राजस्थान पुलिस का दिल्ली में छापा

जयपुर। राजस्थान की डीग पुलिस ने दिल्ली में एक तीन मंजिला इमारत पर छापा मार कर संगठित अंतरराज्यीय साइबर अपराध सिंडिकेट का खुलासा करते हुए 64 जनों को गिरफ्तार किया है जिम 31 युवक व 33 युवतियां शामिल है और दो नाबालिक को रेस्क्यू किया। यह सिंडिकेट ग्रो एचडीएफसी बैंक और एक्सिस बैंक के अधिकारी बनकर साइबर ठगी करते थे।
ऐसे चला साइबर ठगी का पता
डीग पुलिस अधीक्षक शरण गोपीनाथ के ने यह जानकारी देते हुए बताया कि
मामले की शुरुआत एक्सिस बैंक डीग के शाखा प्रबंधक फूल सिंह द्वारा साइबर क्राइम थाना डीग में दी गई रिपोर्ट से हुई। रिपोर्ट के अनुसार संगठित साइबर अपराधी गिरोह उनके बैंक नाम, लोगो और साख का दुरुपयोग करते हुए फर्जी वेबसाइट के जरिए ग्राहकों से संपर्क कर रहा था। आरोपी खुद को बैंक का वरिष्ठ अधिकारी बताते और फर्जी आईडी कार्ड दिखाकर क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने अथवा नवीनीकरण का झांसा देते थे।
बातचीत के दौरान ग्राहकों से ओटीपी, सीवीवी, पैन कार्ड की जानकार, जीमेल आईडी जन्मतिथि और अन्य गोपनीय बैंकिंग जानकारी हासिल कर ली जाती थी। इसके बाद प्राप्त जानकारी का इस्तेमाल ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के लिए किया जाता था।
दिल्ली की तीन मंजिला इमारत में चल रहा था फर्जी कॉल सेंटर
बैंक की प्रारंभिक जांच और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर गिरोह के मुख्य सदस्य के रूप में आकाश पुत्र रामप्रकाश निवासी बनकट, थाना ताहवरपुर, जिला आजमगढ़, उत्तर प्रदेश की पहचान सामने आई। जांच में पता चला कि गिरोह द्वारा उत्तम नगर, दिल्ली की एक तीन मंजिला इमारत में अवैध कॉल सेंटर संचालित किया जा रहा था, जहां से राजस्थान के विभिन्न मोबाइल नंबरों पर संपर्क कर साइबर ठगी की जाती थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कामां दिनेश यादव के नेतृत्व में विशेष जांच टीम गठित की गई।
टीम ने दिल्ली के उत्तम नगर में स्थित तीन मंजिला इमारत पर दिल्ली पुलिस के सहयोग से छापा मारा।संबंधित ठिकाने पर दबिश दी तो तीन मंजिला इमारत में 85 व्यक्ति मिले, जिनमें 41 युवक, 42 युवतियां और 2 नाबालिग शामिल थे। पूछताछ एवं अनुसंधान के बाद 64 लोगों को गिरफ्तार किया गया जिम 31 युवक और 33 युवतियां शामिल और 2 नाबालिगों को रेस्क्यू किया गया। मौके से अखियां से एंड्रॉयड मोबाइल फोन भी जप्त किए हैं। प्रारंभिक पूछताछ के बाद 88 जनों में से 19 युवक युवतियों को उनके परिजनों के साथ रावण करती है गया।
बेरोजगार युवाओं को ऐसे गिरोह में फंसाते थे
जांच में गिरोह का एक चौंकाने वाला तरीका भी सामने आया। आरोपी वर्क इंडिया और अन्य जॉब पोर्टल्स से बेरोजगार युवाओं के रिज्यूमे अर्थात बायोडाटा हासिल करते थे। इसके बाद उन्हें फर्जी कंपनी में नौकरी का झांसा देकर गिरोह में शामिल किया जाता था।
युवक युवतियों को बकायदा प्रशिक्षण दिया जाता था
गिरोह में बाकायदा ट्रेनिंग, इंटरव्यू, टीम लीडर और कर्मचारी जैसे अलग-अलग स्तर बनाए गए थे। युवाओं को 11 हजार से 15 हजार रुपये तक मासिक वेतन दिया जाता था। इसके अलावा ज्यादा लोगों से ठगी करने वाले कर्मचारियों को अतिरिक्त कमीशन का लालच दिया जाता था। जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह ने 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को भी साइबर ठगी के काम में लगाया था।
लिखी हुई स्क्रिप्ट से ग्राहक को जाल में फंसाते थे
साइबर ठग फोन कॉल और व्हाट्सएप जरिए लोगों से संपर्क करते थे। बातचीत के दौरान उन्हें पहले से तैयार लिखी हुई स्क्रिप्ट का इस्तेमाल करने के लिए दिया जाता था। स्क्रिप्ट के अनुसार बातचीत करते हुए ग्राहक का विश्वास जीता जाता और फिर बैंकिंग एवं व्यक्तिगत जानकारी हासिल की जाती थी।
पुलिस ने यह भी बरामद किए
पुलिस को मौके से एक्सिस बैंक, येस बैंक और एचडीएफसी बैंक के अधिकारियों के फर्जी आईडी कार्ड भी मिले हैं। इसके अलावा बड़ी मात्रा में ग्राहकों का बल्क डाटा बरामद हुआ है, जिसमें नाम, बैंक अकाउंट, पैन कार्ड, आवासीय पते और अन्य बैंकिंग जानकारियां शामिल हैं।
फर्जी सिम और करोड़ों के लेनदेन के सुराग
जांच में सामने आया कि गिरोह द्वारा एक ही व्यक्ति के नाम पर कई फर्जी सिम कार्ड का इस्तेमाल किया जा रहा था। अब तक की जांच में करोड़ों रुपये के संदिग्ध/अवैध वित्तीय लेनदेन के सुराग मिले हैं। गिरोह के खिलाफ राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी कई शिकायतें दर्ज मिली हैं। पुलिस अब गिरोह के मुख्य संचालकों, फर्जी डेटा उपलब्ध कराने वाले लोगों, बैंकिंग एवं सिम नेटवर्क से जुड़े व्यक्तियों तथा ठगी की रकम को आगे पहुंचाने वाले नेटवर्क के संबंध में गहन अनुसंधान कर रही है।
