोध निर्वाचन के बाद अब सियासत की नजर उपमहापौर की कुर्सी पर टिक गई है। 70 वार्डों में भाजपा के 45 पार्षद जीतकर आए हैं, ऐसे में उपमहापौर का फैसला पार्टी के लिए महज संवैधानिक पद का चयन नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक समीकरण साधने का अवसर भी माना जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल
क्या भाजपा इस बार SC-ST वर्ग को प्रतिनिधित्व देगी या उपमहापौर पद भी किसी दूसरे सामाजिक समीकरण के खाते में जाएगा? निकाय चुनाव के बाद अब पार्टी के सामने अलग-अलग सामाजिक वर्गों को साधने की चुनौती है। खासतौर पर SC-ST वर्ग को उपमहापौर पद देकर राजनीतिक प्रतिनिधित्व का संदेश देने की चर्चा इसलिए महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि भीलवाड़ा की राजनीतिक परंपरा के अनुसार अब तक शहर में विधायक, सांसद, नगर परिषद सभापति अब महापौर और यूआईटी चेयरमैन इन चारों पदों पर सामाजिक समीकरण के तहत वैश्य, महाजन, सामान्य,ब्राह्मण और ओबीसी वर्ग को ही प्रतिनिधित्व मिलता है। एससी एसटी वर्ग जिसका एक बड़ा हिस्सा या जनसंख्या भाजपा का कौर वोटर है उसको अभी तक शहर में इन चारों पदों में से किसी एक पर भी प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। अगर भाजपा उप महापौर पद पर एससी एसटी वर्ग को प्रतिनिधित्व देती है तो यह फैसला आगामी राजनीतिक समीकरणों पर भी असर डाल सकता है।
विधानसभा चुनाव की नाराजगी की भरपाई का मौका?
राजनीतिक हलकों में यह सवाल भी उठ रहा है कि पिछले 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान SC-ST वर्ग की नाराजगी भाजपा से। भाजपा द्वारा एससी एसटी वर्ग की अपेक्षा के कारण पैदा हुई नाराजगी की कोई राजनीतिक कीमत चुनाव में सामने आई है, और पार्टी ने महसूस की है, तो क्या उसकी भरपाई निकाय स्तर पर प्रतिनिधित्व देकर की जाएगी?
यह फिलहाल राजनीतिक चर्चा और संभावना है, भाजपा की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक निर्णय या घोषणा सामने नहीं आई है।
वैश्य-महाजन समीकरण के बाद अब किसकी बारी?
महापौर पद पर सामान्य महिला वर्ग से चयन के बाद अब उपमहापौर पद को लेकर सामाजिक संतुलन की चर्चा तेज है। शहर की राजनीति में वैश्य और महाजन वर्ग को पहले ही मजबूत राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिल चुका है ब्राह्मण सामान्य और ओबीसी वर्ग भी प्रतिनिधित्व ले चुके हैं और भाजपा नगर विकास न्यास में ब्राह्मण को प्रतिनिधि दे देगी ऐसी संभावनाएं पूरी हैं।ऐसी स्थिति में सोशल इंजीनियरिंग को ध्यान में रखते हुए और आगमी पंचायत चुनाव और विधानसभा चुनाव की गणित को मध्य नजर भाजपा को एससी एसटी वर्क के प्रतिनिधित्व करने पर विचार करना चाहिए ऐसी चर्चाएं शहर के राजनीतिज्ञ विशेषज्ञों ने है। ऐसे में निगाहें इस बात पर हैं कि भाजपा SC-ST सहित अन्य सामाजिक वर्गों को किस तरह प्रतिनिधित्व देती है।
भाजपा की कड़ी परीक्षा औरयह ज्यादा महत्वपूर्ण है
45 पार्षदों के बहुमत के बीच असली परीक्षा
भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत है। इसलिए उपमहापौर के चयन में संख्या का संकट नहीं, बल्कि सामाजिक संतुलन और राजनीतिक संदेश सोशल इंजीनियरिंग का फार्मूला ज्यादा महत्वपूर्ण होगा। यही वजह है कि उपमहापौर की कुर्सी अब सिर्फ एक पद नहीं रह गई है।यह भाजपा के लिए सामाजिक समीकरण साधने, नाराज वर्गों को संदेश देने और संगठन के भीतर संतुलन बनाने की अगली बड़ी परीक्षा बन गई है।
अब सवाल सिर्फ यह नहीं कि उपमहापौर कौन बनेगा?
सवाल यह है कि भाजपा किस सामाजिक वर्ग को यह कुर्सी देकर क्या राजनीतिक संदेश देगी?
