भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा नौनिहालों का भविष्य,1.17 करोड़ की लागत से बना भवन 4 साल में ही जर्जर

जयपुर/ डॉ. चेतन ठठेरा। भीलवाड़ा। प्रदेश में सरकार भले ही स्कूली विद्यार्थियों को बेहतर और सुरक्षित सुविधाएं देने के दावे कर रही हो, लेकिन भीलवाड़ा जिले में भ्रष्टाचार की दीमक इन दावों को खोखला कर रही है। जिले के बनेड़ा ब्लॉक में शिक्षा के मंदिर के निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग कर नौनिहालों के जीवन से सीधा खिलवाड़ किया गया है।
ब्लॉक के स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल का नवनिर्मित भवन महज 4 साल में ही दरकने लगा है। हालात इतने खतरनाक हैं कि विद्यार्थियों को कमरों में बैठाना बंद कर दिया गया है और वहां ‘नो एंट्री’ के बोर्ड लटक रहे हैं।
यूं हुआ 1.17 करोड़ रुपए का आवंटन और निर्माण
मॉडल स्कूल के नए भवन का निर्माण दो अलग-अलग योजनाओं के तहत किया गया। समग्र शिक्षा (समसा) कार्यालय की निगरानी में हुए इस कार्य का विवरण इस प्रकार है। पीएबी योजना का कार्य 12 जुलाई 2019 तक पूरा होना था।
योजना का नाम -पीएबी ठेकेदारका नाम- लादूराम बड़वाल
कार्य आदेश तिथि – 13 अक्टूबर 2018
लागत 64.43 लाख
योजना का नाम- नाबार्ड ठेकेदार कानाम- एस बोरवेल,
कार्य आदेश की तिथि-4 जनवरी 2020 लागत-47.72 लाख कुल भुगतान-117.15 लाख
सुपुर्दगी में सामने आई बड़ी मिलीभगत
दोनों फर्मों द्वारा निर्माण कार्य पूरा करने के बाद 18 मई 2022 को विद्यालय भवन तत्कालीन प्रिंसिपल डॉ. कल्पना शर्मा (जो वर्तमान में एडीपीसी हैं) को सुपुर्द किया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि सुपुर्दगी के वक्त ही कमरों और फर्श में दरारें व टूट-फूट साफ नजर आ रही थी।
इसके बावजूद तत्कालीन प्रिंसिपल ने कार्य को ‘संतोषजनक’ मानते हुए उपयोगिता प्रमाण पत्र (UC) जारी कर दिया। इसी प्रमाण पत्र के आधार पर अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक (समग्र शिक्षा कार्यालय) ने ठेकेदारों को 117.15 लाख रुपए का पूरा भुगतान कर दिया।
नियमों की उड़ी धज्जियां और कागजी खानापूर्ति
विभागीय नियमानुसार 10 लाख रुपए से अधिक के निर्माण कार्य पर ठेकेदार की 5 साल की गारंटी होती है। दरारें या टूट-फूट होने पर सुपुर्दगी नहीं ली जाती और ठेकेदार को उसे सुधारना होता है। इस मामले में निविदा शर्तों में गारंटी अवधि रहस्यमयी तरीके से केवल 1 साल रखी गई।
तत्कालीन प्रिंसिपल ने यह लिखा
बताया जाता है कि तत्कालीन प्रिंसिपल डॉ. शर्मा ने सुपुर्दगी के समय 15 बिंदुओं की एक शिकायत समसा ऑफिस को दी थी, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई किए बिना ही ठेकेदारों का भुगतान पास कर दिया गया।
इनकी जुबानी
मॉडल स्कूल के नवनिर्मित प्राइमरी भवन में 2 साल पहले ही अध्यापन शुरू हुआ था, लेकिन दीवारों में गहरी दरारें आ गई हैं। किसी अनहोनी की आशंका के चलते चार कमरों में कक्षाएं शुरू ही नहीं की गईं। पिछले साल से इन कमरों को लॉक कर ‘नो एंट्री’ का बोर्ड लगा दिया गया है। मरम्मत के लिए कई बार लिखा गया। पिछले साल समसा कार्यालय से एईएन राजकुमार मुंदड़ा भी आए थे, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ।
– भरत धाभाई, कार्यवाहक प्रिंसिपल, स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल, बनेड़ा-
(11 जुलाई को सीबीईओ को लिखे पत्र के आधार पर)
सवाल, जो मांगते हैं जवाब
– गारंटी अवधि का खेल: जब भवन में निर्माण के समय ही दरारें थीं, तो गारंटी समय अवधि में ठेकेदारों से कार्य वापस सही क्यों नहीं कराया गया?
– घटिया निर्माण: 4 साल में ही भवन के 9 कमरे (4 प्री-प्राइमरी और 5 मुख्य भवन) ‘वृहद मरम्मत योग्य’ कैसे हो गए? क्या यह स्पष्ट नहीं है कि निर्माण में अमानक सामग्री लगी?
– अधिग्रहण क्यों: जब भवन की स्थिति सही नहीं थी और 15 खामियां निकाली गई थीं, तो तत्कालीन प्रिंसिपल ने भवन का अधिग्रहण कर ‘संतोषजनक’ का प्रमाण पत्र क्यों दिया?
– क्या होगी रिकवरी: क्या शिक्षा विभाग इस बड़ी लापरवाही के लिए जिम्मेदार तत्कालीन जेईएन, तत्कालीन एईएन राजकुमार मुंदड़ा और तत्कालीन प्रिंसिपल डॉ. कल्पना शर्मा के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करते हुए राजस्व नुकसान की वसूली करेगा?
नहीं दिया जवाब
इस संबंध में तत्कालीन प्रिंसिपल एवं वर्तमान में एडीपीसी डॉ.कल्पना शर्मा को हमने उनका पक्ष जानने के लिए 5:10 पर और 6:21 पर दो बार फोन किया लेकिन उन्होंने ना तो फोन उठाया और नहीं कोई वापस रिप्लाई दी
इनकी जुबानी
विद्यालय में निर्माण संबंधी कार्य हो मॉडल स्कूल सारी जिम्मेदारी अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक समग्र शिक्षा डॉ.कल्पना शर्मा की है। मुझे समझ में जानकारी नहीं है।
अरूणा गारू
मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी(CDEO) भीलवाड़ा
