विधायक कोठारी का RSS और व्यापारियों के नाम पर सियासी दांव
भीलवाड़ा। निकाय चुनाव 2026 से पहले भीलवाड़ा की सियासत में निर्दलीय विधायक अशोक कोठारी की रणनीति को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। कोठारी पर आरोप लग रहे हैं कि वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के विचार परिवार और व्यापारियों के नाम का इस्तेमाल कर अपने राजनीतिक प्रभाव को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। जबकि विधानसभा चुनाव की स्थितियों में और अभी की स्थितियों में काफी अंतर है। इन निकाय चुनाव में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अर्थात विचार परिवार और व्यापारियों की भूमिका विधानसभा चुनाव की तरह नहीं रहेगी।
RSS विचार परिवार और व्यापारियों ने खींचे हाथ!
राजनीतिक चर्चाओं के मुताबिक, कोठारी की इस रणनीति से RSS (विचार परिवार) से जुड़े कई लोगों और व्यापारिक वर्ग के एक बड़े हिस्से ने दूरी बनानी शुरू कर दी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जिन वर्गों के समर्थन को अपनी ताकत बताकर विधानसभा चुनाव की तर्ज पर कोठारी आगे बढ़ रहे थे, क्या अब वही वर्ग उनसे किनारा कर रहे हैं?
RSS व व्यापारी चुनाव चिन्ह का साथ देंगे
अब उस वर्ग ने और RSS( विचार परिवार ) द्वारा अपनी बैठकों में स्पष्ट कर दिया गया है की विधानसभा चुनाव की पुनरावृत्ती नहीं होगी। संघ के ही एक वरिष्ठ पदाधिकारियों वह कुछ व्यापारियों ने नाम नहीं छापने के शर्त पर बताया कि हमने स्पष्ट कर दिया है कि जो स्थितियां पिछले विधानसभा चुनाव में हुई थी उसका कारण कुछ और था लेकिन अब इसकी पुनरावृत्ती नहीं होगी संघ अर्थात विचार परिवार एवं व्यापारी चुनाव चिन्ह के साथ होगा।
अपने इर्द-गिर्द घूमने वालों को टिकट दिलाने का दबाव?
निकाय चुनाव में टिकट वितरण को लेकर भी निर्दलीय विधायक कोठारी की सक्रियता चर्चा में है। आरोप है कि विधायक कोठारी अपने करीबी और लगातार उनके इर्द-गिर्द रहने वाले लोगों को टिकट दिलाने के लिए संगठन पर दबाव बनाने की राजनीति कर रहे हैं। 23 अगस्त को कार्यकर्ता सम्मेलन और 33 महीने की उपलब्धि बनाने के नाम पर किया गया कार्यक्रम शक्ति प्रदर्शन के तौर पर माना जा रहा है और इसके पीछे का गणित यही है कि शहर के 70 वार्ड में से 15 से 20 वार्डों में पार्षद के लिए टिकट उनके चाहते समर्थकों को दिए जाएं साफ छवि केवल एक जुल्मा है या दिखावा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
सांसद अग्रवाल की भूमिका पर सस्पेंस
पूरे घटनाक्रम में सांसद दामोदर अग्रवाल की भूमिका भी फिलहाल स्पष्ट नजर नहीं आ रही है। क्या सांसद संगठन के फैसले के साथ खड़े होंगे या टिकट वितरण को लेकर विधायक कोठारी की रणनीति से अलग रुख अपनाएंगे इस पर राजनीतिक निगाहें टिकी हुई हैं पिछले विधानसभा चुनाव में सांसद अग्रवाल उसे समय सांसद नहीं बने थे केवल भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महामंत्री थे उसे समय उनकी भूमिका क्या थी यह राजनीतिक गलियारे और शहर में सर्व विदित है।
सवाल खड़े कर दिए
निकाय चुनाव से पहले सामने आ रहे इन घटनाक्रमों ने भाजपा के भीतर संभावित खींचतान और टिकट वितरण की रणनीति को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि कोठारी का सियासी दांव कितना सफल होता है और संगठन टिकट वितरण में किसकी पसंद को प्राथमिकता देता है।
