मेयर सभापति और अध्यक्ष का चुनाव कौन करेगा इसको लेकर मंत्री खर्रा ने दिए बड़े संकेत

निकाय एवं पंचायती राज चुनाव में कांग्रेस के कारण हुई देरी
मेयर सभापति और अध्यक्ष का चुनाव कौन करेगा इसको लेकर मंत्री खर्रा ने दिए बड़े संकेत

जयपुर / डॉ. चेतन ठठेरा। राजस्थान में होने वाले निकाय चुनावों में नगर निगम नगर परिषद नगर पालिकाओं में मेयर, सभापति और अध्यक्ष का चुनाव सीधे होगा या पार्षद करेंगे यह संशय चुनाव से पहले नगरीय विकास एवं आवासन राज्य मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने बड़ा राजनीतिक संकेत देते हुए ।

स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार नगर निगमों में महापौर, नगर परिषदों में सभापति तथा नगरपालिकाओं में पालिकाध्यक्ष का चुनाव पूर्व की व्यवस्था के अनुसार निर्वाचित पार्षदों के माध्यम से ही कराएगी। यानी इस बार भी इन पदों के लिए प्रत्यक्ष चुनाव नहीं होंगे।

सीकर में भाजपा की संगठनात्मक बैठक में शामिल होने पहुंचे राज्य मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि पूर्व में प्रत्यक्ष चुनाव की व्यवस्था के दौरान कई निकायों में अध्यक्ष और पार्षद अलग-अलग विचारधाराओं के चुने गए, जिससे पूरे कार्यकाल में आपसी खींचतान बनी रही और विकास कार्य प्रभावित हुए। इसी अनुभव को देखते हुए सरकार ने पार्षदों द्वारा ही अध्यक्षों के चुनाव की व्यवस्था को जारी रखने का निर्णय लिया है।

उन्होंने कहा कि भाजपा का कार्यकर्ता पूरे वर्ष जनता के बीच सक्रिय रहता है। चुनाव के दौरान संगठन चुनाव संचालन समितियों और अन्य व्यवस्थाओं के माध्यम से अभियान को और अधिक प्रभावी बनाएगा।

राज्यमंत्री ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले 31 महीनों में बिजली, पानी, सड़क, कानून-व्यवस्था और पेपर लीक जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रभावी कार्य हुए हैं। साथ ही युवा, महिला, किसान, मजदूर सहित समाज के सभी वर्गों के लिए अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं लागू की गई हैं।

निकाय एवं पंचायती राज चुनाव में कांग्रेस के कारण हुई देरी

निकाय एवं पंचायतीराज चुनाव में हुई देरी पर उन्होंने कहा कि वर्ष 2021-22 में उच्चतम न्यायालय ने ओबीसी आरक्षण को लेकर दिशा-निर्देश दिए थे, लेकिन तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने आवश्यक प्रक्रिया पूरी नहीं की। भाजपा सरकार बनने के बाद वर्ष 2024 में राजनीतिक आरक्षण के लिए ओबीसी आयोग का गठन किया गया। आयोग द्वारा आंकड़े एकत्रित किए जाने के दौरान विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और बाद में जनगणना प्रक्रिया शुरू होने से कार्य प्रभावित हुआ। उन्होंने बताया कि ओबीसी आयोग ने 5 अगस्त को अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंप दी है, जिस पर अब राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में विचार कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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