चिकित्सकों व लैब संचालकों ने किया करोड़ों का फर्जीवाड़ा

RGHS योजना, चिकित्सक और लैब संचालक गिरफ्तार
चिकित्सकों व लैब संचालकों ने किया करोड़ों का फर्जीवाड़ा

जयपुर / डॉ. चेतन ठठेरा।‌ राजस्थान सरकार की महत्वाकांक्षी राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (‌आरजीएचएस RGHS) में एक बार फिर चिकित्सकों एवं लैब संचालकों द्वारा करोड़ों रुपए का फर्जीवाड़ा करने का खुलासा एसओजी ने करते हुए एक चिकित्सक और लैब संचालक को गिरफ्तार किया है।

एस ओ जी के अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस विशाल बंसल ने बताया कि आरजीएचएस में चिकित्सकों द्वारा मरीजों को बिना देखे अथवा पर्ची रूप से परामर्श पर्चियां में अनावश्यक जांच से लिखी गई जिनके आधार पर लैब संचालकों द्वारा फर्जी रिपोर्ट तैयार कर आरजीएचएस पोर्टल पर अपलोड कर राज्य सरकार से करोड़ों रुपए का भुगतान प्राप्त करने‌ के आशय की एक रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग द्वारा पुलिस थाना एसओजी में देकर प्रकरण संख्या 11/26 दर्ज कराया गया था ।‌ मामले की गंभीरता को देखते हुए महानिरीक्षक एस ओ जी अजय लांबा उपमहानिरीक्षक परेश देशमुख एवं पुलिस अधीक्षक कुंदन कवरिया के सुपरविजन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लोकेंद्र दादरवाल द्वारा विस्तृत रूप से जांच पड़ताल स्वरूप की गई। ‌

एस ओ जी की जांच में स्वास्थ्य विभाग द्वारा सीकर में स्थित बी लाल लैब के संचालक डॉक्टर बनवारी लाल उर्फ बी लाल द्वारा एस के हॉस्पिटल सीकर में पद स्थापित डॉक्टर कमल कुमार अग्रवाल उर्फ के के अग्रवाल (एमएस ऑर्थो एसोसिएट प्रोफेसर) वह अन्य चिकित्सकों के साथ मिलीभगत कर आरजीएचएस योजना के अंतर्गत बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किया है।

ऐसे करते थे फर्जीवाड़ा

1-मरीजों द्वारा सरकारी अस्पताल से परामर्श नहीं लेने के बावजूद फर्जी परामर्श पर्चियां तैयार कर आरजीएचएस पोर्टल पर अपलोड करना।

2- मरीजों को आवश्यकता न होने पर भी बड़ी संख्या में महंगी जांचें (विशेषकर एमआरआई) लिखना।

3-सामान्य एमआरआई करने के बावजूद बिल में अधिक शुल्क वाली “कॉंट्रास्ट एमआरआई” दर्शाकर अधिक भुगतान प्राप्त करना।

4-वास्तविकता में एक ही जांच होने पर कई जाँचे दर्शाकर (5–6 रिपोर्ट अपलोड कर) अतिरिक्त क्लेम उठाना। 6-डॉक्टर की अनुपस्थिति के दिनों में भी फर्जी परामर्श पर्चियां बनाकर जांचें दर्शाना।

7-वास्तविक जांच रिपोर्ट की तिथि बदलकर पोर्टल पर अपलोड कर भुगतान प्राप्त करना।

जांच में सामने आए प्रमुख तथ्य

1-एक प्रकरण में मरीज की एमआरआई रिपोर्ट दिनांक 04.12.2023 की होने के बावजूद उसे 05.12.2023 दर्शाकर सरकारी डॉक्टर की पर्ची के आधार पर आरजीएचएस से भुगतान प्राप्त किया गया, जबकि मरीज उस दिन सीकर आया ही नहीं था।

2-अन्य मामले में मरीज किसी अन्य अस्पताल में भर्ती था, फिर भी फर्जी परामर्श पर्ची बनाकर जांच रिपोर्ट अपलोड कर क्लेम लिया गया। संबंधित दिनांक पर डॉक्टर के.के. अग्रवाल अस्पताल में उपस्थित नहीं थे।

3-कई मामलों में प्राइवेट डॉक्टर के रेफरल को बदलकर सरकारी डॉक्टर के नाम से दर्शाया गया ताकि आरजीएचएस से भुगतान प्राप्त किया जा सके।

4-ऐसे अनेक मामलों का खुलासा हुआ है, जिनमें मरीजों की जानकारी के बिना ही उनके नाम से फर्जी क्लेम उठाए गए।

खुलासा होने पर एसओजी ने इनको किया गिरफ्तार

गिरफ्तार आरोपी

1. डॉ. कमल कुमार अग्रवाल उर्फ के.के. अग्रवाल, पुत्र सीताराम अग्रवाल, उम्र 40 वर्ष, निवासी शिव वाटिका, बेनाड़ रोड, मुरलीपुरा, जयपुर।

2. डॉ. बनवारी लाल उर्फ बी.लाल, पुत्र शंकरलाल, उम्र 65 वर्ष, निवासी कोटड़ी, लोहावास (सीकर), वर्तमान पता बसंत विहार, सीकर

सरकार को करोड़ों का राजस्व नुकसान

इस प्रकार की संगठित धोखाधड़ी से राज्य सरकार को करोड़ों रुपये की वित्तीय हानि हुई है। तथा वास्तविक जरूरतमंद मरीजों को मिलने वाली सुविधाएं प्रभावित हुई हैं और आरजीएचएस जैसी जनकल्याणकारी योजना की विश्वसनीयता को गंभीर आघात पहुंचा है।

और भी चिकित्सकों व कर्मचारियों पर लटकी तलवार

अतिरिक्त महानिदेशक बंसल के अनुसार इस प्रकरण में अन्य डॉक्टरों एवं लैब कर्मचारियों की संलिप्तता की भी गहन जांच की जा रही है। दोषी पाए जाने वाले सभी व्यक्तियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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