देश में अगले कुछ महीनो में पैदा होने वाली है गंभीर संकट की स्थिति

180 से अधिक वैज्ञानिकों की चेतावनीनवंबर के बाद हो सकते हैं मौसम के हिसाब से हालत खराबडॉ. चेतन ठठेरा स्वतंत्र पत्रकार
देश में अगले कुछ महीनो में पैदा होने वाली है गंभीर संकट की स्थिति

जयपुर। देश के 180 से अधिक पर्यावरण और मौसम वैज्ञानिकों ने आने वाले कुछ महीने के बाद शक्तिशाली अल नीनो को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए चेतावनी जारी की है। वैज्ञानिकों का मानना है कि 2026 27 का यह अल नीनो सामान्य वर्षों से कहीं अधिक प्रभावशाली और शक्तिशाली हो सकता है।

देश के जंगलों नदियों समुद्र पहाड़ों और वन्य जीवन पर गहरा असर डाल सकता है जिसका प्रभाव आमजन जीवन पर भी पड़ने की संभावना है।‌

 

वैज्ञानिकों की अपील

 

इन वैज्ञानिकों ने सरकार शोध संस्थानों और फंडिंग एजेंसियों से तत्काल तैयारी शुरू करने की अपील की है ताकि नुकसान होने के बाद मंथन और अध्ययन करने के बजाय पहले से ही निगरानी और रिकॉर्ड की व्यवस्था की जा सके। यह शोध 16 सितंबर 2026 को जनरल प्लेटफार्म पर सुपर अल नीनो की दस्तक‌ 2026/2027 मैं इकोलॉजिस्ट के लिए चेतावनी और चुनौती नाम से प्रकाशित हुआ है।

 

क्या है अल नीनो

 

अल नीनो प्रशांत महासागर से जुड़ी एक प्राकृतिक घटना है जिस समुद्र की सतह का पानी सामान्य से काफी अधिक गर्म हो जाता है और इसका प्रभाव दुनिया के कई क्षेत्रों के मौसम पर पड़ता है। भारत में आमतौर पर अल नीनो का संबंध कमजोरी या देर से आने वाले मानसून और अधिक गर्मी से देखा जाता है हालांकि हर अल नीनो का प्रभाव एक जैसा नहीं होता।

 

अभी से यह है जरुरत

 

वैज्ञानिकों के अनुसार इस बार प्रशांत महासागर में समुद्र का तापमान असामान्य रूप से बढ़ रहा है इसलिए आने वाले महीनों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है और यह स्थिति सामान्य अल नीनो से काफी अलग हो सकती है इसलिए इसके असर को समझने और दर्ज करने के लिए अभी से बड़े स्तर पर निगरानी की जरूरत है।

 

नवंबर 26 के बाद यह बड़ी चुनौती आ सकती

 

वैज्ञानिकों को आशंका है कि नवंबर 2026 से अगले साल तक भारत के कई हिस्सों में सामान्य से अधिक गर्म और सूखा मौसम देखने को मिल सकता है। बारिश कम होने पर पानी की कमी बढ़ सकती है जिसका सीधा असर खेती जंगलों और पशुपालन पर पड़ेगा। गर्मी और सूखे का सबसे अधिक प्रभाव इन क्षेत्रों में सकता है‌ जहां पहले से ही पानी की कमी है विशेष कर रेगिस्तानी क्षेत्र और ऊंचे पहाड़ी इलाकों में रहने वाले जानवरों और आमजन तथा वहां होने वाले पौधों के लिए ऐसी स्थिति और भी कठिन हो सकती। पानी के संसाधनों पर दबाव बढ़ने से न केवल कृषि उत्पादन प्रभावित होगा बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी दबाव में आ सकती है और शहरों में भी गर्मी का असर बढ़ सकता है। लंबे समय तक चलने वाली तेज गर्मी लोगों की स्वास्थ्य और शहरों में लगी पेड़ पौधों के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।

 

किस पर क्या पड़ेगा प्रभाव

 

प्राकृतिक बदलावों का असर आखिरकार आम लोगों तक पहुंचता है किसान, मछुआरे और पशुपालक मौसम पर काफी निर्भर करते हैं। कम बारिश और अधिक गर्मी से खेती प्रभावित हो सकती है पहाड़ी इलाकों में घास कम होने से पशुपालन के सामने चारे की समस्या आ सकती है। वैज्ञानिकों ने जोड़ दिया है कि इस बार नुकसान होने के बाद अध्ययन करने के बजाय पहले से तैयारी करनी चाहिए इसके लिए पुराने शोध और लंबे समय तक चल रहे पर्यावरणीय अध्ययन को जारी रखना जरूरी है। स्थानीय स्तर पर छोटे मौसम केंद्र बनाए जाने, तापमान और नमी का रिकॉर्ड रखने तथा अलग-अलग राज्यों और क्षेत्र के वैज्ञानिकों के बीच सहयोग बढ़ाने की मांग की गई। अल नीनो को रोका नहीं जा सकता लेकिन उसके असर को समझने और उससे मिलने वाली वैज्ञानिक जानकारी को बचाने की तैयारी अभी से की जा सकती है।

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