भाजपा ने जीते ओबीसी वार्ड
वार्ड नंबर 5 11 15 17 20 21 26 31 33 38 54 58 64 67 और 70
निर्दलीय ओबीसी
वार्ड नंबर -7,12 19 35 50 और 51
भाजपा ने जीते एससी एसटी वार्ड
एससी-एसटी भाजपा वार्ड नंबर 48 और वार्ड नंबर 52, 25 57 66 53, 2
दौड़ में शामिल प्रत्याशी किस खेमे से और क्या है स्थिति
उप महापौर पद के लिए दौड़ में वार्ड संख्या 16 से राधेश्याम सोमाणी, वार्ड 28 से बिलेश्वर डाड, वार्ड 58 से सुभाष सोनी वार्ड 26 शंकर जाट और वार्ड 52 से रमेश खोईवाल शामिल है । अब इनकी जातिगत और समर्थक स्थिति को जानते हैं।
1-राधेश्याम सोमाणी भाजपा के कार्यकर्ता थे विधानसभा चुनाव में इन्होंने भाजपा से बगावत कर निर्दलीय प्रत्याशी अशोक कोठारी का साथ दिया था संगठन का विशेष अनुभव नहीं। यह आज भी कोठारी के समर्थक माने जाते हैं। यह महाजन वर्ग से आते हैं।
2-बिलेशवर डाड भाजपा के नेता पूर्व जिला अध्यक्ष पूर्व यूआईटी अध्यक्ष एवं नगर परिषद के पूर्व कार्यवाहक सभापति लक्ष्मी नारायण डाड के पुत्र हैं। लक्ष्मी नारायण डांड को संगठन और राजनीतिक का बहुत लंबा अनुभव है लेकिन उनके पुत्र बिलेश्वर को संगठन व राजनीति का कोई लंबा अनुभव नहीं है। दूसरा लक्ष्मी नारायण डाड ने 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा का साथ छोड़कर निर्दलीय प्रत्याशी अशोक कोठारी का साथ दिया था और आज भी वह अशोक कोठारी के समर्थक माने जाते हैं। यह भी महाजन वर्ग से आते हैं।
3-सुभाष सोनी इनका स्वयं का भी कोई संगठन और राजनीति का अधिक अनुभव नहीं है लेकिन इनके चाचा कन्हैयालाल स्वर्णकार को राजनीति और संगठन का अच्छा खासा लंबा अनुभव है और कन्हैयालाल स्वर्णकार ने भी विधानसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी कोठारी का साथ दिया था और वह अभी भी कोठारी के समर्थक माने जाते हैं। सुभाष की पत्नी ने पिछला पार्षद का चुनाव लड़ा था लेकिन में हार गई थी। यह ओबीसी वर्ग से आते हैं।
4-शंकर जाट इनको भी राजनीति और संगठन का कोई लंबा अनुभव नहीं है हां एक बार यह पार्षद रह चुके हैं और उनके पार्षद का कार्यकाल अच्छा रहा है और इन्होंने वर्तमान चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी और लगातार पार्षद का चुनाव जीतने वाली मंजू पोखरना को हराया है। यह भी ओबीसी वर्ग से आते हैं।
5-रमेश खोईवाल इनको संगठन के साथ-साथ राजनीति का लंबा अनुभव इनकी पृष्ठभूमि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की है। इनकी पत्नी प्रेम देवी लगातार इस बार तीसरी बार वार्ड पार्षद चुनी गई है वार्ड संख्या 48 से और इन्तहोंने वार्ड संख्या 52 से कांग्रेस के जिला अध्यक्ष शिवराम खटीक की पत्नी समदू देवी को हराया। यह स्क्रैप के बड़े व्यापारी हैं और इनका व्यापारी वर्ग से व्यापार का लंबा अनुभव है तथा एसटीएससी वर्ग से आते हैं।
क्या सांसद भी इस बार..
राजनीति गलियारे में यह कयास और चर्चाओं का दौर है संघ और संगठन का लंबा अनुभव रखने वाले एवं राजनीति के माहिर सांसद दामोदर अग्रवाल टिकट वितरण में और महापौर बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका से पिछड़ने के बाद अब वह उपमहापौर पद पर अपने समर्थक को बिठाने के पूरे प्रयास करेंगे और उनके समर्थक की ओर से गौतम शर्मा का नाम सबसे आगे है। राजनीतिज्ञ का मानना है कि अगर अग्रवाल इस बार अड गए और उनकी चली तो गौतम शर्मा भी उपमहापौर हो सकता है।? इसके पीछे उनका एक सशक्त कारण यह होगा की भीलवाड़ा में ब्राह्मण मतदाता सर्वाधिक है और ब्राह्मण मतदाताओं की उपेक्षा करना भाजपा के लिए खतरा हो सकता है। यह कार्ड वह चलेंगे और हो सकता है इसमें वह सफल हो जाए ?
