कांग्रेस के आपसी फूट ने‌ भाजपा की जीत की राह की आसान,भीलवाड़ा नगर निगम चुनाव

शहर के 17 वार्डों में कांग्रेस प्रत्याशी नहीं ,भीलवाड़ा भाजपा में भी बगावत बरकरार ,डॉ. चेतन ठठेरा स्वतंत्र पत्रकार
कांग्रेस के आपसी फूट ने‌ भाजपा की जीत की राह की आसान,भीलवाड़ा नगर निगम चुनाव

भीलवाड़ा। भीलवाड़ा जिले में कांग्रेस में आपसी फूट के चलते नामांकन भरने के अंतिम दिन शहर के 70 वार्डों में से केवल 53 वार्डों में ही अपने अधिकृत प्रत्याशी के सिंबल निर्वाचन अधिकारी को दे पाई और 17 वार्डों में अधिकृत प्रत्याशियों के नाम व चुनाव की सूची रिटर्निंग ऑफिसर को नहीं दे पाई कांग्रेस। इस तरह अब शहर के 17 वार्डों में कांग्रेस का कोई प्रत्याशी मैदान में नहीं बचा है जिससे इन वार्डो में मुकाबला एक तरफ होने की स्थिति बन रही है। हालांकि इन वार्डो में निर्दलीय प्रत्याशी भी मैदान में है अभी तक तो।

भाजपा की क्या रणनीति..

भाजपा अपनी रणनीति से इन निर्दलीय प्रत्याशियों को मैदान से हटा पाती है या नहीं यह तो तस्वीर 3 सितंबर को ही स्पष्ट होगी। अगर भाजपा इन वार्डो में निर्दलीय प्रत्याशियों को नाम वापसी कराने में सफल होती है तो 17 ही वार्डों में भाजपा निर्विरोध चुनाव जीत सकती है ?‌

क्या यह चुप बैठेंगे

कांग्रेस के जिन 17 वार्डों में चुनाव लड़ने के इच्छुक कांग्रेस कार्यकर्ता और पदाधिकारी अपने नेताओं की गलतियों से चुनाव लड़ने से वंचित रह गए वह चुनाव में क्या चुप बैठेंगे‌ ?

जयपुर में वार रूम का असर भीलवाड़ा में

कांग्रेस के संगठनात्मक स्तर पर चल रही गुटबाजी और टिकट वितरण को लेकर असंतोष ने पार्टी की चुनावी तैयारी पर बड़ा असर डाला है। बीते सप्ताह के दौरान ही जयपुर कांग्रेस के वार रूम में चुनावी रणनीति और टिकट वितरण मंथन के दौरान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली सहित कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी के बीच ही भीलवाड़ा से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री रामलाल जाट तथा भीलवाड़ा से ही कांग्रेस के पूर्व विधायक धीरज गुर्जर के बीच जमकर वाक युद्ध हुआ और इस युद्ध में सारी मर्यादाएं भुला दी गई।

नौबत तो हाथापाई तक आ गई थी अगर डोटासरा जूली और अन्य नेता बीच बचाव नहीं करते तो। शायद इसी घटनाक्रम का असर सोमवार को नगर निकाय चुनाव के नामांकन भरने के अंतिम दिन भीलवाड़ा शहर में देखने को मिला जब चुनाव आचार संहिता के नियमों के तहत राजनीतिक दलों द्वारा अपने अधिकृत प्रत्याशियों की सूची निर्वाचन अधिकारी को निर्धारित समय सीमा अवधि 3:00 बजे तक सुपुर्द करनी होती है लेकिन कांग्रेस निर्धारित समय सीमा अवधि तक 53 अधिकृत प्रत्याशियों की सूची कर पाई 17 प्रत्याशियों की सूची नहीं दे पाई।

यह विवाद रहा

सूची को लेकर जहां कांग्रेस के जिला अध्यक्ष शिवराम खटीक का कहना है कि वह निर्धारित समय से पूर्व रिटर्निंग ऑफिसर के पास पहुंच गए थे और सूची दे दी थी लेकिन 17 नामों वाली सूची में कुछ तकनीकी कमी के कारण वह उसमें निर्वाचन अधिकारी को बता कर उनके कहने पर उनके समीप वाले कमरे में सुधार करने लग गए और 3:15 पर सूची लेकर निर्वाचन अधिकारी के पास गए लेकिन निर्वाचन अधिकारी ने समय सीमा समाप्त होने का हवाला देते हुए सूची लेने से इनकार कर दिया जबकि नियमानुसार हम निश्चित समय से पूर्व परिसर में पहुंच चुके थे और नियम के तहत समय सीमा से पहले परिसर में पहुंचने के बाद सूची लेना जरूरी है। जबकि दूसरी और निर्वाचन अधिकारी का यह कहना है कि समय सीमा समाप्त होने के बाद उन्हें सूची मिली है जो आचार संहिता और निर्वाचन विभाग के नियमों के तहत स्वीकार्य नहीं है।।

कोई शीर्ष नेता नहीं कर रहा पैरवी

इस घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस शहर जिला अध्यक्ष शिवराम खटीक के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट परिसर में निर्वाचन अधिकारी के कक्ष के बाहर धरना देकर बैठ गए करीब 2 घंटे तक काफी नाटकीय घटनाक्रम चला परंतु आश्चर्य की बात है कि इस प्रदर्शन और आंदोलन में भीलवाड़ा जिले का और शहर का कोई भी कांग्रेस का शीर्ष नेता शामिल नहीं हुआ और ना उसने‌पैरवी की यहां तक की शिवराम खटीक जिला अध्यक्ष धीरज गुर्जर गुट के माने जाते हैं उसके बाद भी धीरज गुर्जर तक इस धरना प्रदर्शन में नहीं आए और नहीं रामलाल जाट आए। इससे स्पष्ट हो गया कि कांग्रेस में गुटबाजी पूरी तरह से हावी है। हो सकता अगर शीर्ष नेता इस मामले में पैरवी करते और दबाव बनाते तो शायद कुछ….

भाजपा की राह अभी पूरी तरह बेफिक्र नहीं

कुल मिलाकर भीलवाड़ा नगर निगम चुनाव में कांग्रेस की आपसी फूट ने भाजपा के लिए जीत की राह जरूर आसान कर दी है, लेकिन भाजपा की राह अभी पूरी तरह बेफिक्र नहीं है। एक तरफ कांग्रेस 17 वार्डों में मुकाबले से बाहर है, तो दूसरी तरफ भाजपा को अपने ही बागियों और नाराज कार्यकर्ताओं को साधना होगा।अब देखना होगा कि कांग्रेस की कमजोरी और भाजपा की शुरुआती बढ़त आखिरकार नगर निगम की सत्ता के समीकरण को कितना बदल पाती है।

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