भीलवाड़ा कोर्ट में महासंग्राम,वकीलों का जज के खिलाफ खुला मोर्चा, ‘अमर्यादित आचरण’ के खिलाफ अदालत का पूर्ण बहिष्कार

भीलवाड़ा / अमन ठठेरा ।राजस्थान के भीलवाड़ा में अभिभाषक संस्था अर्थात वकीलों की एसोसिएशन ने कएक बेहद कड़ा और ऐतिहासिक फैसला लेते हुए अपर सेशन न्यायाधीश संख्या-3 (ADJ-3) पवन कुमार काला की अदालत का पूर्ण बहिष्कार करने का एलान कर दिया है।
उम्मेदसिंह राठौड़ अध्यक्ष जिला अभिभाषक संस्था ने यह जानकारी देते हुए बताया कि वकीलों का आरोप है कि न्यायाधीश ने न सिर्फ बार एसोसिएशन के आधिकारिक पत्र का अपमान किया, बल्कि वकीलों के आत्मसम्मान और उनकी फीस को लेकर भी बेहद अमर्यादित और तीखी टिप्पणियां की हैं।
क्या है पूरा मामला
उम्मेद सिंह राठौड़ ने बताया कि मामले की शुरुआत कल यानी 29 जुलाई 2026 को हुई थी। इस दिन गुरुपूर्णिमा का पावन पर्व होने के कारण अधिकांश अधिवक्ता सुबह अपने-अपने आश्रमों और धार्मिक स्थलों पर गुरु पूजन के लिए गए हुए थे। इसके साथ ही, बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष विक्रम सिंह राठौड़ के अनुज भ्राता (भाई) का आकस्मिक निधन हो गया था।इन दोनों गंभीर कारणों को देखते हुए भीलवाड़ा जिला अभिभाषक संस्था द्वारा सर्वसम्मति से दोपहर के भोजनावकाश (लंच) के बाद न्यायिक कार्य स्थगित रखने का निर्णय लिया गया। इसकी लिखित सूचना (शोक और स्थगन प्रस्ताव पत्र) कोर्ट परिसर की सभी अदालतों में भिजवाई गई थी।
जज के यह थे तीखे बोल
राठौड ने आगे बताया कि आरोप है कि जब यह आधिकारिक पत्र अपर सेशन न्यायाधीश संख्या-3 (ADJ-3) पवन कुमार काला के समक्ष पहुंचा, तो उन्होंने इसे मानने से साफ इनकार कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, न्यायाधीश ने बेहद कड़े और अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा, “मैं किसी संस्था के पत्र को नहीं मानता। चाहे किसी की भी मौत हो गई हो या कोई भी अन्य कार्य हो, मैं इस पत्र को स्वीकार नहीं करता हूँ।”
वकीलों की फीस पर कटाक्ष और अपमान का आरोप
अभिभाषक संस्था का आरोप है की बात सिर्फ पत्र को ठुकराने तक ही सीमित नहीं रही। बार एसोसिएशन द्वारा जिला एवं सेशन न्यायाधीश को सौंपे गए शिकायत पत्र में यह गंभीर आरोप लगाया गया है कि न्यायाधीश पवन कुमार काला अक्सर अदालत में मौजूद पक्षकारों (मुवक्किलों) के सामने ही वकीलों के खिलाफ अपमानजनक भाषा का प्रयोग करते हैं। वे वकीलों की फीस को लेकर तीखी टीका-टिप्पणी करते हैं और उन्हें मुवक्किलों के सामने नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं। वकीलों का कहना है कि जज साहब का यह रवैया संस्था और उसके सदस्यों की गरिमा पर गहरी ठेस पहुंचाता है।
जब तक लिखित माफी नहीं, तब तक अदालत बंद
न्यायाधीश के इस कथित अड़ियल और अपमानजनक रवैये से नाराज भीलवाड़ा बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने तुरंत एक आपात बैठक बुलाई। बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास किया गया कि जब तक न्यायाधीश पवन कुमार काला अपने इस कृत्य के लिए लिखित में माफी नहीं मांगते और भविष्य में ऐसा न करने का ठोस आश्वासन नहीं देते, तब तक कोई भी वकील उनकी अदालत (अपर सेशन न्यायालय सं. 3) में पैरवी के लिए नहीं जाएगा।इस ऐतिहासिक शिकायत पत्र पर जिला अभिभाषक संस्था के अध्यक्ष उम्मेद सिंह राठौड़, उपाध्यक्ष महिपाल सिंह राणावत, महासचिव पंकज कुमार दाधीच, रेवेन्यू महासचिव मनोहर लाल भांभी, कोषाध्यक्ष रवि गोरानी, सह सचिव आदित्य सिंह चौहान, और पुस्तकालय सचिव प्रताप लाल तेली मनोनीत सदस्य पंकज पंचोली, राघवेंद्रनाथ व्यास, ओमप्रकाश तेली, वंदना आमेटा, पीरू सिंह गौड़, आनंद शर्मा सहित सदस्यों ने हस्ताक्षर कर अपनी एकजुटता दिखाई है।
