सरकारी स्कूलों के बच्चों के मुंह से दूध छीनकर बाजार में बेचा जा रहा

जयपुर / डॉ. चेतन ठठेरा। राजस्थान सरकार द्वारा प्रदेश की सरकारी स्कूलों में पन्नाधाय बाल गोपाल योजना के तहत बच्चों को दूध के पाउडर से दूध बनाकर देने की योजना मैं कितना भ्रष्टाचार और घोटाला है इसका प्रत्येक उदाहरण प्रदेश की राजधानी जयपुर के सामोद क्षेत्र में सामने आया जब एक मावा कारोबारी के यहां से बड़ी मात्रा में इस योजना के तहत दूध पाउडर की थेलियो की बड़ी खेप मिली। बच्चों के मुंह से दूध छीन कर बाजार में बेचा जा रहा है।
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा 8 तक के विद्यार्थियों को सरकार की ओर से पन्नाधाय बाल गोपाल योजना के तहत स्कूलों में दूध पिलाया जाता है। इसके लिए सरकार की ओर से विद्यार्थियों की संख्या के अनुसार हर स्कूल में सरस दूध के पाउडर की थैलियां आवंटित की जाती है बताया जाता है कि एक थैली में लगभग 1 किलो पाउडर होता है और इस एक थैली से करीब 30 से 35 किलो दूध तैयार होता है।
स्कूलों में आपूर्ति होने वाली यह सरस दूध पाउडर की थैलियां थोक के भाव में बाजार में दूध और मावा कारोबारियों को बेची जा रही है इसका नमूना प्रदेश की राजधानी जयपुर के सामोद उपखंड में पकड़ में आया जब एक मावा कारोबारी के यहां से सरस दूध पाउडर की बड़ी मात्रा में थेलिया मिली। सूत्रों के अनुसार मावा कारोबारी के यहां करीब 3000 किलो सरकारी दूध पाउडर की खेप मिली है।
इसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। हालांकि हम इस वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करते हैं लेकिन इस वीडियो के वायरल होने के बाद दूध आपूर्ति करने वाली राजस्थान को ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन ( आरसीडीएफ)ने तत्काल एक्शन लेते हुए सामोद थाने में एफआईआर (FIR)दर्ज कराई है।
सवाल जो सरकार और शिक्षा विभाग की कार्य प्रणाली को कटघरे में खड़ा करते हैं
स्कूलों में बच्चे दूध का इंतजार कर रहे हैं और उनका हक बाजार में बिक रहा है तो फिर इस खेल का मास्टरमाइंड कौन है?
किस अधिकारी के निगरानी में यह योजना संचालित है और यह सिस्टम कैसे फेल हुआ ? कौन है इसके पीछे जिम्मेदार ?
क्या यह सिर्फ कुछ लोगों का खेल है या पूरे नेटवर्क की कहानी?
कितनी स्कूलों के बच्चों का हक मार कर यह दूध सप्लाई नहीं की गई ? और कौन सा मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी एवं प्रिंसिपल या मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक जिम्मेदार है ?
बच्चों के पोषण पर डाका डालने वालों की सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, क्या जवाब देही भी तय होगी?
शिक्षा विभाग की ओर से अभी तक इस पर एक्शन क्यों नहीं लिया?
दूध पाउडर की थैलियां बचने का सदुपयोग कैसे करें
हमारी जांच पड़ताल में यह सामने आया है कई स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर आपूर्ति की जाने वाली दूध की थैलियां बच जाती है इसके पीछे कारण है कि कई बच्चे दूध नहीं पीते तो कभी बच्चे अनुपस्थित भी रहते हैं ऐसी स्थिति में जब दूध की थैलियां बच जाती है तो समझदार स्कूल के प्रिंसिपल इन बची हुई दूध की थैलियो के दूध पाउडर से दही जमा कर बच्चों को दोपहर के भोजन में दे देते हैं,दूध के पाउडर में खोपरे का बुरा ( नारियल पाउडर) मिलाकर खोपरे के लड्डू बनाकर बच्चों को दोपहर के भोजन में वितरित कर देते हैं। इस तरह इसका सदुपयोग कर लेते हैं। और बच्चों को पोषण भी मिल जाता है और बच्चे बड़े चाव से खा लेते हैं । अगर ऐसा सदुपयोग करने की गाइडलाइन शिक्षा विभाग जारी कर सभी प्रिंसिपलों को करने की निर्देश दिए जाएं तो शायद यह चोरी,घोटाला और दुरुपयोग रूक सकता है ?
