निर्दलीय विधायक कोठारी और भाजपा में टकराव

जयपुर / डॉ. चेतन ठठेरा। भीलवाड़ा। निकाय चुनाव का बिल्कुल बचने के साथ ही भीलवाड़ा नगर निगम के चुनाव को लेकर शहर में राजनीति सर गर्मियां मियां तेज हो गई है। महापौर का पद अनारक्षित महिला के लिए तय होने के बाद चुनावी विषाद पर कई ऐसे नए चेहरे भी सामने आ रहे हैं जो अब तक चर्चा से दूर थे। अंदर खाने दल बदल का दौर भी शुरू हो गया है। चुनावी मैदान में ताल ठोकने के लिए टिकट पाने के लिए भाग दौड़ शुरू हो गई है।
इस बार भीलवाड़ा नगर निगम का चुनाव बड़ा रोचक होने वाला है और इस चुनाव मैं इस बार शहर में कांग्रेस से भाजपा बिल्कुल निश्चित है लेकिन विधानसभा चुनाव में भाजपा के बागियों और संघ की बैसाखी के सहारे निर्दलीय रूप से विधायक बनने वाले शहर विधायक अशोक कोठारी और भाजपा में टकराव की स्थिति बनी हुई है।
आरएसएस और व्यापारियों ने कोठारी से किया किनारा
इस बार चुनावी रण में विधायक कोठारी के साथ वैचारिक दल (संघ) और व्यापारिक वर्ग जिन्होंने विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी विट्ठल शंकर अवस्थी के खिलाफ ताल ठोकते हुए कोठारी को सहयोग करते हुए उन्हें विधायक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी वही वैचारिक दल अर्थात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और वह व्यापारिक वर्ग के लोगों की दूरी साफ नजर आ रही है।
कोठारी से किनारा क्यों
अंदरखाने चर्चा है कि पिछले ढाई साल में विधायक ने उनकी सुध नहीं ली। वहीं, विधायक का तर्क है कि कोई उनके पास आता ही नहीं है। तो वे क्या करें। राजनीतिक गलियारों में इस पर चुटकियां ली जा रही हैं कि यहाँ प्यासा कह रहा है कि कुआं मेरे पास नहीं आ रहा है, जबकि नियम यही है कि प्यासे को कुएं के पास जाना पड़ता है। इसके अलावा आरएसएस और उन व्यापारिक वर्ग का कहना है कि विधानसभा चुनाव में भाजपा से हमारी कोई लड़ाई नहीं थी वह तो केवल बिठा शंकर अवस्थी को टिकट नहीं मिले इसको लेकर खींचातान थी भाजपा ने विट्ठल शंकर अवस्थी को टिकट दे दिया इसलिए हमने कोठारी को समर्थन दे दिया था। आरएसएस और व्यापारी वर्ग का यह मंतव्य स्पष्ट करता है कि अब यह वर्ग और आरएसएस इस चुनाव में कोठारी का साथ नहीं देंगे ?
कांग्रेस वेंटीलेटर पर, क्यों
शहर में पिछले दो दशक से लगातार कांग्रेस नगर परिषद के चुनाव से लेकर लोकसभा के चुनाव तक पिछड़ती जा रही है हालांकि पिछले अब तक के चुनाव तक तो कांग्रेस की स्थिति फिर भी सम्मानजनक थी लेकिन इस बार भीलवाड़ा नगर निगम के चुनाव में सन 2015 की पुनरावृत्ति होने के संभावनाएं प्रबल है। उस समय कांग्रेस के केवल 7 से 8 पार्षद ही जीत दर्ज कर सदन में पहुंचे थे और अब इस बार भी यही स्थिति है और इस स्थिति का कारण कांग्रेस में जबरदस्त गुटबाजी हावी है और कांग्रेस शहर अध्यक्ष पद पर धीरज गुर्जर के गुट से शिवराम खटीक की जिला अध्यक्ष पद पर ताजपोशी कांग्रेस के पतन का एक कारण है ? जो पिछले समय से स्पष्ट देखा जा रहा है की कांग्रेस देहात के जिला अध्यक्ष पूर्व मंत्री रामलाल जाट के साथ ग्रामीण क्षेत्र के नेताओं के साथ-साथ शहर के दिग्गज नेता भी रामलाल जाट के साथ ही है और इसे सीधे सरल शब्दों में कहे तो अतिशयोक्ति नहीं होगी की पूरी कांग्रेस रामलाल जाट के साथ है चुनिंदा लोगों को छोड़कर।
निर्दलीय विधायक कोठारी का शक्ति प्रदर्शन 23 को
निर्दलीय विधायक अशोक कोठारी 23 अगस्त को शहर के हरिसेवाधाम प्रांगण में कार्यकर्ताओं और दिव्यांगों की एक बैठक के नाम पर सम्मेलन और इसे यूं कहे तो अतिशयोक्ति नहीं होगी कि यह शक्ति प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। इस शक्ति प्रदर्शन के बाद तस्वीर साफ हो जाएगी की कोठारी कितने गहरे पानी में है और उनका कौन-कौन साथ दे रहा है। भाजपा को भी स्थिति क्लियर हो जाएगी कि कौन पार्टी से बगावत करके कोठारी के साथ है और कौन भाजपा के साथ है। विदित है कि निर्दलीय विधायक अशोक कोठारी पिछले दो-तीन महीने से भाजपा से किनारा किए हुए नजर आ रहे हैं। हालांकि भाजपा ने कोठारी को ढाई साल से अधिक बीत जाने के बाद भी पार्टी का प्राथमिक सदस्य तक नहीं बनने दिया।
टिकटों की खींचतान और सामने आए शहर के मुद्दे
राजनीतिक हलकों में खासी चर्चा है कि टिकट वितरण और शहर की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए युवाओं व सक्रिय कार्यकर्ताओं को टिकट दिया जाएगा। इसे लेकर नेताओं में टिकट लेने वालों की होड़ मची है। समर्थक वैचारिक दल 15-20 टिकटों की मांग कर रहे हैं, लेकिन भाजपा संगठन चाहता है कि दावेदार सीधे उनके माध्यम से आएं। राजनीति में करीब 25 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जो दोनों खेमों विधायक और भाजपा संगठन में अपनी जगह बनाए हुए हैं, जबकि कुछ केवल मौके की तलाश में हैं। उधर चुनावी मौसम में जनसमस्याएं भी हावी हैं। रेलवे फाटक की तरफ जाने वाले मुरली विलास रोड पर पेट्रोल पंप के सामने पड़े बड़े गड्ढे और क्षतिग्रस्त सड़कों को लेकर जनता और निगम के बीच का असंतोष भी चर्चा का मुख्य विषय बन गया है।
पूर्व महिला सभापति फिर से मैदान में
महापौर सीट अनारक्षित महिला के खाते में जाने के बाद पूर्व में चेयरमैन रह चुकीं भाजपा नेत्री ललिता समदानी चुनाव की घोषणा के साथ ही पूरी तरह सक्रिय हो गई हैं। विदित है कि भीलवाड़ा के इस निकाय की कमान अब तक मधु जाजू, ललिता समदानी, मंजू पोखरना, आरती त्रिपाठी मंजू चेचानी और दीपिका कंवर जैसी महिला नेत्रियां संभाल चुकी हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि इस बार निगम की चाबी किसके हाथ लगती है।
