फर्जी बिलों से करोड़ों की इनपुट टैक्स की चोरी पकड़ी

जयपुर / डॉ. चेतन ठठेरा। वाणिज्यिक कर विभाग द्वारा फर्जी बिलों के आधार पर इनपुट बता कर करोड़ों का क्रेडिट लेकर सरकार के राजकोष को चूना लगाने वाले व्यापारी के खिलाफ अभियान चला रखा है और इसी कड़ी में वाणिज्य कर विभाग टीम में जयपुर की एक फर्म पर छापा मार कर की गई जांच पड़ताल में इस तरह करोड़ों रुपए की क्रेडिट चोरी का खुलासा हुआ है।
वाणिज्यिक कर विभाग की एनफोर्समेंट विंग-III, सर्किल-ए की टीम द्वारा मानसरोवर विस्तार स्थित केसर नगर क्षेत्र में संचालित मैसर्स नव्यता पर सर्वे कार्रवाई की गई। विभाग की डेटा एनालिटिक्स एवं जोखिम विश्लेषण प्रणाली से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर की गई इस कार्रवाई में प्रारंभिक जांच के दौरान पाया गया कि फर्म द्वारा जीएसटी कानून के प्रावधानों के विपरीत इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लिया गया है।
जांच में यह चला पता
जांच में सामने आया कि उक्त फर्म मुख्य रूप से मैनपावर सप्लाई, स्टाफिंग तथा प्रशिक्षण सेवाएं प्रदान करती है। वित्तीय वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 के दौरान फर्म द्वारा दिल्ली स्थित विभिन्न आपूर्तिकर्ताओं से प्राप्त खरीद के आधार पर 1.39 करोड़ रुपये से अधिक का इनपुट टैक्स क्रेडिट प्राप्त कर उसका उपयोग किया।
विभागीय सत्यापन में पाया गया कि जिन आपूर्तिकर्ताओं के आधार पर यह आईटीसी लिया गया, उनके जीएसटी पंजीकरण की तिथि से ही निरस्त पाए गए, जिससे इन लेन-देन की सत्यता पर गंभीर संदेह उत्पन्न हुआ है।
प्रारंभिक जांच में यह हुआ खुलासा
प्रारंभिक जांच के आधार पर 1.39 करोड़ रुपये से अधिक का संदिग्ध इनपुट टैक्स क्रेडिट चिह्नित किया गया है। साथ ही, फर्म के क्रेडिट लेजर में 27.47 लाख रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट वर्तमान में उपलब्ध पाया गया है। हालांकि, यह केवल वर्तमान में उपलब्ध आईटीसी की राशि है।
विस्तृत जांच के दौरान फर्जी बिलों के माध्यम से किए गए वास्तविक लेन-देन, संबंधित अन्य फर्मों की भूमिका तथा कर अपवंचन की वास्तविक मात्रा का आकलन किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद कर अपवंचन की वास्तविक राशि का निर्धारण किया जाएगा। मामले की विस्तृत जांच जारी है तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
