अंतरराष्ट्रीय नारकोटिक सिंडिकेट ने एसपी ऑफिस में ही लगा दी सेंध

एसपी ऑफिस में कॉल डिटेल रिकॉर्ड सेल में लगा हवलदार तस्करों का निकला मददगार ?
अंतरराष्ट्रीय नारकोटिक सिंडिकेट ने एसपी ऑफिस में ही लगा दी सेंध

जयपुर / डॉ. चेतन ठठेरा। अंतर्राष्ट्रीय नारकोटिक्स सिंडिकेट ने सभी सुरक्षा एजेंसियों को धत्ता बताते हुए श्री गंगानगर पुलिस अधीक्षक कार्यालय में ही सेंध लगा दी और कार्यालय के कॉल डिटेल रिकॉर्ड सेल में तैनात हेड कांस्टेबल को ही अपने साथ मिलाकर अपना मददगार बना मादक पदार्थों की तस्करी को बेख़ौफ़ होकर अंजाम दे रहे थे।‌

हेड कांस्टेबल द्वारा अंतरराष्ट्रीय तस्कर गिरोह को बचाने के लिए अपने विभाग के पुलिस अधिकारियों को गुमराह करने की पुष्टि तो गंगानगर पुलिस अधीक्षक ने की है लेकिन हेड कांस्टेबल के तस्करों का मददगार बने की पुष्टि नहीं की लेकिन जांच में से संकेत मिले हैं।

विदित है कि 26 मार्च को रावला थाना क्षेत्र के चक 7-8 एसकेएम की रोही में पाकिस्तानी तस्करों द्वारा ड्रोन से डाली गई 10 किलो 830 ग्राम हेरोइन की बड़ी खेप पकड़ी गई थी।

जिला पुलिस अधीक्षक श्रीगंगानगर ने इस ऑपरेशन में जिला पुलिस और सीआईडी (आईबी) की संयुक्त टीम ने हरमेश निवासी धनूर, रणजीतसिंह निवासी चक 2-केएनडी, सोनूसिंह, गुरप्रीतसिंह और कीर्तनसिंह निवासी हजारा रामसिंहवाला, जिला फाजिल्का, पंजाब को गिरफ्तार किया था। टीम ने आरोपियों के पास से 20 पैकेट बरामद हुए जिनमें कुल 10 किलो 830 ग्राम हेरोइन थी। इस मामले की जांच सूरतगढ़ सिटी थाना प्रभारी दिनेश सहारण को सौंपी गई।

हवलदार ने टीम को भटकाया

जांच में पता चला कि उक्त ऑपरेशन की पुलिस की समीक्षा में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। 26 मार्च को जब ऑपरेशन चल रहा था, तब रावला क्षेत्र में तैनात एक पुलिस टीम महत्वपूर्ण टास्क पर काम कर रही थी और वह सीडीआर सेल से फोन लोकेशन व कॉल डिटेल्स की जानकारी ले रही थी। लेकिन सीडीआर सेल में तनात हवलदार मंगतराम ने टीम को गलत सूचनाएं देकर भटकाने की कोशिश की, जिससे तस्करों को भागने में मदद मिल सकती थी।

जांच में बड़ा खुलासा

हवलदार मंगतराम न केवल टीम को गुमराह कर रहा था, बल्कि वह गिरफ्तार किए गए तस्करों में से एक के सीधे संपर्क में भी था। मोबाइल फोन के कॉल रिकॉर्ड्स से इसकी पुष्टि हुई। करीब 35 दिनों की गहन जांच पड़ताल के बाद हवलदार मंगतराम को लगभग 10 दिन पहले निलंबित कर दिया गया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आरपीएस रघुवीर शर्मा को इसकी जांच सौंपी गई है।

दिमाग के लिए शर्म और चिंतनीय विषय

राजस्थान पुलिस के लिए शर्म व गंभीर चिंता का विषय बन गया है। एक तरफ बीएसएफ, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, पुलिस, एसओजी, एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स, एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स और विभिन्न खुफिया एजेंसियां पाकिस्तानी ड्रोन तस्करी के नेटवर्क को तोड़ने में दिन-रात मेहनत कर रही हैं, दूसरी और अंतरराष्ट्रीय नारकोटिक्स सिंडिकेट ने श्रीगंगानगर में पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सीडीआर सेल तक अपनी पहुंच बना ली।

पूना में गिरफ्तार तस्करों ने खुलासा किया कि वे पहले भी रावला इलाके से हेरोइन की कई खेपें सफलतापूर्वक पंजाब पहुंचा चुके थे। अब पुलिस यह भी जांच कर रही है कि हवलदार मंगतराम अन्य तस्करों के सिंडिकेट से भी जुड़ा था या नहीं ? अगर और संबंध सामने आए तो मामला और भी संगीन हो जाएगा? जिला पुलिस के उच्च सूत्रों के अनुसार हवलदार मंगतराम को नौकरी से बर्खास्त किए जाने की प्रबल संभावना है ? यदि जांच में उसके और गहरे संबंध साबित होते हैं तो एनडीपीएस एक्ट या अन्य धाराओं में गिरफ्तारी भी हो सकती है ?

इनकी जुबानी

सीडीआर सेल के हवलदार मंगतराम ने 10 किलो से अधिक हेरोइन की खेप वाले मामले में रावला क्षेत्र की टीम को गुमराह करने की कोशिश की। बाद में पता चला कि वह पकड़े गए आरोपियों में से एक के संपर्क में भी था। इसलिए उसे निलंबित कर जांच अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आरपी शर्मा को सौंपी गई है। जांच रिपोर्ट आने पर और सख्त कार्रवाई की जाएगी।

 

हरिशंकर यादव 

पुलिस अधीक्षक श्रीगंगानगर राजस्थान

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