एक इस्तीफे ने शिक्षा विभाग के कार्य प्रणाली पर खड़े कर दिए गंभीर सवाल

बेसिक कंप्यूटर अनुदेशक ने विभाग और सरकार को सोचने पर कर दिया मजबूर
एक इस्तीफे ने शिक्षा विभाग के कार्य प्रणाली पर खड़े कर दिए गंभीर सवाल

जयपुर/ डॉ. चेतन ठठेरा। प्रदेश में सरकारी स्कूलों के शिक्षक का मूल कर्तव्य विद्यार्थियों को शिक्षा देना और विभाग की योजनाओं को क्रियान्वित करना है लेकिन विडंबना है कि प्रदेश में शिक्षकों को अपने मूल दायित्व को निधन करने के बजाय अन्य दायित्वों पर जा रहे हैं। सरकार और विभाग की इसी हद्धार्मिता और कार्य प्रणाली से परेशान होकर एक नवनियुक्त कंप्यूटर अनुदेशक ने आज के इस दौर में जब युवा सरकारी नौकरी की चाहत में भटक रहा और परेशान हो रहा है ऐसी स्थिति में आज एक नवनियुक्त कंप्यूटर अनुदेशक युवा ने लगी हुई नौकरी से इस्तीफा देकर सबको चौंका ही नहीं दिया बल्कि शिक्षा विभाग की कार्य प्रणाली और सरकार की हद्धार्मिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं और सबको सोचने पर मजबूर कर दिया है।

 

यह मामला राजस्थान के सिरोही जिले के रेवदर उपखंड में स्थित महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय अंग्रेजी माध्यम का है। ‌ इस विद्यालय में कार्यरत बेसिक कंप्यूटर अनुदेशक मुकेश ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका यह मार्मिक त्याग-पत्र अब शिक्षा जगत में चर्चा का विषय बन गया है।

 

इस्तीफे में यह दर्द किया बयां

 

कंप्यूटर अनुदेशक मुकेश ने विद्यालय के प्रिंसिपल को दिए अपने इस्तीफे में शिक्षक मुकेश ने दर्द बयां करते हुए लिखा है कि उनकी नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को कंप्यूटर साइंस, प्रोग्रामिंग और आधुनिक तकनीकी ज्ञान देना था, लेकिन इसके विपरीत उनसे निर्वाचन, जनगणना, किसान कैंप, मोबाइल वितरण और विभिन्न सरकारी योजनाओं के गैर-शिक्षण कार्य (डेटा एंट्री) करवाए जा रहे थे। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में लिखा कि यदि कंप्यूटर शिक्षकों की सेवाओं का उपयोग केवल कंप्यूटर ऑपरेटर या अन्य प्रशासनिक कामों के लिए ही किया जाना है, तो वे इस व्यवस्था में अपनी सेवाएँ जारी नहीं रखना चाहते।‌ कंप्यूटर अनुदेशक मुकेश का इस्तीफा पत्र सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है हालांकि हम इस वायरल पत्र की पुष्टि नहीं करते हैं।

 

 

सरकारी स्कूलों की स्थिति खराब शिक्षक परेशान

 

आज यह वास्तविकता में सत्य है की सरकार की सभी योजनाओं में शिक्षा विभाग की योजनाओं के अलावा और चुनाव में जनगणना में सर्वे में आदि कार्यों में शिक्षकों और शिक्षा विभाग के कार्मिकों की ड्युटीया लगा दी जाती है।‌ और ऐसी स्थिति में विद्यालयों में शिक्षकों की कमी होने से कारण अध्ययन प्रभावित होता है तथा अन्य कार्मिकों की कमी से स्कूल के और विभाग के कार्य प्रभावित होते हैं। अन्य कार्य में ड्युटिया लगने से शिक्षक और कार्मिक भी काफी परेशान है लेकिन वह इसका विरोध करने में असक्षम है। विदित है कि न्यायपालिका ने भी एक आदेश में स्पष्ट किया है कि सरकारी शिक्षकों की अन्य कार्यों में ड्यूटी नहीं लगाई जाए लेकिन इसकी पालना कहीं नहीं हो रही है।

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