गाड़िया लुहारों के भूखंड गैर-समुदाय को बेचना अवैध, सभी खरीद-फरोख्त रद्द,राजस्थान हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

भीलवाड़ा में प्रशासन शहरों के संग अभियान की आड़ में हुआ था खेल,भीलवाड़ा नगर निगम के महापौर के परिजनों की होगी जांच,नगर निगम के पूर्व महापौर को झटका,भूखंड वापस सरकार या मूल आवंटियों में होंगे निहित
गाड़िया लुहारों के भूखंड गैर-समुदाय को बेचना अवैध, सभी खरीद-फरोख्त रद्द,राजस्थान हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

जयपुर / डॉ. चेतन ठठेरा ।‌भीलवाड़ा। राजस्थान उच्च न्यायालय ने भीलवाड़ा की ‘कीर खेड़ा स्थित गाड़िया लुहार योजना’ में हुए बड़े फर्जीवाड़े पर सख्त रुख अपनाते हुए अहम फैसला सुनाया है।

न्यायालय ने घुमंतू और अर्ध-घुमंतू गाड़िया लुहार समुदाय के कल्याण के लिए आवंटित 184 भूखंडों की गैर-समुदाय के लोगों को की गई सभी रजिस्ट्रियों हस्तांतरण, बिक्री, उपहार को शून्य घोषित कर रद्द कर दिया है। न्यायालय के इस आदेश के बाद नगर निगम के अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। हाई कोर्ट केस लिस्ट नगर निगम के पूर्व महापौर और आयुक्त को झटका लगा है। ‌

गरीबों का हक अमीरों को बेचा

न्यायाधीश डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और न्यायाधीश प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने राजेश सिंह सिसोदिया की जनहित याचिका पर यह फैसला सुनाया। न्यायालय ने पाया कि वर्ष 2005 के आसपास 184 गाड़िया लुहार परिवारों को 99 साल की लीज पर अहस्तांतरणीय शर्त के साथ भूखंड निशुल्क आवंटित किए गए थे। लेकिन प्रशासन शहरों के संग अभियान-2021 के तहत 21 अप्रेल 2022 को जारी एक आदेश की गलत व्याख्या करते हुए इन भूखंडों को अन्य लोगों (गैर-गाड़िया लुहारों) को बेच दिया गया और उनके नाम नामांतरण भी खोल दिए गए।

नगर निगम महापौर के परिजनों पर जांच की आंच

याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया था कि नगर निगम भीलवाड़ा के महापौर राकेश पाठक के परिजनों जिसमें अलका पाठक और मृत्युंजय पाठक और अन्य रसूखदारों ने इन भूखंडों की अवैध खरीद की है।

न्यायालय ने सरकार के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे महापौर के परिजनों द्वारा भूखंडों की अवैध खरीद के आरोपों की उचित अधिकारी के माध्यम से व्यापक ‘फैक्ट-फाइंडिंग’ जांच करवाएं। यह जांच रिपोर्ट 6 महीने के भीतर हाईकोर्ट के समक्ष पेश करनी होगी।

कोर्ट के सख्त निर्देश

गाड़िया लुहार समुदाय के अलावा किसी भी अन्य व्यक्ति के पक्ष में किए गए मालिकाना हक, लीज, बिक्री, उपहार या तीसरे पक्ष के अधिकार के हस्तांतरण को रद्द किया जाता है। योजना के तहत आवंटित सभी भूखंड उन्हीं मूल आवंटियों गाड़िया लुहार समुदाय में निहित रहेंगे। यदि किसी गैर-समुदाय के व्यक्ति ने इसके लिए पैसे दिए हैं, तो वह अपना मुआवजा या लागत मांगने के लिए स्वतंत्र है।

यदि कोई भी हस्तांतरण इस आदेश के विपरीत पाया जाता है, तो आवंटन रद्द माना जाएगा और वह भूखंड वापस राज्य सरकार या संबंधित स्थानीय निकाय (नगर निगम) में निहित हो जाएगा, ताकि उसे किसी योग्य गाड़िया लुहार को आवंटित किया जा सके। कोई भी प्राधिकरण ऐसे अवैध हस्तांतरण को मान्यता नहीं देगा और न ही इसके आधार पर कोई नामांतरण या राजस्व प्रविष्टि दर्ज की जाएगी।

न्यायालय की तल्ख टिप्पणी

पीठ ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 14, 21, 38 और 46 के तहत हाशिए पर रहने वाले समुदायों के उत्थान के लिए बनी कल्याणकारी योजनाओं को महज जमीन के सौदों में नहीं बदला जा सकता। सार्वजनिक संपत्ति को प्रशासनिक छूट के जरिए अयोग्य लोगों के निजी फायदे का साधन बनने की अनुमति नहीं दी जा सकती, क्योंकि यह सीधे तौर पर जनहित और संवैधानिक उद्देश्यों के खिलाफ है। न्यायालय ने आदेश की पालना 30 दिन के भीतर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

विज्ञापन