फार्मेसी स्टोर RGHS में दवाइयों के नाम पर सरकार को लगा रहे हैं चूना

जयपुर / डॉ. चेतन ठठेरा। राजस्थान सरकार द्वारा सरकारी और पेंशनर कर्मचारियों के उपचार के लिए शुरू की गई राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम
(आरजीएचएस RGHS) योजना में फार्मेसी स्टोर मनमर्जी से एक ही कंपनी की एक की दवा की अलग-अलग दरें लगाकर क्लेम उठाकर सरकार को राजस्व हानि पहुंचा रहे हैं। यही नहीं कमीशन में भी घोटाला किया जा रहा है। यह गड़बड़ी का खेल राजस्थान के उदयपुर, चित्तौड़गढ़ सहित 10 शहरों में सबसे अधिक सामने आया है।
सरकारी कर्मचारियों के लिए चलाई जा रही है आरजीएचएस योजना में हर साल लगभग 1500 करोड रुपए फार्मेसी पर अर्थात दवाइयां पर खर्च होते हैं और योजना में रोजाना लगभग 20000 बिल जेनरेट होते हैं। फार्मेसी स्टोर तथा दवा विक्रेता की ओर से बिल पेश करने के बाद आरजीएचएस द्वारा भुगतान किया जाता है। अभी हाल ही में दवाइयां के बिलों में अंतर और गड़बड़ी के कई मामले सामने आने के बाद मेडिकल स्टोर्स के बिलों की ऑडिट शुरू की गई है। इस ऑडिट में प्रारंभिक स्तर पर 67 जैनेरिक और ब्रांडेड दवाओं के बिलों की जांच की गई। जांच में स्पष्ट हुआ कि बिलों में मनमर्जी से दवाईयों की कीमत वसूली जा रही है और एमआरपी से भी अधिक कीमत वसूली जा रही हैं। यही नहीं जेनेरिक दवाइयां को भी ब्रांडेड बता कर डिस्काउंट में भी खेल किया जा रहा है अर्थात एक मेडिकल स्टोर किसी दवा को ₹7 में दे रहा है तो दूसरा मेडिकल स्टोर इस दवा को ₹18 में बेच रहा है।
ब्रांडेड दवाइयां अर्थात कंपनी की दवाइयों पर नियमानुसार 12% और जेनेरिक दवाइयों पर 40% डिस्काउंट देने का नियम है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि apidra cartridge 100iu/ml यह इंजेक्शन डायबिटीज अर्थात शुगर में काम आता है एक मेडिकल स्टोर इसकी कीमत 442 वसूल की जबकि दूसरे ने 736 रुपए वसूले।
इसी तरह इंसुलिन डायबिटीज शुगर में ही काम आने वाला mixtard penfill की कीमत भी अलग-अलग एक ही कंपनी के इस इंसुलिन कि दर एक मेडिकल स्टोर 156 रुपए वसूल रहा तो दूसरे ने 373 और तीसरे ने 1860 रुपए वसूले। इसी तरह basalog 100 iu नाम का यह इंसुलिन एक ही कंपनी का है लेकिन जांच में सामने आया कि एक मेडिकल स्टोर ने इसकी कीमत 479 रुपए वसूल की दूसरे ने 537 रुपए और तीसरे 2686 रुपए वसूले।
हड्डियों की मजबूती के लिए काम में आने वाला bonpth इंजेक्शन की कीमत एक मेडिकल स्टोर ने 1554 रुपए वसूल की दूसरे ने 4312 रुपए और तीसरे मेडिकल स्टोर ने 7065 रुपए वसूल किए।
महिलाओं में रजोनिवृत्ति अर्थात मेनोपॉज के बाद ऑस्टियोपोरोसिस उपचार के लिए काम में आने वाली दवा denpir की कीमत एक मेडिकल स्टोर ने 6500 वसूल की और दूसरे से 17098 रुपए में बेचा। आप इसी से अंदाजा लगा सकते हैं की कितना बड़ा घोटाला है।
ब्लड शुगर कंट्रोल करने के लिए काम में आने वाली दवाई trulicity 1.5mg की कीमत एक दवा मेडिकल स्टोर 2419 रुपए वसूल कर रहा है और दूसरा इसी दवाई की कीमत 5321 रुपए वसूल कर रहा है।
स्टेरॉयड लेने के कारण कमजोर हुई हड्डियों के इलाज में प्रयुक्त होने वाला इंजेक्शन terifrac की कीमत एक मेडिकल स्टोर 4899 वसूले और दूसरे मेडिकल स्टोर ने ₹6511 वसूले।
आरजीएचएस द्वारा की जा रही जांच में कई दवाइयां के दावों में अनियमितताएं और गड़बड़ियां सामने आई है जैसे Eexmptia 40 mg, Denberi इंजेक्शन Terifrac(Teriparatide) और Trulicity 1.5 mg जैसी दवाइयां पर बाजार मूल्य से भी अधिक के दावे किए गए हैं अर्थात भुगतान के लिए बिल पेश किए गए हैं। कई दवाइयां पर खरीद मूल्य से 2 से 5 गुना तक राशि के दावे प्रस्तुत किए गए अर्थात भुगतान के लिए डिमांड बिल पेश किए गए। जांच में ऐसे मामले भी सामने आए हैं जहां Denosumab 60 mg इसका बाजार मूल्य ₹6500 है लेकिन 18 000 रुपए का क्लेम बिल पेश किए गए। विभाग द्वारा जांच में जिन फार्मेसी स्टोर्स के दावों में अनियमितता और गड़बड़ी सामने आई तथा आशंका है उनसे दवाइयां के खरीद बिल और अन्य दस्तावेज मांगे जा रहे हैं।
डिस्काउंट में भी घोटाला
जांच में सामने आया है कि कंपनी द्वारा दिए जाने वाले डिस्काउंट में भी बड़ा घोटाला है। प्रारंभिक जांच में पता चला कि RADMOL 1 GM इंजेक्शन जो दर्द और बुखार कम करने के लिए ड्रिप के जारी नसों में दिया जाता है इसकी एमआरपी दर 708 रुपए वाली इस दवाई को मेडिकल स्टोर ने ₹20 में खरीदा आरजीएचएस को इस पर 40% मिनिमम डिस्काउंट दिया जाना था लेकिन मेडिकल स्टोर ने केवल 12% की डिस्काउंट दिया। इसी तरह बैक्टीरियल इन्फेक्शन को खत्म करने के लिए काम में आने वाला इंजेक्शन glmero Meropenem 1.5 mg जिसकी एमआरपी दर 5155 है और मेडिकल स्टोर ने इसे 210 रुपए में खरीदा था तथा आरजीएचएस को इस पर 40% डिस्काउंट दिया जाना चाहिए था लेकिन मेडिकल स्टोर ने केवल 12% ही डिस्काउंट दिया इन दोनों उदाहरण से समझा जा सकता है कि दवाई के डिस्काउंट में भी कितना बड़ा घोटाला किया जा रहा है।
इनकी जुबानी
इस योजना के तहत मेडिकल स्टोर्स के रोजाना पेश होने वाले बिलों की विभिन्न स्तर पर जांच की जा रही है जिनमें गड़बड़ियां सामने आने के बाद अब एआई(AI) से एनालिसिस कराया जा रहा है। अब एआई के जरिए निगाहें राखी जाकर असामान्य एमआरपी गलत दरें प्रमाणित दावे वाले मामलों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है और की जाएगी।
हरजीलाल अटल
मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजस्थान स्टेट हेल्थ इंश्योरेंस एजेंसी जयपुर
