आयोग के पत्र ने तबादलों को लेकर किया नया संशय खड़ा

जयपुर / डॉ. चेतन ठठेरा। प्रदेश में लंबे इंतजार के बाद वर्तमान में चल रही तब अपना एक्सप्रेस के बीच ओबीसी आयोग के एक पत्र ने तबादला प्रक्रिया को लेकर नया संशय खड़ा कर दिया है। प्रदेश में तबादला के लंबे इंतजार के बाद तबादला एक्सप्रेस शुरू हुई इससे कर्मचारियों और अधिकारियों मैं कहीं खुशी […]
आयोग के पत्र ने तबादलों को लेकर किया नया संशय खड़ा

जयपुर / डॉ. चेतन ठठेरा। प्रदेश में लंबे इंतजार के बाद वर्तमान में चल रही तब अपना एक्सप्रेस के बीच ओबीसी आयोग के एक पत्र ने तबादला प्रक्रिया को लेकर नया संशय खड़ा कर दिया है।

प्रदेश में तबादला के लंबे इंतजार के बाद तबादला एक्सप्रेस शुरू हुई इससे कर्मचारियों और अधिकारियों मैं कहीं खुशी कहीं गम का माहौल है लेकिन तबादलों की अंतिम समय सीमा 10 जुलाई शुक्रवार को निर्धारित की गई थी इससे एक दिन पूर्व ही आयोग ने मुख्य सचिव वीर श्रीनिवास को पत्र लिखकर आयोग के कार्य में लगे नोडल अधिकारियों सहायक नोडल अधिकारियों प्रगणकों और अन्य संबंधित कर्मचारियों को फिलहाल ताबड़ लेकर बाद दूसरी जगह रिलीव नहीं करने का आग्रह किया है हालांकि अभी तक मुख्य सचिव कार्यालय से इस संबंध में कोई लिखित आदेश जारी नहीं हुए हैं। लेकिन आयोग के इस पत्र से खलबली मची हुई है।

ओबीसी आयोग के सचिव अशोक कुमार जैन द्वारा भेजे गए पत्र में कहा गया है कि जिला कलेक्टरों ने आयोग के सर्वे कार्य के लिए नोडल, सहायक नोडल और अन्य कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय कर रखी है। ऐसे में यदि इन अधिकारियों और कर्मचारियों का तबादला कर उन्हें तत्काल कार्यमुक्त किया जाता है तो आयोग का सर्वे और रिपोर्ट तैयार करने का काम प्रभावित हो सकता है।
पत्र में बताया गया है कि आयोग की ओर से 7 जुलाई को प्रशिक्षण आयोजित किया जा चुका है, जबकि 9 और 10 जुलाई को रेफरेंस ट्रेनर्स द्वारा प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

इसलिए रिलीव नहीं ‌करे

इसके बाद 10 जुलाई से 23 जुलाई तक ओबीसी परिवारों का घर-घर जाकर सर्वे किया जाएगा। यह सर्वे पंचायती राज एवं स्थानीय निकाय चुनावों में वर्ग वार आरक्षण के संबंध में आयोग की सिफारिशों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आयोग ने अपने पत्र में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का भी उल्लेख करते हुए कहा है कि सर्वे कार्य में लगे अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले अथवा उन्हें तत्काल रिलीव किए जाने से आयोग की रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसी आधार पर मुख्य सचिव से सभी जिला कलेक्टरों और संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश जारी करने का आग्रह किया गया है, ताकि आयोग के कार्य से जुड़े कर्मचारियों को फिलहाल कुछ समय के लिए रिलीव न किया जाए।

सवाल‌ जो‌ खड़े है

इस पत्र के बाद बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या तबादला होने के बावजूद आयोग के कार्य में लगे कर्मचारियों को 23 जुलाई तक कार्यमुक्त नहीं किया जाएगा? यदि ऐसा निर्णय लिया जाता है तो इसका असर शिक्षा विभाग सहित अन्य विभागों पर भी पड़ सकता है, जहां शैक्षणिक सत्र के बीच शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को रिलीव करने को लेकर भी स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार रहेगा। इन सबके बीच सवाल यह भी है कि क्या ट्रांसफर सूची जारी होगी? अगर ट्रांसफर सूची आती भी है तो क्या अंडर ट्रांसफर कर्मचारियों को रिलीव नहीं किया जायेगा? और अगर रिलीव नहीं किया गया तो क्या उनकी जगह लगाए गए कर्मचारी भी वेटिंग में ही रहेंगे ? हालांकि,अभी तकबइस संबंध में कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है।

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