यूआईटी चेयरमैन के लिए क्या भीलवाड़ा का कोई नेता योग्य नहीं ?,8 साल से राजनीतिक अध्यक्ष से वंचित यूआईटी

जयपुर / डॉ. चेतन ठठेरा।भीलवाड़ा। वस्त्र नगरी भीलवाड़ा में अग्रणी रहती आई है और यहां की नेता भी चाहे वह कांग्रेस के हो या भाजपा के क्रेडिट लेने में हमेशा आगे रहे हैं लेकिन अफसोस की भीलवाड़ा नगर विकास न्यास जो करोड़ों की आय का स्रोत माना जाता है इस स्वायत्त शाषी संस्था अर्थात भीलवाड़ा नगर विकास न्यास में राजनीतिक अध्यक्ष के पद पर पिछले 8 सालों से किसी राजनेता की नियुक्ति नहीं हुई हैं । भीलवाड़ा में चर्चाएं आम है कि क्या भीलवाड़ा में यूआईटी चेयरमैन के लिए कोई भी नेता योग्य नहीं है ?
8 साल से बिना राजनीतिक अध्यक्ष के अनाथ यूआईटी
नगर परिषद, नगर निगम यूआईटी इन स्वायत्तशाषी संस्थाओं में राजनीति के सत्ताधारी पक्ष का नेता मुख्या(चैयरमेन )होता आया है और जहां तक भीलवाड़ा यूआईटी का सवाल यहां पर भी अधिकांश समय राजनेता ही मुख्या के तौर पर सीट पर रहे हैं। बीच-बीच में कुछ समय के लिए जिला कलेक्टर बतौर मुखिया बने हैं। परंतु पहली बार ऐसा हुआ है कि सन 2018 के बाद अर्थात 8 साल बीत गए लेकिन यूआईटी में कोई राजनीतिक नेता मुख्या नहीं बना। 2018 में आखिरी बार यूआईटी चेयरमैन के पद पर गोपाल लाल खंडेलवाल रहे थे और उनके बाद से लगातार इस पद का कार्यभार प्रशासक के रूप में जिला कलेक्टर संभाल रहे हैं
इन 8 साल की अवधि में 5 साल कांग्रेस का शासन रहा लेकिन इस पद पर किसी भी राजनेता को नहीं बिठाया गया और 2023 से अब तक 3 साल होने आए भाजपा का शासन आने के बाद भी इस पद पर किसी राजनेता की ताजपोशी नहीं हुई।
कांग्रेस और भाजपा में गुटबाजी रही हावी
कांग्रेस के 5 साल के शासन के दौरान जिले से रामलाल जाट राजस्व मंत्री के रूप में जिले का प्रतिनिधित्व कर रहे थे तो धीरज गुर्जर बीज निगम अध्यक्ष के रूप में राज्य मंत्री का दर्जा लेकर मस्त थे। लेकिन उसके बाद भी यूआईटी में अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हुई। दोनों ही नेता यूआईटी चेयरमैन के पद पर भीलवाड़ा जिले के कांग्रेस के किसी भी नेता को ताजपोशी नहीं कर पाए। इसका सबसे बड़ा कारण यह माना जाता है कि कांग्रेस भी गुटबाजी में बंटी हुई थी। एक गुट रामलाल जाट का दूसरा कुछ धीरज गुर्जर का। दोनों ही नेता के आंतरिक लड़ाई का नुकसान इस पद की दौड़ में शामिल नेताओं को तो हुआ ही लेकिन भीलवाड़ा की जनता और भीलवाड़ा के विकास को भी हुआ ऐसा नहीं की भीलवाड़ा कांग्रेस में कोई इस पद के काबिल नहीं था। यही हाल भाजपा के वर्तमान शासन में हो रहा है यहां पर भाजपा तीन गुटों में बटी हुई है पहले गत सांसद दामोदर अग्रवाल का दूसरा कोड विट्ठल शंकर अवस्थी एवं सुभाष बहेडिया का और तीसरा गुट राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की बैसाखियों के सहारे सत्ता के गलियारे तक निर्दलीय विधायक के रूप में पहुंचे अशोक कोठारी का है। और इन तीनों गुटों में आंतरिक रूप से चल रही खींच तान का ही नतीजा है कि भीलवाड़ा यूआईटी में भाजपा के शासन के 3 साल होने को आए लेकिन अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हुई ऐसा नहीं की भाजपा में भी कोई इस पद के लायक नहीं है।
परंतु खींचतान के चलते इस शासन में भी अध्यक्ष की नियुक्ति होने के आसार नजर नहीं आते।
अध्यक्ष ही नहीं प्रशासनिक अधिकारी के रूप में सचिव का पद भी पिछले ढाई महीने से रिक्त पड़ा है और इसका नतीजा यह है कि शहर में रोड और पार्कों की लाइटिंग का जिसका बिल यूआईटी भर्ती है और उसकी क्षेत्राधिकार के हैं उनके करीब एक करोड़ से अधिक का भुगतान विद्युत वितरण निगम का बकाया चल रहा है लेकिन बिल ऑन को पारित करने वाला कोई अधिकारी नहीं है यह तो गनीमत है कि विद्युत वितरण निगम ने अभी तक विद्युत कनेक्शन काटा नहीं है अगर विद्युत कनेक्शन काट दिया जाए तो शहर अंधेरे में डूब जाएगा। इसके अलावा शहर के विकास कार्य पूरी तरह से थप्पड़ हैं कई योजनाओं में कार्य नहीं हो रहा है यहां तक की सरकार की ओर से आम जनता को राहत देने के लिए लगाए गए शिविर भी बिना यूआईटी सचिव के ही पूरा हुआ और सचिव के नहीं होने से शिविर में आए हुए आवेदनों पर धरातल पर कोई काम विशेष रूप से नहीं उतर पाए अर्थात जनता को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पाया
