जिम्मेदारों ने ही खुद को दे दिया ‘सुरक्षा का सर्टिफिकेट,भीलवाड़ा: 1.17 करोड़ का स्कूल भवन 4 साल में जर्जर

जयपुर/ डॉ. चेतन ठठेरा।भीलवाड़ा। कहते हैं कोई भी अपराधी अपना जुर्म आसानी से नहीं कुबूलता। शिक्षा विभाग में भी भ्रष्टाचार और मिलीभगत का एक ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जिले के बनेड़ा ब्लॉक स्थित स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल (प्राथमिक भवन) का 1.17 करोड़ रुपए की लागत से बना भवन महज 4 साल में ही जर्जर हो गया। हद तो तब हो गई जब जिन तकनीकी अधिकारियों की देखरेख में यह घटिया निर्माण हुआ, तत्कालीन प्रिंसिपल ने उन्हीं से ‘भवन सुरक्षित होने’ का प्रमाण पत्र लेकर ठेकेदार से बिल्डिंग हैंडओवर ले ली।
समाचार पत्र ने 8 अगस्त 2026 को “भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा नौनिहालों का भविष्य, 1.17 करोड़ की लागत से बना भवन 4 साल में ही जर्जर” शीर्षक से इस मामले को प्रमुखता से उठाया था। वर्तमान में हालात इतने खराब हैं कि कमरों में बच्चों का बैठना बंद कर वहां ‘नो एंट्री’ के बोर्ड लगा दिए गए हैं।
जांच में बड़ा खुलासा
खुद की चोरी, खुद ही सीनाजोरी
खबर प्रकाशित होने के बाद जिला कलक्टर की सख्ती पर मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी अरूणा गारू ने सीबीईओ (बनेड़ा) गीता माहेश्वरी से मामले की जांच करवाई। जांच में सामने आया कि निर्माण कार्य समसा (SMSA) के तत्कालीन सहायक अभियंता (AEN) राजकुमार मुंदड़ा और कनिष्ठ अभियंता (JEN) की देखरेख में हुआ था।
क्या किया तत्कालीन प्रिंसिपल डॉ. श्रीमती शर्मा ने
तत्कालीन प्रिंसिपल डॉ. कल्पना शर्मा ने विद्यालय विकास समिति (SDMC) में प्रस्ताव पारित करवाया कि इन्हीं AEN और JEN से भवन सुरक्षा का लिखित प्रमाण पत्र लिया जाए। अधिकारियों ने लिख कर दे दिया कि भवन पूरी तरह सुरक्षित है और किसी भी जनहानि की जिम्मेदारी उनकी और समसा की होगी। यह प्रमाण पत्र मिलने के तीसरे ही दिन आनन-फानन में ठेकेदार से भवन की सुपुर्दगी ले ली गई।
तत्कालीन प्रिंसिपल की भूमिका पर उठते सवाल
सीबीईओ की जांच रिपोर्ट के बाद तत्कालीन प्रिंसिपल डॉ. कल्पना शर्मा की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में है। डॉ. शर्मा ने समसा को जो शिकायतें की थीं, उनमें दरारों और टूट-फूट के बावजूद घटिया निर्माण सामग्री का स्पष्ट उल्लेख क्यों नहीं किया? आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी कि रातों-रात प्रस्ताव पारित कर, महज तीन दिन में उन्हीं दागी अधिकारियों से सर्टिफिकेट लेकर ठेकेदार से भवन सुपुर्दगी ले ली गई? क्या घटिया निर्माण पर पर्दा डालने के लिए तकनीकी अधिकारियों और संस्था प्रधान के बीच कोई मिलीभगत थी?
ये थे निर्माण के ठेकेदार
इस जर्जर हो चुके नवनिर्मित भवन का ठेका दो योजनाओं के तहत दिया गया था। नाबार्ड योजना में यह काम भीलवाड़ा के सुनील डागा (एसआर बोरवेल) के पास था, वहीं पीएसी योजना के तहत जयपुर की फर्म लादू लाल बड़वाल ने इसका काम किया था।
