जन्मदिन से पहले धीरज गुर्जर को यूपी से प्रभारी और सचिव पद से हटकर दिया झटका,कांग्रेस में बदले सियासी समीकरण

गहलोत समर्थक को दी जिम्मेदारी
जन्मदिन से पहले धीरज गुर्जर को यूपी से प्रभारी और सचिव पद से हटकर दिया झटका,कांग्रेस में बदले सियासी समीकरण

जयपुर/डॉ. चेतन ठठेरा। कांग्रेस हाईकमान ने उत्तर प्रदेश संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए राजस्थान की राजनीति में भी नई चर्चा छेड़ दी है। सचिन पायलट के करीबी माने जाने वाले धीरज गुर्जर को उनके जन्मदिन से ठीक 10 दिन पहले उत्तर प्रदेश के एआईसीसी सचिव एवं सह-प्रभारी पद से हटा दिया गया है।

कांग्रेस में उत्तर प्रदेश के प्रभारी सचिव के साथ टेनेट 6 पुरानी एआईसीसी सचिवों को हटाकर नए नेताओं को जिम्मेदारी दी है उत्तर प्रदेश के प्रभारी महासचिव के साथ जुड़े एआईसीसी सचिव धीरज गुर्जर को हटा दिया गया है।

उनकी जगह पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के विश्वस्त माने जाने वाले चूरू के सादुल शहर से पूर्व विधायक जगदीश जांगिड़ को उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।

कांग्रेस में उत्तर प्रदेश में जगदीश सिंह जागीर के साथ अभिषेक दत्त कुणाल चौधरी संजीव आर्य राहुल चौधरी और अब्दुल मनन को नया एआईसीसी सचिव नियुक्त किया है और उनको प्रभारी महासचिव के साथ अटैच किया है। यूपी में जिन अच्छे पुराने आईसीसी सचिवों को हटाया गया है उनमें धीरज गुर्जर के अलावा नीलांशु चतुर्वेदी प्रदीप नरवाल राजेश तिवारी सत्यनारायण पटेल और तौकीर आलम शामिल है।

धीरज गुर्जर 2019 को सबसे पहले आईसीसी सचिव बनाया गया था। उसे समय राहुल गांधी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे धीरज गुर्जर को उसे समय उत्तर प्रदेश पश्चिम के प्रभारी महासचिव ज्योतिर्लिंग जोतिरादित्य सिंधिया के साथ सचिन लगाया गया था बाद में उन्हें प्रियंका गांधी के साथ अटैच कर दिया गया था। 2024 में मल्लिकार्जुन खिड़की के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद 2024 में भी धीरज गुर्जर उत्तर प्रदेश के सहप्रभारी सचिव के रूप में उनकी जिम्मेदारी कोबरकरार रखा गया।

राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को राजस्थान कांग्रेस के बदलते शक्ति संतुलन के रूप में देखा जा रहा है। चर्चा है कि संगठन में गहलोत खेमे का प्रभाव एक बार फिर मजबूत होता दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश जैसे अहम चुनावी राज्य में गहलोत समर्थक नेता को जिम्मेदारी मिलना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि हाईकमान अनुभवी और संगठनात्मक पकड़ रखने वाले नेताओं पर भरोसा जता रहा है।

हालांकि कांग्रेस ने इसे सामान्य संगठनात्मक फेरबदल बताया है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले से राजस्थान कांग्रेस में गहलोत खेमे का मनोबल बढ़ेगा, जबकि पायलट समर्थक माने जाने वाले धीरज गुर्जर के लिए यह बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले हुए इस बदलाव ने राजस्थान कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को भी गर्मा दिया है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि आने वाले दिनों में प्रदेश और राष्ट्रीय संगठन में क्या नए बदलाव देखने को मिलते हैं।

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