भीलवाड़ा डीएमएफटी में आयु पार कार्मिक कर रहे हैं काम ,पीडब्ल्यूडी के घूस कांड में संलिप्त कोषाधिकारी टीना रुलानिया से इन दोनों कार्मिकों के जुड़े तार ?

टीना रुलानिया से इन दोनों कार्मिकों के जुड़े तार ? 
भीलवाड़ा डीएमएफटी में आयु पार कार्मिक कर रहे हैं काम ,पीडब्ल्यूडी के घूस कांड में संलिप्त कोषाधिकारी टीना रुलानिया से इन दोनों कार्मिकों के जुड़े तार ?

भीलवाड़ा /डॉ. चेतन ठठेरा। डिस्टिक मिनिरल फंड ट्रस्ट (डीएमएफटी) मैं कलेक्टर सांसद और विधायकों को अंधेरे में रखकर सेवानिवृत्ति के बाद निर्धारित आयु सीमा 65 साल पार कर चुके दो कार्मिकों को भी नौकरी पर संविदा कार्मिक के रूप में रखा हुआ है और आश्चर्य की बात है कि उन्हें पदनाम बदलकर कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर रखा है और आश्चर्य चकित बात चौंकाने वाली है कि जिनको कंप्यूटर ऑपरेटर पदनाम पर रखा है उन्हें कंप्यूटर आता ही नहीं और यह दोनों ही कार्मिक पीडब्ल्यूडी अर्थात सार्वजनिक निर्माण विभाग की महत्वपूर्ण फाइलें हैंडल करते हैं।

राजस्थान में भीलवाड़ा डिस्टिक मिनिरल फंड ट्रस्ट प्रदेश में अन्य जिलों से काफी संपन्न है। एक अनुमान के अनुसार करीब 1000 करोड़ से अधिक का फंड जिले के खनन क्षेत्र से प्राप्त होता है। इस ट्रस्ट में तकनीकी अधिकारियों को छोड़कर अन्य कार्मिकों को नियुक्तियां जो राजकीय सेवा से सेवानिवृत हो चुके हैं अर्थात सेवानिवृत्त कार्मिकों को दी जाती है। यहां पर सविता के रूप में लगे कार्मिकों में बालमुकुंद सुथार कनिष्ठ सहायक के पद पर 22.12.2022 को लगे थे तथा इनकी आयु दिसंबर 2024 में 65 वर्ष पूर्ण हो चुकी है परंतु फिर भी वर्तमान में कार्य कर रहे हैं यही नहीं इनके पास पीडब्ल्यूडी अर्थात सार्वजनिक निर्माण विभाग से संबंधित महत्वपूर्ण पत्रावलियां इनके हस्तलिखित हाथों से नोटिंग हो रही है। यह 65 वर्ष पूर्ण करने के बाद भी वर्तमान में कनिष्ठ सहायक की जगह पदनाम बदलकर कंप्यूटर ऑपरेटर के पदनाम से कार्य कर रहे हैं। जबकि बताया जाता है कि इनको कंप्यूटर की एबीसीडी का भी ज्ञान नहीं है।

इसी तरह कैलाश चंद्र बाहेती 3 11 2022 को कनिष्ठ सहायक के पद पर सेवानिवृत्त के पश्चात संविदा पर लगे थे और और इनकी आयु को मार्च 2025 में ही 65 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं। और यह वर्तमान में कनिष्ठ सहायक के पद की जगह कंप्यूटर ऑपरेटर के पद नाम से काम कर रहे हैं और विभाग की महत्वपूर्ण पत्रावलियों का निस्तारण स्वयं करते हैं। जबकि आश्चर्य की बात है कि ट्रस्ट के ऑफिस में एक कंप्यूटर ऑपरेटर पहले से ही नियुक्त है।

 

सवाल जो कार्मिक सुथार और बाहेती को संदेह के दायरे में खड़ा करते हैं

 

बालमुकुंद सुथार और कैलाश बाहेती संविदा कार्मिक के रूप में कनिष्ठ सहायक के पद पर लगे थे तब इनका वेतन पहले 13000 था तो फिर एक अप्रैल 2023 से सरकार के आदेशों से इनका वेतन 26100 रुपए हो गया था। ‌ वर्तमान में यह दोनों कार्मिक चित्तौड़गढ़ की काम कंप्लेंटमेंट एजेंसी ( प्लेसमेंट एजेंसी) के माध्यम से कंप्यूटर ऑपरेटर के पद नाम से कार्य करें और इनका वेतन अब ₹9000 प्रति माह है। सवाल यह है कि जो कार्मिक 26100 का मासिक वेतन ले रहे थे वह अब ₹9000 महीने में कैसे काम कर रहे हैं ? आखिर क्या लालच है ? क्या ऊपर की कमाई..?

 

कोषाधिकारी टीना रूलानिया

से जुड़े हैं तार

 

बताया जाता है कि बालमुकुंद सुथार और कैलाश बाहेती दोनों ही कार्मिक डीएमएफटी की आहरण अधिकारी एवं जिला कोषाधिकारी टीना रूलानिया के बहुत करीब और विश्वासपात्र है इसीलिए इन दोनों को नियमों का उल्लंघन होने के बाद भी नहीं हटाया गया । टीना रूलानिया की सिफारिश पर ही प्लेसमेंट एजेंसी ने इन्हीं दोनों कार्मिकों को कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में रख लिया ऐसा बताया जाता है। हाल ही में पीडब्ल्यूडी अर्थात सार्वजनिक निर्माण विभाग के अभियंता की रिश्वत कांड में गिरफ्तारी होने इसी कांड में ठेकेदारों की भी गिरफ्तारी के बाद ठेकेदारों के बयानों के आधार पर उक्त रिश्वत राशि में करीब डेढ़ लाख रुपए की राशि कोषाधिकारी अधिकारी टीना रुलानिया को भी देने की बात सामने आने और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की एफआईआर में टीना का नाम आया है। ऐसी स्थिति में बालमुकुंद सुथार और कैलाश बाहेती के तार भी इस कांड से जुड़े हो सकते हैं? अगर पूरी परतें खोली जाए तो ? क्योंकि दोनों ही पीडब्ल्यूडी की महत्वपूर्ण पत्रावलियों की नोटिंग और निस्तारण यही करते हैं और सीधा टीना रुलानिया से संवाद भी इनका होता ?

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