पूर्व मंत्री रामलाल जाट के सामने चुनौती

जयपुर / डॉ. चेतन ठठेरा। भीलवाड़ा। नगर निकायों के चुनाव को लेकर सरगर्मियां शुरू हो चुकी है और राजनीतिक बिसात बिछने भी लगी है। यह चुनाव कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री रामलाल जाट के लिए एक चुनौती है वहीं दूसरी ओर भाजपा सांसद दामोदर अग्रवाल और भाजपा विधायकों की मूंछ का सवाल है इसे यूं कहे तो अतिशयोक्ति नहीं होगी कि सांसद और भाजपा विधायकों की साख दांव पर लगी है।
जिले में पूर्व में भीलवाड़ा नगर परिषद सहित 7 नगर पालिकाएं थी। सरकार द्वारा जिले की चार पंचायतों को नगर पालिका बनाने के बाद अब जिले में भीलवाड़ा नगर निगम सहित कुल 11 नगर पालिकाएं है। अर्थात भीलवाड़ा नगर निगम के अलावा 10 नगर पालिकाएं है।
वर्तमान में जिले की निकायों की स्थिति इस प्रकार है
भीलवाड़ा नगर निगम – भाजपा
आसींद नगर पालिका- भाजपा
गुलाबपुरा नगर पालिका – कांग्रेस
गंगापुर नगर पालिका – कांग्रेस
मांडलगढ़ नगर पालिका -भाजपा
शाहपुरा नगर पालिका -भाजपा
जहाजपुर नगरपालिका- भाजपा
बिजोलिया नवनिर्मित नगर पालिका- भाजपा
हमीरगढ़ नवनिर्मित नगर पालिका- भाजपा
बीगोद नवनिर्मित नगर पालिका- कांग्रेस
बनेडा नवनिर्मित नगर पालिका- भाजपा
निवर्तमान दौर में जिले में नगर निगम सहित 8 नगर पालिकाओं में भाजपा का बोर्ड रहा और 3 पालिकाओं में कांग्रेस का बोर्ड रहा। इन सभी में अब चुनाव होने जा रहे हैं।
राजनीतिक स्थिति
कांग्रेस में पहली बार ग्रामीण जिला अध्यक्ष पद सृजित करते हुए कांग्रेस ने इस पद पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री रामलाल जाट को देहात अध्यक्ष बनाया और शहरी क्षेत्र को अलग करते हुए शहर के जिला अध्यक्ष पद पर शिवराम खटीक (जीपी) को धीरज गुर्जर गुट से अध्यक्ष पद पर मनोनीत किया था। लेकिन जिले में कांग्रेस की हालात यह है कि शहर की कांग्रेस भी रामलाल जाट के साथ ही है और शहर में कांग्रेस की स्थिति बड़ी दयनीय है। अब शहरी क्षेत्र में नगर निगम को छोड़कर 10 नगर पालिकाओं में से 7 नगर पालिकाओं में वर्तमान में भाजपा का बोर्ड था
और इन नगर पालिका के विधानसभा क्षेत्र में भी भाजपा के ही विधायक है। ऐसी स्थिति में देहात जिला अध्यक्ष पद पर रहते हुए रामलाल जाट के सामने इन नगर 7 पालिकाओं में कांग्रेस का बोर्ड बनाना और तीन नगर पालिका में जो कांग्रेस का बोर्ड था उस बोर्ड को वापस रिपीट करना अर्थात बरकरार रखना रामलाल जाट के लिए चुनौती होगी।
दूसरी और भाजपा और भाजपा सांसद भाजपा विधायकों के लिए ग्रामीण क्षेत्र के सभी साथ नगर पालिकाओं में भाजपा के बोर्ड को वापस रिपीट करना और तीन पालिकाओं में जो कांग्रेस का बोर्ड उस बोर्ड को कांग्रेस से छीन कर भाजपा की झोली में डालना बड़ा टास्क होगा और इस टास्क पर सांसद और विधायकों की साख दांव पर होगी।
शहर में सांसद अग्रवाल की साख दांव पर
भीलवाड़ा सांसद दामोदर अग्रवाल की निकाय चुनाव में विशेष कर भीलवाड़ा शहरी क्षेत्र में अधिक जिम्मेदारी है और सब की निगाहें भी अग्रवाल पर टिकी है क्योंकि विधानसभा चुनाव में क्या हुआ यह सब जानते हैं लेकिन उसे समय अग्रवाल सांसद नहीं चुने गए थे और उन्होंने चुनाव में क्या भूमिका निभाई किसके साथ भूमिका रही यह सब राजनीतिक क्षेत्र में भी जानते हैं और आम जनता भी जानती है परंतु अब अग्रवाल सांसद है और सांसद होने के साथ संगठन और प्रधानमंत्री मोदी ने उन पर भरोसा जताते हुए उनको कई जिम्मेदारियां सौंपी है इस नाते उनकी जिम्मेदारी और अधिक हो गई है।
