CBI के संयुक्त निदेशक व पूर्व ACP को कोर्ट ने दिया दोषी करार

जयपुर/ डॉ. चेतन ठठेरा। 30000 स्थित न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में परिवर्तन निदेशालय के पूर्व उपनिदेशक(IRS अधिकारी ) के आवास पर 26 साल पहले साजिश के तहत छापा मार कर उन्हें गिरफ्तार करने के मामले में सीबीआई के संयुक्त निदेशक रमनीश और दिल्ली पुलिस की पूर्व एसीपी वीके पांडेय को दोषी करार दिया है।
न्यायिक मजिस्ट्रेट शशांक नंदन भट्ट ने अपने फैसले में एड़ी के तत्काल उपनिदेशक अशोक कुमार अग्रवाल के यहां वर्ष 2000 में की गई छापेमारी को दुर्भावनापूर्ण और साजिश का हिस्सा बताया। कोर्ट ने यह भी माना कि आरोपितों ने बिना किसी वैध कारण के शिकायतकर्ता के दिल्ली स्थित घर का दरवाजा तोड़ा, जो आपराधिक अतिक्रमण और नुकसान पहुंचाने का स्पष्ट मामला है।
इन धाराओं में माना दोषी
अदालत ने दोनों को आइपीसी की धाराओं 323 (मारपीट), 427(नुकसान पहुंचाने), 448 (आपराधिक अतिक्रमण) और 34 (साझा मंशा) के तहत दोषी ठहराया। इन धाराओं में अधिकतम दो साल की सजा का प्रावधान है। कोर्ट ने फिलहाल सजा की तिथि तय नहीं की है।
कोर्ट ने क्या कहा फैसले में
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपितों ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया और उनकी कार्रवाई सरकारी कर्तव्य के दायरे में नहीं आती, इसलिए उन्हें कानूनी संरक्षण भी नहीं मिल सकता। यह भी सामने आया कि शिकायतकर्ता के साथ हिरासत में मारपीट की गई। उन्हें कमरे से घसीटकर सीढ़ियों पर धक्का दिया गया, जिससे उनकी बांह में चोट आई। यह तथ्य मेडिकल रिपोर्ट और गवाहों के बयानों से साबित हुआ। कोर्ट ने इस पूरी कार्रवाई को एक साजिश बताते हुए कहा कि 18 अक्टूबर 2000 को एक गुप्त बैठक में अगले दिन छापा मारने और गिरफ्तारी का फैसला लिया गया।
यह था मामला
मामला 1985 बैच के आईआरएस अधिकारी अशोक कुमार अग्रवाल से जुड़ा है, जो उस समय प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) में उप निदेशक के पद पर तैनात थे। अदालत ने पाया कि 19 अक्टूबर 2000 को की गई कार्रवाई का मकसद कैट के उस आदेश को निष्प्रभावी करना था, जिसमें उनके निलंबन की समीक्षा का निर्देश दिया गया था।
अदालत ने बचाव पक्ष की दलीलों को विरोधाभासी बताते हुए खारिज कर दिया। साथ ही यह भी कहा कि जिन मामलों में शिकायतकर्ता की जांच हो रही थी, उनमें उसे बाद में आरोपमुक्त कर दिया गया, जिससे उसकी स्थिति और मजबूत होती है। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आरोपितों की कार्रवाई कानून द्वारा प्रदत्त शक्तियों का घोर उल्लंघन थी और इसे कैट के आदेश को निष्प्रभावी करने के उद्देश्य से अंजाम दिया गया।
