उच्च स्तरीय जांच पड़ताल शुरू,बनेड़ा मॉडल स्कूल का मामला

सीबीईओ बनेड़ा ने प्रारंभिक जांच में माना विद्यालय 4 साल में हुआ जर्जरCDEO का एक्शन
उच्च स्तरीय जांच पड़ताल शुरू,बनेड़ा मॉडल स्कूल का मामला

जयपुर /डॉ. चेतन ठठेरा। भीलवाड़ा। भीलवाड़ा जिले के बनेड़ा ब्लॉक में शिक्षा के मंदिर के निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग कर नौनिहालों के जीवन से सीधा खिलवाड़ करने के मामले में खबरें प्रकाशित होने के बाद जिला कलेक्टर और मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी(CDEO) ने इसे गंभीरता से लेते हुए प्रारंभिक जांच के बाद अब उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। हमने इस संबंध में 8 अगस्त को विस्तृत खबर तथ्य के आधार पर प्रकाशित की थी।

 

यह था मामला

 

बनेड़ा ब्लॉक में स्थित स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल 4 साल में ही दरकने लगा और हालात वर्तमान में इतने खराब है कि विद्यार्थियों को कमरे में बैठना तक बंद कर दिया गया है और वहां पर नो एंट्री के बोर्ड लटका दिए गए हैं इसी को लेकर हमने 8 अगस्त को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा नौनिहालों का भविष्य,1.17 करोड़ की लागत से बना भवन 4 साल में ही जर्जर शीर्षक से तथ्यों के आधार पर विस्तृत समाचार प्रकाशित किया था।

 

प्रारंभिक जांच में यह आया सामने

 

खबरें प्रकाशित होने के बाद जिला कलेक्टर ने इसे गंभीरता से लिया और उनके दिशा निर्देश पर मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी अरूणा गारू ने इस मामले की जांच प्रारंभिक स्तर पर सीबीईओ बनेड़ा गीता माहेश्वरी से कराई। उन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट में माना की 4 साल पहले बने बनेड़ा मॉडल स्कूल के प्राथमिक नए भवन की स्थिति काफी खराब है और विद्यार्थियों को बिठाने लायक नहीं है तथा कुछ रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।‌

 

उच्च स्तरीय जांच इसलिए बिठाई

 

सीबीईओ गीता माहेश्वरी की रिपोर्ट के आधार पर मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी अरूणा गारू ने सोमवार को एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी में तीन सदस्यों को शामिल किया गया है जिनमें एक मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, एक प्रिंसिपल और एक सहायक लेखाधिकारी ग्रेड प्रथम को लगाया गया है। कमेटी को निर्देश दिया गया है की विस्तृत जांच कर तत्कालीन अधिकारियों द्वारा बरती गई लापरवाही एवं कार्य में रही कमियों के संबंध में उत्तरदायित्व निर्धारित किया जाकर दोषी अधिकारियों के खिलाफ नियम अनुसार कार्रवाई हेतु प्रस्ताव प्रेषित करें।

 

सवाल जो मांग रहे हैं जवाब

 

सूत्रों के अनुसार इस मामले में तत्कालीन स्कूल प्रिंसिपल और वर्तमान में एडीपीसी डॉ. कल्पना शर्मा, तत्कालीन एईएन समसा राजकुमार मुंदड़ा व‌ जेईएन की जिम्मेदारी बनती है ? प्रिंसिपल ने उस समय जब ठेकेदार से विद्यालय अपने क्षेत्राधिकार में लिया तब स्थिति खराब थी तो उन्होंने करीब 15 बिंदुओं की एक शिकायत समसा कार्यालय में दी थी लेकिन उसके बाद ठेकेदार को अनापत्ति प्रमाण पत्र लेकर विद्यालय को अपने क्षेत्राधिकार में ले लिया तो उन्होंने ऐसा क्यों किया ? अगर आपत्ति थी तो उन्हें अपने क्षेत्राधिकार में विद्यालय भवन को नहीं लेना चाहिए था ? अगर प्रिंसिपल ने किसी अधिकारी के लिखित आदेश पर लिया क्या ?अगर अधिकारी के लिखित आदेश पर लिया है तो तत्कालीन संबंधित अधिकारी अर्थात एडीपीसी जिम्मेदार है की कैसे उन्होंने विद्यालय अधिग्रहण की स्वीकृति दे दी ? ठेकेदार ने शिकायत पर क्या विद्यालय की मरम्मत कराई थी ? एईएन ने कैसे संवेदक का बिल पारित कर दिया ?‌

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