महाकाल मंदिर की जमीन को लेकर बड़ा विवाद,भाजपा विधायक पर गंभीर आरोप

जयपुर / डॉ. चेतन ठठेरा। मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर के समीप स्थित जमीन को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। भाजपा विधायक पर सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज जमीन को निजी बात कर करोड रुपए में खरीद फरोख्त करने को इस जमीन पर होटल बनाने तथा जमीन की रजिस्ट्री में लाखों रुपए की स्टांप ड्यूटी में गड़बड़ी करने का आरोप लगा है और इसकी शिकायत लोकायुक्त आर्थिक अपराध पर कास्ट और हाईकोर्ट तक पहुंच गई है।
उज्जैन निवासी कांग्रेस पार्षद राजेंद्र कुमार ने इस मामले को लेकर प्रदेश के मुख्य सचिव लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू से शिकायत की है तथा इसके साथ ही इंदौर हाई कोर्ट में भी जनहित याचिका दायर का पूरा मामले की जांच की मांग की गई है। कुणाल द्वारा की गई शिकायत और याचिका में बताया गया कि विवाद लगभग 45000 वर्ग फीट जमीन से जुड़ा है जिसे 2 मार्च 2026 को उटोपिया वॉटर एंड रिजॉर्ट प्राइवेट लिमिटेड ने 3.80 करोड़ में खरीदा था। कंपनी के निदेशक और साझेदारों में आलोट से भाजपा विधायक चिंतामणि मालवीय और इकबाल सिंह गांधी का नाम सामने आया है।
महाकाल पार्किंग में उपयोग हो रही जमीन
शिकायत के मुताबिक, जिन खसरों की जमीन का सौदा हुआ है, उसका कुछ हिस्सा वर्तमान में महाकाल मंदिर पार्किंग के रूप में उपयोग हो रहा है। आरोप है कि यह भूमि पहले सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज थी, लेकिन बाद में मिलीभगत कर इसे निजी खातों में दर्ज कर दिया गया।
सरकारी जमीन को निजी बनाने का आरोप
शिकायत में दावा किया गया है कि खसरा नंबर 3664/1 और 3666/1 वर्ष 1950 और 1967-68 के राजस्व रिकॉर्ड में शासकीय भूमि के रूप में दर्ज थे। आरोप है कि बाद में रिकॉर्ड में बदलाव कर इन्हें निजी जमीन दिखाया गया।
मामले में यह भी आरोप लगाया गया है कि जमीन को कृषि भूमि बताकर उसकी रजिस्ट्री कराई गई, जबकि उसका उपयोग कमर्शियल गतिविधियों के लिए हो रहा है। शिकायत के अनुसार कलेक्टर गाइडलाइन के मुताबिक जमीन की कीमत 75,400 रुपये प्रति वर्गमीटर थी, लेकिन रजिस्ट्री में इसे सिर्फ 22,500 रुपये प्रति वर्गमीटर दर्शाया गया।
सरकार को करोड़ों का नुकसान
दस्तावेजों के आधार पर शिकायत में दावा किया गया है कि 4180 वर्गमीटर जमीन की वास्तविक कीमत करीब 31.51 करोड़ रुपये थी। इसके हिसाब से लगभग 2.99 करोड़ रुपये स्टांप शुल्क और 94.55 लाख रुपये पंजीयन शुल्क बनना था। लेकिन आरोप है कि केवल 40.36 लाख रुपये स्टांप शुल्क और 12.90 लाख रुपये पंजीयन शुल्क जमा कराया गया, जिससे सरकार को करीब 3.40 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।शिकायत में यह भी कहा गया है कि जमीन पर पहले से मैरिज गार्डन और अन्य निर्माण मौजूद थे, लेकिन दस्तावेजों में केवल टिन शेड दिखाकर टैक्स कम जमा कराया गया।
इनकी जुबानी
महाकालेश्वर मंदिर कि हरि फाटक और कल्प क्षेत्र की पार्किंग नगर निगम के अधीन है। जमीन के उपयोग और स्वामित्व की विस्तृत जानकारी नगर निगम से ली जा सकती है।
प्रथम कौशिक
महाकालेश्वर मंदिर प्रशासक प्रथम
सभी आरोप निराधार और द्वेषपूर्ण है। जमीन की रजिस्ट्री सभी वैध दस्तावेजों के आधार पर हुई है और सभी स्टांप व पंजीयन शुल्क नियमों के अनुसार जमा किए गए हैं।
चिंतामणि मालवीय
भाजपा विधायक विधानसभा आलोट
फिलहाल मामला प्रशासनिक और कानूनी जांच के दायरे में आ गया है। शिकायत के बाद अब पुलिस और जांच एजेंसियों की भूमिका पर भी नजर बनी हुई है। दूसरी इस मामले को लेकर आमजन चर्चाओं का दौर जारी है।
